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कागजों में अटका बुंदेलखंड का पहला मानव तस्करी निरोधक थाना

Fri, 08 Oct 2021 01:21 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 08 Oct 2021 01:21 AM IST
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Bundelkhand's first anti-human trafficking station stuck in papers
झांसी। मानव तस्करी को रोकने के लिए सरकार ने बुंदेलखंड में पहला मानव तस्करी निरोधक थाना खोलने की इजाजत पिछले वर्ष दी थी लेकिन, अभी तक इसकी जगह ही तय नहीं हो सकी। थाना कागजों में अटका हुआ है। बुंदेलखंड के सभी आठ जिलों की निगरानी सिर्फ चुनिंदा स्टाफ के भरोसे ही हो रही है। स्टाफ नहीं होने से आज तक किसी बड़े रैकेट का भंडाफोड़ भी नहीं हो सका है।
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बुंदेलखंड के पिछड़ेपन को देखते हुए यह इलाका मानव तस्करों की खास निगाह में है। नौकरी के नाम पर बहला-फुसलाकर युवाओं को नेपाल समेत अन्य इलाकों में भेजे जाने के मामले प्रकाश में आते रहे हैं। अंगों की तस्करी करने वाला गिरोह भी गुपचुप तरीके से काम कर रहा है लेकिन, सीमित संसाधनों की वजह से पुलिस ऐसे किसी गिरोह का खुलासा नहीं कर सकी। इन इलाकों में मानव तस्करी के मामलों की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने वर्ष 2016 में यहां विशेष सेल गठित किया। इसके जरिए झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, चित्रकूट, बांदा के मानव तस्करोें की निगरानी होती है। झांसी में इसका मुख्यालय है लेकिन, काफी लंबा इलाका होने से सेल तकरीबन निष्क्रिय है।
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इसी बीच मानव तस्करी के मामलों में अंकुश लगाने के लिए सरकार ने वर्ष 2020 में झांसी में मानव तस्करी निरोधक थाना खोलने का प्रस्ताव मंजूर कर दिया। थाना खुलने पर यहां एक निरीक्षक, चार उपनिरीक्षक, दो हेड कांस्टेबल, 20 महिला आरक्षी एवं 30 पुरूष आरक्षी तैनात किए जाने थे। प्रस्ताव मंजूर होते ही यहां गतिविधियां तेज हो गईं। उम्मीद जताई जा रही कि कुछ माह के भीतर यह थाना खुल जाएगा लेकिन, करीब एक साल बाद भी इसकी फाइल आगे नहीं बढ़ सकी। शुरुआत में पुलिस लाइन के आसपास की जमीन सुझाई गई लेकिन, जगह कम होने की वजह से यह प्रस्ताव खारिज हो गया। इसके बाद से अभी तक पुलिस महकमा नई जमीन चिह्नित नहीं कर सका। यह नया थाना महकमे की फाइलों में ही सिमटा हुआ है। वहीं, एसएसपी शिवहरि मीना का कहना है कि अभी उनके सामने यह मामला नहीं आया है। इस संबंध में जानकारी करने के बाद ही कुछ कह सकेंगे।
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