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एक छत के नीचे होगा बच्चों की जन्मजात बीमारियों का इलाज
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एक ही छत के नीचे पांच साल तक के बच्चों की जन्मजात बीमारियों का इलाज हो सकेगा। कॉलेज में तीन महीने में डिस्ट्रिक अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीईआईसी) शुरू हो जाएगा। सेंटर में 70 फीसदी मशीनें आ चुकी हैं। यहां पर आंख, कान, दांत समेत बच्चों की मानसिक बीमारियों का इलाज हो सकेगा। दवाओं से लेकर जांच तक के कोई पैसे नहीं लगेंगे।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मेडिकल कॉलेज में 2019 को डीईआईसी सेंटर को मंजूरी मिली थी। इसके बाद बिल्डिंग का निर्माण कार्य शुरू हुआ। मगर कोविड के चलते पिछले डेढ़ सालों से इंटीरियर डिजाइनिंग का काम रुका पड़ा है। हालांकि भवन पूरी बनकर तैयार है। साथ ही डॉक्टर समेत स्टाफ के पद भी सृजित हो गए हैं। 70 फीसदी उपकरणों की भी खरीद की जा चुकी है। बताया गया कि इंटीरियर डिजाइनिंग का काम भी तीन महीने में पूरा हो जाएगा। ऐसे में अप्रैल तक ये सेंटर शुरू हो सकता है। सेंटर चालू होने के बाद जन्मजात बीमारियों का शिकार बच्चों के इलाज में बड़ी राहत मिलेगी। डाउन सिंड्रोम, बोल न पाने, सही से सुन न पाने वाले बच्चों को थेरेपी दी जाएगी। यहां पर जांच से लेकर पूरा इलाज नि:शुल्क होगा।
14 पदों का हुआ है सृजन
सेंटर में जन्मजात बीमारियों के इलाज के लिए 14 पदों का सृजन किया गया है। इसमें पीडियाट्रीशियन, साइकोलॉजिस्ट, ऑडियोलॉजिस्ट, डेंटल स्पेशिलिस्ट, ऑप्टोमेट्रिस्ट, मेडिकल ऑफिसर, डीईआईसी मैनेजर, फिजियोथैरेपिस्ट, डेंटल टेक्नीशियन, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन आदि शामिल हैं।
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डीईआईसी सेंटर पर एक छत के नीचे पांच साल तक के बच्चों की जन्मजात बीमारियों का इलाज होगा। तीन महीने में सेंटर शुरू हो जाएगा। अभी सिर्फ इंटीरियर डिजाइन का काम बचा हुआ है। - रामबाबू कुमार, डीईआईसी मैनेजर।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मेडिकल कॉलेज में 2019 को डीईआईसी सेंटर को मंजूरी मिली थी। इसके बाद बिल्डिंग का निर्माण कार्य शुरू हुआ। मगर कोविड के चलते पिछले डेढ़ सालों से इंटीरियर डिजाइनिंग का काम रुका पड़ा है। हालांकि भवन पूरी बनकर तैयार है। साथ ही डॉक्टर समेत स्टाफ के पद भी सृजित हो गए हैं। 70 फीसदी उपकरणों की भी खरीद की जा चुकी है। बताया गया कि इंटीरियर डिजाइनिंग का काम भी तीन महीने में पूरा हो जाएगा। ऐसे में अप्रैल तक ये सेंटर शुरू हो सकता है। सेंटर चालू होने के बाद जन्मजात बीमारियों का शिकार बच्चों के इलाज में बड़ी राहत मिलेगी। डाउन सिंड्रोम, बोल न पाने, सही से सुन न पाने वाले बच्चों को थेरेपी दी जाएगी। यहां पर जांच से लेकर पूरा इलाज नि:शुल्क होगा।
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14 पदों का हुआ है सृजन
सेंटर में जन्मजात बीमारियों के इलाज के लिए 14 पदों का सृजन किया गया है। इसमें पीडियाट्रीशियन, साइकोलॉजिस्ट, ऑडियोलॉजिस्ट, डेंटल स्पेशिलिस्ट, ऑप्टोमेट्रिस्ट, मेडिकल ऑफिसर, डीईआईसी मैनेजर, फिजियोथैरेपिस्ट, डेंटल टेक्नीशियन, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन आदि शामिल हैं।
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डीईआईसी सेंटर पर एक छत के नीचे पांच साल तक के बच्चों की जन्मजात बीमारियों का इलाज होगा। तीन महीने में सेंटर शुरू हो जाएगा। अभी सिर्फ इंटीरियर डिजाइन का काम बचा हुआ है। - रामबाबू कुमार, डीईआईसी मैनेजर।