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Jhansi News: महानगर को पानी देने का दावा धड़ाम, टैंकरों को लगाने पड़ रहे 900 से अधिक फेरे
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। जल निगम इस गर्मी में भी महानगर पेयजल योजना का काम पूरा नहीं कर सका। अफसरों ने अप्रैल से जलापूर्ति का दावा किया था लेकिन, अब तक घरों में पानी नहीं पहुंचा। काम की सुस्त रफ्तार को देखकर जुलाई में भी पानी पहुंचना मुश्किल है। अब सिर्फ टैंकर ही सहारा हैं। पानी पहुंचाने के लिए टैंकरों को रोजाना 900 से अधिक चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
महानगर को पानी देने के लिए 600.42 करोड़ रुपये से 21 जून 2019 को अमृत (झांसी पेयजल पुनर्गठन योजना) काम शुरू हुआ था। इसकी शुरुआती समय सीमा 20 जून 2022 तय हुई लेकिन, लेटलतीफी के चलते पांच बार इसे बढ़ाना पड़ा। तीन साल तक काम अटका रहा। मार्च में किसी तरह पाइप लाइन बिछाने का काम पूरा हुआ।
तत्कालीन जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने अप्रैल से जलापूर्ति आरंभ कराने का दावा किया था। इस योजना के पूरा होने से करीब 40 हजार घरों तक पानी पहुंचने की उम्मीद थी। इनमें दर्जनों इलाके ऐसे थे, जहां पहली बार पाइप लाइन से आपूर्ति होनी है। इन सभी को गर्मी में पानी की किल्लत से निजात मिलने की उम्मीद बंधी लेकिन, काम पूरा न होने से इस दफा भी इनको पानी नहीं मिल सका।
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पिछले सवा महीने से जल निगम अफसर पाइप लाइन की टेस्टिंग में ही उलझे हैं। इसी तरह मोहल्लों में बिछी पाइप लाइन भी टेस्ट नहीं हुई। जल निगम अभियंताओं का मानना है कि जुलाई से पहले आपूर्ति संभव नहीं है।
14 दिन से नहीं हो सकी टूटी पाइप लाइन की मरम्मत
बबीना के घिसौली के पास 28 अप्रैल को रॉ वाटर ग्रेविटी मेन लाइन को कुछ लोगों ने तोड़ दिया। इसके टूटने से टेस्टिंग का काम ठप पड़ गया। पाइप लाइन टूटे 14 दिन बीत चुके लेकिन, इसकी अब तक मरम्मत नहीं हुई। इससे टेस्टिंग ठप पड़ी है। जल निगम के मुताबिक मरम्मत में दो दिन का समय लगेगा।
कई मोहल्लों में नहीं टपकती बूंद
महानगर के 60 वार्डों में 40 से अधिक में पानी की किल्लत है। गर्मी आते ही बाहर बड़ागांव गेट, सराय मोहल्ला, दरीगरान, भांडेरी गेट, सिजरिया कॉलोनी, अलीगोल, कसाई मंडी, ओरछा गेट, आईटीआई कैंपस के पास, प्रेमनगर, पुरानी पुलिस चौकी, ताज कंपाउंड, मद्रासी कॉलोनी, सत्यम कॉलोनी, अन्नपूर्णा कॉलोनी, चार खंभा, बाहर उनाव गेट, ऋषिकुंज स्कूल के पास, मास्टर कॉलोनी सहित कई मोहल्लों में पानी की बूंद भी नहीं टपकती। यहां कई जगह पाइप लाइन है तो पानी नहीं आता। जबकि, कई जगह पाइपलाइन ही नहीं है। यहां सिर्फ टैंकरों के सहारे ही पानी पहुंचता है। कई मोहल्लों में सिर्फ हैंडपंप सहारा हैं। ऐसे में यहां लोग सुबह से पानी के लिए डिब्बे लेकर भटकते हैं। साइकिल, ठेला और गाड़ियों से पानी ढोना पड़ता है, जबकि महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे पैदल ही पानी भरकर लाने को मजबूर हैं।
चार साल में खो गई पाइप लाइन
केकेपुरी कॉलोनी एवं इसके आसपास करीब चार साल पहले पाइप लाइन बिछाई गई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब वह पाइप लाइन ही खो गई। कुछ दिन पहले जल निगम के ठेकेदार ने खोदाई कराई लेकिन, पाइप लाइन नहीं मिली।
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चार साल पहले मोहल्ले में पाइप लाइन बिछाई गई थी। अब इस पाइप लाइन का कुछ पता नहीं है। हमारे मोहल्ले तक पानी कब पहुंचेगा, इसके बारे में कुछ पता नहीं चल रहा है। जल निगम के अधिकारी भी कुछ नहीं बता रहे हैं।
- दीपक शर्मा
केके पुरी कॉलोनी, सरस्वती ज्ञान मंदिर पाठशाला के आसपास समेत कई मोहल्लों में जलापूर्ति का कोई इंतजाम नहीं है। टैंकरों से ही यहां पानी आता है। मोहल्ले में बिछाई गई पाइप लाइन का भी कुछ अता-पता नहीं।
विक्रम सिंह
चार साल से हम लोग पानी का इंतजार कर रहे हैं। अभी तक पानी नहीं मिला। मोहल्ले के लोगों को पैसा देकर टैंकर बुलवाना पड़ता है।
आकाश त्रिपाठी
000
घिसौली में पाइप लाइन क्षतिग्रस्त कर दी गई थी। इस वजह से टेस्टिंग का काम अब तक पूरा नहीं हो सका। पाइप लाइन की मरम्मत कराई जा रही है। जल्द मरम्मत पूरा कराकर आपूर्ति आरंभ कराई जाएगी।
