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पंचमहल में दिखेगी बुंदेलखंड की विरासत
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झांसी। वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के ऐतिहासिक किले का पंच महल, मौज महल, जल्द ही देश-विदेश के सैलानियों को आकर्षक अंदाज में लुभाएगा। पंचमहल में बुंदेलखंड की प्राचीन मूर्तियों और 1857 की क्रांति से संबंधित दृश्यों को पर्यटक एक साथ ही देख सकेंगे। पंचमहल के ऊपरी तल पर डॉक्यूमेंट्री फिल्म सैलानियों को दिखाई जाएगी।
महानगर का ऐतिहासिक किला महारानी लक्ष्मीबाई और उनके सहयोगी वीरों तथा वीरांगनाओं के शौर्य का अहम गवाह है। सन 1613 में बने इस किले में पंचमहल का विशिष्ट स्थान है। इसे मौज महल भी कहा जाता है। पांच मंजिला इस महल में आकर्षक नक्काशी भी है। इस महल का उपयोग बुंदेला राजाओं से लेकर मराठा राजाओं और अंग्रेजों ने किया है। पंचमहल सैलानियों के लिए आकर्षण का और केंद्र बने, ऐसे में इसके ऊपरी तल की छत, शेड डलवाई जा रही है। उल्लेखनीय है कि ऐतिहासिक किले को देखने के लिए सैकड़ों सैलानी प्रतिदिन आते हैं।
इन सैलानियों को पंच महल में बुंदेलखंड की प्राचीन मूर्ति कला और 1857 की ऐतिहासिक क्रांति की झलक एक साथ देखने को मिले। इसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा लगभग पांच लाख रुपये की लागत से विभिन्न कार्य कराए जा रहे हैं। पंचमहल में रानी महल में रखी कई प्राचीन मूर्तियों को रखा जाएगा जो लगभग एक हजार साल पुरानी मानी जाती है। वहीं, पंचमहल में अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति और किले पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म सैलानियों को दिखाने की व्यवस्था होगी। संरक्षा सहायक अभिषेक कुमार के अनुसार सैलानियों को पंचमहल में बुंदेलखंड की विरासत एक साथ देखने को मिलेगी।
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महानगर का ऐतिहासिक किला महारानी लक्ष्मीबाई और उनके सहयोगी वीरों तथा वीरांगनाओं के शौर्य का अहम गवाह है। सन 1613 में बने इस किले में पंचमहल का विशिष्ट स्थान है। इसे मौज महल भी कहा जाता है। पांच मंजिला इस महल में आकर्षक नक्काशी भी है। इस महल का उपयोग बुंदेला राजाओं से लेकर मराठा राजाओं और अंग्रेजों ने किया है। पंचमहल सैलानियों के लिए आकर्षण का और केंद्र बने, ऐसे में इसके ऊपरी तल की छत, शेड डलवाई जा रही है। उल्लेखनीय है कि ऐतिहासिक किले को देखने के लिए सैकड़ों सैलानी प्रतिदिन आते हैं।
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इन सैलानियों को पंच महल में बुंदेलखंड की प्राचीन मूर्ति कला और 1857 की ऐतिहासिक क्रांति की झलक एक साथ देखने को मिले। इसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा लगभग पांच लाख रुपये की लागत से विभिन्न कार्य कराए जा रहे हैं। पंचमहल में रानी महल में रखी कई प्राचीन मूर्तियों को रखा जाएगा जो लगभग एक हजार साल पुरानी मानी जाती है। वहीं, पंचमहल में अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति और किले पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म सैलानियों को दिखाने की व्यवस्था होगी। संरक्षा सहायक अभिषेक कुमार के अनुसार सैलानियों को पंचमहल में बुंदेलखंड की विरासत एक साथ देखने को मिलेगी।
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