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Jhansi News: कारसेवकों के लिए बच्चे घर से लेकर जाते थे खाने के पैकेट

Mon, 08 Jan 2024 02:18 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jan 2024 02:18 AM IST
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Children used to take food packets from home for kar sevaks
अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। राम मंदिर आंदोलन की प्रमुख धुरी युवा हुआ करते थे, लेकिन इसमें बच्चों की भागीदारी भी कम नहीं थी। उन्होंने बढ़-चढ़कर आंदोलन में सहभागिता की थी। बच्चे अपने स्कूल के टिफिन के साथ अलग से कारसेवकों के लिए भोजन के पैकेट बनवा के लाते थे, जो झांसी में जमा कारसेवकों को उपलब्ध कराए जाते थे। इतना ही नहीं, मंदिर निर्माण के लिए ईंट और धन संग्रह का काम भी स्कूली बच्चों ने किया था। अब अयोध्या में भव्य राम मंदिर को बनते देख वे फूले नहीं समा रहे हैं। वे कहते हैं कि सही समय पर मंदिर निर्माण का सपना साकार हुआ है। उन्हें खुशी है कि पहले वे आंदोलन का हिस्सा रहे और अब मंदिर का निर्माण होते देख रहे हैं।
राम मंदिर आंदोलन के दौरान झांसी में बाहर से आए हुए हजारों कारसेवकों का जमावड़ा था। इन कारसेवकों के लिए भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी झांसी में आंदोलन से जुड़े लोगों को सौंपी गई थी। सभी अपने-अपने स्तर से बाहरी कारसेवकों की मदद में जुटे हुए थे। इसमें स्कूल बच्चे भी आगे रहे थे। दतिया गेट बाहर सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ने वाले बच्चों को कारसेवकों के लिए अपने-अपने घरों से खाना लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बच्चे अपने टिफिन के साथ घर से खाने का एक अलग पैकेट लेकर आते थे, जिसमें कम से कम 20 पूड़ी, सब्जी और हरी मिर्च रखी होती थी। बच्चों के लाए हुए भोजन को बड़े-बड़े बर्तनों में भरवाकर ठेले में रखकर अस्थायी जेलों में बंद कारसेवकों के लिए राजकीय इंटर कॉलेज व बुंदेलखंड महाविद्यालय ले जाया जाता था। खास बात यह थी कि बच्चों के परिवार के लोग खुशी-खुशी कारसेवकों के लिए भोजन बनाकर देते थे। इसके अलावा बच्चों ने मंदिर निर्माण के लिए एक-एक ईंट के संग्रह व धन संग्रह में भी बढ़-चढ़कर अपना योगदान दिया था।
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आंदोलन का हिस्सा बन जाते थे सभी
भाजपा के प्रदेश सह संयोजक चंद्रभान राय ने बताया कि राम मंदिर आंदोलन के दरम्यान वह शिशु मंदिर में कक्षा आठवीं में पढ़ते थे। विद्यालय के सभी बच्चों को कारसेवकों के लिए कम से कम 20 पूड़ी, सब्जी और हरी मिर्च लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन, ज्यादातर बच्चों के परिवार के लोग इससे भी ज्यादा भोजन बांध देते थे। इस भोजन को स्कूल में इकट्ठा कर कारसेवकों तक पहुंचाया जाता था। इससे अप्रत्यक्ष रूप से स्कूलों के बच्चे व उनके परिवार के सदस्य आंदोलन का हिस्सा बन जाते थे।
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बच्चों की जुबान पर रहते थे नारे
भानी देवी गोयल सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के सह प्रबंधक मनोज अग्रवाल ने बताया कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान लगाए जाने वाले नारे उस समय बच्चों की जुबान पर रहते थे। कारसेवकों के लिए घर से खाना लाने में बच्चों को बहुत खुशी मिलती थी। माता-पिता भी राम का काज समझकर कारसेवकों के लिए ज्यादा से ज्यादा भोजन बनाकर देते थे। इसके अलावा सभी बच्चे मंदिर निर्माण के धन व ईंट संग्रह भी करते थे। अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण होते देखकर पुराने दिन आंखों के सामने तैरने लगे हैं।
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