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Jhansi News: मेडिकल कॉलेज की सेंट्रल लैब को एनएबीएल से मिली मान्यता
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बुंदेलखंड की पहली और प्रदेश की तीसरी लैब बनी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की सेंट्रल पैथोलॉजी लैब को उच्च गुणवत्ता की जांच के लिए एनएबीएल (नेशनल एक्रिडेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेट्री) ने मान्यता दी है। यह प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेज की तीसरी और बुंदेलखंड की पहली लैब है, जिसे एनएबीएल से मान्यता मिली है।
मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से संबद्ध एनएबीएल से 30 मई और एक जून को आई टीम ने लैब के साथ रोगियों की जांच रिपोर्टों का बारीकी से निरीक्षण किया। रोगियों और तीमारदारों से कई बिंदुओं पर पूछताछ कर रिकॉर्ड बनाया। दिल्ली लौटने के बाद टीम ने बीच-बीच में कई बिंदुओं पर जानकारियां हासिल की। एनएबीएल ने हर मानक पर खरा उतरने पर बृहस्पतिवार को रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज को मान्यता दे दी।
पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. मयंक सिंह ने बताया कि यह उपलब्धि उच्च गुणवत्ता से की जा रही जांचों के शत-प्रतिशत परिणाम को लेकर मिली है। लैब की गुणवत्ता प्रबंधन के लिए क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) वेल्लोर तमिलनाडु, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली आदि से करार हुआ है। ये संस्थाएं प्रत्येक माह सेंट्रल लैब की एक्सटर्नल क्वालिटी कंट्रोल के लिए सैंपल जांच करती हैं।
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उन्होंने बताया कि सेंट्रल लैब में करीब 100 प्रकार की जांच होती है, इसमें बायोकेमिस्ट्री, हार्मोन, हेमेटोलॉजी आदि हैं। लैब के अंदर प्रतिदिन करीब 5500 जांच की जाती है, इनमें हार्मोन की 30 से अधिक जांचें हैं, जैसे थायराइड, ट्यूमर मार्कर, थैलेसीमिया, फर्टिलिटी टेस्ट आदि। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि सेंट्रल लैब में चौबीसों घंटे न सिर्फ जांच होती है, बल्कि सैंपल का भी कलेक्शन किया जाता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की सेंट्रल पैथोलॉजी लैब को उच्च गुणवत्ता की जांच के लिए एनएबीएल (नेशनल एक्रिडेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेट्री) ने मान्यता दी है। यह प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेज की तीसरी और बुंदेलखंड की पहली लैब है, जिसे एनएबीएल से मान्यता मिली है।
मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से संबद्ध एनएबीएल से 30 मई और एक जून को आई टीम ने लैब के साथ रोगियों की जांच रिपोर्टों का बारीकी से निरीक्षण किया। रोगियों और तीमारदारों से कई बिंदुओं पर पूछताछ कर रिकॉर्ड बनाया। दिल्ली लौटने के बाद टीम ने बीच-बीच में कई बिंदुओं पर जानकारियां हासिल की। एनएबीएल ने हर मानक पर खरा उतरने पर बृहस्पतिवार को रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज को मान्यता दे दी।
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पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. मयंक सिंह ने बताया कि यह उपलब्धि उच्च गुणवत्ता से की जा रही जांचों के शत-प्रतिशत परिणाम को लेकर मिली है। लैब की गुणवत्ता प्रबंधन के लिए क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) वेल्लोर तमिलनाडु, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली आदि से करार हुआ है। ये संस्थाएं प्रत्येक माह सेंट्रल लैब की एक्सटर्नल क्वालिटी कंट्रोल के लिए सैंपल जांच करती हैं।
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उन्होंने बताया कि सेंट्रल लैब में करीब 100 प्रकार की जांच होती है, इसमें बायोकेमिस्ट्री, हार्मोन, हेमेटोलॉजी आदि हैं। लैब के अंदर प्रतिदिन करीब 5500 जांच की जाती है, इनमें हार्मोन की 30 से अधिक जांचें हैं, जैसे थायराइड, ट्यूमर मार्कर, थैलेसीमिया, फर्टिलिटी टेस्ट आदि। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि सेंट्रल लैब में चौबीसों घंटे न सिर्फ जांच होती है, बल्कि सैंपल का भी कलेक्शन किया जाता है।