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कोयला आपूर्ति की मजबूरी ने अटकाया झांसी- कानपुर रेलवे ट्रैक का दोहरीकरण
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झांसी। ट्रेन की रफ्तार बढ़ाने के लिए झांसी मंडल के सबसे अहम झांसी-कानपुर रेलखंड का दोहरीकरण कराया जा रहा लेकिन, करीब 49 किमी का काम रेल अफसरों के लिए गले में हड्डी की तरह फंसा है। रेल अफसरों का कहना है कि पारीछा आदि प्लांटों को कोयला की नियमित आपूर्ति बनाए रखने के लिए ट्रैक बंद नहीं हो पा रहा है। इस वजह से यह काम अटका हुआ है।
वर्ष 2013 में झांसी-कानपुर रेलखंड के बीच 204 किमी लंबी रेलखंड के दोहरीकरण का कार्य मंजूर हुआ था। उसके बाद रेल विकास निगम लिमिटेड एवं एक निजी कंपनी ने यह काम शुरू कराया। कई अड़चनों के बाद किसी तरह 155 किमी का काम पूरा हुआ लेकिन, मलासा-लालपुर पामा रेलखंड पर 18.5 किमी, ऊसरगांव कालपी-चौराहा रेलखंड पर 13.9 किमी एवं पामा रसूलपुर-भीमसेन रेल खंड के बीच 17 किमी लंबा रेल खंड अटक गया। अब यह काम पूरा कराने में रेल अफसरों ने जोर लगाया है लेकिन, कोयला आपूर्ति सुनिश्चित रखने की वजह से ब्लॉक नहीं मिल रहा है। इस वजह से यह काम टलता जा रहा है। रेल अफसरों का कहना है ब्लॉक लेने की कोशिश की जा रही है। ब्लॉक की मंजूरी मिलते ही यह काम पूरा कर लिया जाएगा।
हालांकि इस साल तक यह काम पूरा हो जाने की उम्मीद है। इस बहुप्रतीक्षित दोहरीकरण कार्य के पूरा होने से न सिर्फ झांसी से कानपुर के बीच रास्ता आसान हो सकेगा बल्कि प्रयागराज समेत दक्षिण भारत की ओर का सफर भी कम समय में पूरा हो सकेगा।
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सिंगल ट्रैक होने की वजह से परेशानी
झांसी-कानपुर सिंगल रेलवे ट्रैक पर रोजाना 40 से अधिक अप एवं डाउन सवारी गाड़ियां गुजरती हैं। इतनी ही संख्या में मालगाड़ी भी इसी रास्ते से गुजरती हैं। एक ट्रेन को निकालने में सामने से आ रही दूसरी ट्रेन को नजदीक के रेलवे स्टेशन पर रोकना पड़ता है। इसका सीधा असर ट्रेनों के समय पालन पर पड़ता है। सबसे ज्यादा ट्रेनों को झांसी आने से पहले मुस्तरा स्टेशन पर रोका जाता है। यही कारण है कानपुर की ओर से आने वाली अधिकांश ट्रेनें समय पर झांसी नहीं पहुंच पाती। इस ट्रैक के दोहरीकरण होने से कानपुर, प्रयागराज समेत दक्षिण भारत की ओर जाने वाला सफर आसान हो सकेगा।
इस रेल खंड पर काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके विभिन्न रेल खंड पर काम तेजी से चल रहा है। उम्मीद है कि यह काम जल्द ही पूरा करा लिया जाएगा।
-आशुतोष, डीआरएम, झांसी मंडल
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वर्ष 2013 में झांसी-कानपुर रेलखंड के बीच 204 किमी लंबी रेलखंड के दोहरीकरण का कार्य मंजूर हुआ था। उसके बाद रेल विकास निगम लिमिटेड एवं एक निजी कंपनी ने यह काम शुरू कराया। कई अड़चनों के बाद किसी तरह 155 किमी का काम पूरा हुआ लेकिन, मलासा-लालपुर पामा रेलखंड पर 18.5 किमी, ऊसरगांव कालपी-चौराहा रेलखंड पर 13.9 किमी एवं पामा रसूलपुर-भीमसेन रेल खंड के बीच 17 किमी लंबा रेल खंड अटक गया। अब यह काम पूरा कराने में रेल अफसरों ने जोर लगाया है लेकिन, कोयला आपूर्ति सुनिश्चित रखने की वजह से ब्लॉक नहीं मिल रहा है। इस वजह से यह काम टलता जा रहा है। रेल अफसरों का कहना है ब्लॉक लेने की कोशिश की जा रही है। ब्लॉक की मंजूरी मिलते ही यह काम पूरा कर लिया जाएगा।
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हालांकि इस साल तक यह काम पूरा हो जाने की उम्मीद है। इस बहुप्रतीक्षित दोहरीकरण कार्य के पूरा होने से न सिर्फ झांसी से कानपुर के बीच रास्ता आसान हो सकेगा बल्कि प्रयागराज समेत दक्षिण भारत की ओर का सफर भी कम समय में पूरा हो सकेगा।
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सिंगल ट्रैक होने की वजह से परेशानी
झांसी-कानपुर सिंगल रेलवे ट्रैक पर रोजाना 40 से अधिक अप एवं डाउन सवारी गाड़ियां गुजरती हैं। इतनी ही संख्या में मालगाड़ी भी इसी रास्ते से गुजरती हैं। एक ट्रेन को निकालने में सामने से आ रही दूसरी ट्रेन को नजदीक के रेलवे स्टेशन पर रोकना पड़ता है। इसका सीधा असर ट्रेनों के समय पालन पर पड़ता है। सबसे ज्यादा ट्रेनों को झांसी आने से पहले मुस्तरा स्टेशन पर रोका जाता है। यही कारण है कानपुर की ओर से आने वाली अधिकांश ट्रेनें समय पर झांसी नहीं पहुंच पाती। इस ट्रैक के दोहरीकरण होने से कानपुर, प्रयागराज समेत दक्षिण भारत की ओर जाने वाला सफर आसान हो सकेगा।
इस रेल खंड पर काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके विभिन्न रेल खंड पर काम तेजी से चल रहा है। उम्मीद है कि यह काम जल्द ही पूरा करा लिया जाएगा।
-आशुतोष, डीआरएम, झांसी मंडल