-मुकेश पाल सिंह, अधिशासी अभियंता
जल निगम
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झांसी। जल निगम इस गर्मी में भी महानगर पेयजल योजना का काम पूरा नहीं कर सका। अफसरों ने अप्रैल से जलापूर्ति का दावा किया था लेकिन, अब तक घरों में पानी नहीं पहुंचा। काम की सुस्त रफ्तार को देखकर जुलाई में भी पानी पहुंचना मुश्किल है। अब सिर्फ टैंकर ही सहारा हैं। पानी पहुंचाने के लिए टैंकरों को रोजाना 900 से अधिक चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
महानगर को पानी देने के लिए 600.42 करोड़ रुपये से 21 जून 2019 को अमृत (झांसी पेयजल पुनर्गठन योजना) काम शुरू हुआ था। इसकी शुरुआती समय सीमा 20 जून 2022 तय हुई लेकिन, लेटलतीफी के चलते पांच बार इसे बढ़ाना पड़ा। तीन साल तक काम अटका रहा। मार्च में किसी तरह पाइप लाइन बिछाने का काम पूरा हुआ।
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तत्कालीन जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने अप्रैल से जलापूर्ति आरंभ कराने का दावा किया था। इस योजना के पूरा होने से करीब 40 हजार घरों तक पानी पहुंचने की उम्मीद थी। इनमें दर्जनों इलाके ऐसे थे, जहां पहली बार पाइप लाइन से आपूर्ति होनी है। इन सभी को गर्मी में पानी की किल्लत से निजात मिलने की उम्मीद बंधी लेकिन, काम पूरा न होने से इस दफा भी इनको पानी नहीं मिल सका।
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पिछले सवा महीने से जल निगम अफसर पाइप लाइन की टेस्टिंग में ही उलझे हैं। इसी तरह मोहल्लों में बिछी पाइप लाइन भी टेस्ट नहीं हुई। जल निगम अभियंताओं का मानना है कि जुलाई से पहले आपूर्ति संभव नहीं है।
14 दिन से नहीं हो सकी टूटी पाइप लाइन की मरम्मत
बबीना के घिसौली के पास 28 अप्रैल को रॉ वाटर ग्रेविटी मेन लाइन को कुछ लोगों ने तोड़ दिया। इसके टूटने से टेस्टिंग का काम ठप पड़ गया। पाइप लाइन टूटे 14 दिन बीत चुके लेकिन, इसकी अब तक मरम्मत नहीं हुई। इससे टेस्टिंग ठप पड़ी है। जल निगम के मुताबिक मरम्मत में दो दिन का समय लगेगा।
कई मोहल्लों में नहीं टपकती बूंद
महानगर के 60 वार्डों में 40 से अधिक में पानी की किल्लत है। गर्मी आते ही बाहर बड़ागांव गेट, सराय मोहल्ला, दरीगरान, भांडेरी गेट, सिजरिया कॉलोनी, अलीगोल, कसाई मंडी, ओरछा गेट, आईटीआई कैंपस के पास, प्रेमनगर, पुरानी पुलिस चौकी, ताज कंपाउंड, मद्रासी कॉलोनी, सत्यम कॉलोनी, अन्नपूर्णा कॉलोनी, चार खंभा, बाहर उनाव गेट, ऋषिकुंज स्कूल के पास, मास्टर कॉलोनी सहित कई मोहल्लों में पानी की बूंद भी नहीं टपकती। यहां कई जगह पाइप लाइन है तो पानी नहीं आता। जबकि, कई जगह पाइपलाइन ही नहीं है। यहां सिर्फ टैंकरों के सहारे ही पानी पहुंचता है। कई मोहल्लों में सिर्फ हैंडपंप सहारा हैं। ऐसे में यहां लोग सुबह से पानी के लिए डिब्बे लेकर भटकते हैं। साइकिल, ठेला और गाड़ियों से पानी ढोना पड़ता है, जबकि महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे पैदल ही पानी भरकर लाने को मजबूर हैं।
चार साल में खो गई पाइप लाइन
केकेपुरी कॉलोनी एवं इसके आसपास करीब चार साल पहले पाइप लाइन बिछाई गई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब वह पाइप लाइन ही खो गई। कुछ दिन पहले जल निगम के ठेकेदार ने खोदाई कराई लेकिन, पाइप लाइन नहीं मिली।
चार साल पहले मोहल्ले में पाइप लाइन बिछाई गई थी। अब इस पाइप लाइन का कुछ पता नहीं है। हमारे मोहल्ले तक पानी कब पहुंचेगा, इसके बारे में कुछ पता नहीं चल रहा है। जल निगम के अधिकारी भी कुछ नहीं बता रहे हैं।
- दीपक शर्मा
केके पुरी कॉलोनी, सरस्वती ज्ञान मंदिर पाठशाला के आसपास समेत कई मोहल्लों में जलापूर्ति का कोई इंतजाम नहीं है। टैंकरों से ही यहां पानी आता है। मोहल्ले में बिछाई गई पाइप लाइन का भी कुछ अता-पता नहीं।
विक्रम सिंह
चार साल से हम लोग पानी का इंतजार कर रहे हैं। अभी तक पानी नहीं मिला। मोहल्ले के लोगों को पैसा देकर टैंकर बुलवाना पड़ता है।
आकाश त्रिपाठी
000
घिसौली में पाइप लाइन क्षतिग्रस्त कर दी गई थी। इस वजह से टेस्टिंग का काम अब तक पूरा नहीं हो सका। पाइप लाइन की मरम्मत कराई जा रही है। जल्द मरम्मत पूरा कराकर आपूर्ति आरंभ कराई जाएगी।
-मुकेश पाल सिंह, अधिशासी अभियंता
जल निगम