फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   bundeli swang dance

होरी में लोग जनाने भए, मोखौ ऐसो वैसो न समझो, हम हैं रसिया माने भए, बुंदेलखंड की फागों के रंग रस में चार चांद लगाते हैं स्वांग, कोई बनता है जोकर तो कोई नृत्यांगना

Mon, 09 Mar 2020 01:21 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 09 Mar 2020 01:21 AM IST
विज्ञापन
bundeli swang dance
bundeli swang dance
झांसी। बुंदेलखंड में होलिका दहन के दूसरे दिन होने वाले फगुआ में फगुआरों की टोली पर जो मस्ती की खुमारी चढ़ती है वह अपने आप में अनूठी होती है। गांव की गलियों और चौपालों में ढोल नगड़िया की थाप के बीच जब लोग फागें गाते हैं तो माहौल पूरी तरह मस्ती भरा हो जाता है। इस महफिल में स्वांग भी रचाए जाते हैं। स्वांग यानि की फैंसी ड्रेस । इसमें बड़ी बड़ी मूंछों वाले पुरुष भी साड़ी व घांघरा पहनकर जनाने बन जाते हैं। कुछ युवक टोपी लगाकर जोकर बनकर साड़ी पहनकर महिला बनने का स्वांग रचने वाले युवक के साथ हंसी ठिठौली करते हैं। स्वांग बने युवक फाग की रसीली चौकड़ियों पर नृत्य करके जमकर धमाल मचाते हैं। इन स्वांगों को देखकर बुंदेलखंड में गाया जाता है, होली में लोग जनाने भए, हमखौ ऐसो वैसो न समझो हम हैं रसिया माने भए।
विज्ञापन

फाग गाने वाले गवाइयों की टोलिया द्वार द्वार पर जाती हैं। गांव के प्रतिष्ठित लोगों के साथ उनके ही दरवाजे पर महिला के रूप में स्वांग करने वाले पुरुष संभ्रांत लोगों से भी खूब हंसी मजाक करते हैं। देर रात तक चलने वाली महफिल में इनकी लोगों को हंसाने में बड़ी भूमिका होती है। फाग गायन के बीच-बीच में महिला व पुरुष का स्वांग करने वाले लोग एक दूसरे से बुंदेली भाषा में ही ऐसे व्यंग्य करते हैं, कि लोग बिना हंसे नहीं रह सकते हैं। पुरुष के रूप में स्वांग बनने वाले के सिर पर टोपी आंखों पर काला चश्मा और शरीर पर कई कपड़ों की चिंदियों से बना हुआ लिबास होता है, हाथ में बांस का डेढ़ामेढ़ा डंडा भी होता है, जो पुरुष महिला का स्वांग रचते हैं वह घाघरा चुनरी पहने रहते हैं तथा घूंघट डालकर फाग गायन के साथ नृत्य करते हैं। घाघरे के घेर को फैलाकर जब नगड़ियां की थाप पर यह नृतक नृत्य करते हैं तो फुगआरों की टोली में मदमस्त फगुआरे इनका हाथ पकड़ पकड़ कर खूब धमाल मचाते हैं। बुंदेलखंड के स्वांग की यह अनूठी विधा यहां फागोत्सव में रस रंग भर देती है।
विज्ञापन

बुंदेली स्वांग की बहुत पुरानी परंपरा है। इसके तहत फाग गायन के दौरान स्वांग रचने वाले लोग नाच तो करते ही हैं, साथ में बीच- बीच में मिमिक्री किसी व्यक्ति या पात्र की नकल करके लोगों को खूब हंसाते हैं। आपस में भी प्रणय प्रसंगों को लेकर की जाने वाली मसखरी स्वांगों को लोकप्रिय बनाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

डा. हिमांशु द्विवेदी
विभागाध्यक्ष नाटक एवं रंगमंच संकाय
राजा मान सिंह तोमर विश्वविद्यालय
बुंदेलखंड की फागों की जान हैं स्वांग। इनका हास्य रस ईसुरी की राग श्रृंगार की फागों में चार चांद लगा देता है। पर, वक्त के साथ लोगों में हुए वैरभाव के चलते स्वांग की परंपरा में भी काफी कमी आ गई है। अब लोग पहले जैसा खुलकर स्वांग नहीं खेलते हैं।
डा. चित्रगुप्त श्रीवास्तव
इतिहासकार
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed