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बीयू में खुलेगा हिंदी विभाग
ब्यूरो
Updated Fri, 22 Jan 2016 12:47 AM IST
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के विभागों की फेहरिस्त में अब एक और नाम जुड़ने जा रहा है। बीयू में जल्द ही हिंदी का विभाग खुलेगा। एक साल से लंबित प्रस्ताव पर कुलपति के हस्तक्षेप के बाद तेजी आ गई है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विभाग के लिए अनुदान देगा।
केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद 12वीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत अनुदान प्राप्त केंद्रीय, राज्य अथवा मानित विश्वविद्यालयों में जहां हिंदी का विभाग नहीं थे, वहां इसकी स्थापना हेतु प्रस्ताव मांगा गया था। 16 दिसंबर 2014 को यूजीसी की संयुक्त सचिव द्वारा बीयू कुलसचिव को पत्र भेजकर यूजीसी की विशेषज्ञ समिति द्वारा विभाग स्वीकृति की हरी झंडी मिलने की जानकारी दी गई थी।
विभाग के लिए आयोग द्वारा एक प्रोफेसर, दो एसोसिएट प्रोफेसर, चार असिस्टेंट प्रोफेसर के साथ-साथ भवन निर्माण को एक करोड़, उपकरण को पांच लाख, पुस्तकें व पत्र-पत्रिकाओं को पचास हजार, गोष्ठी, सम्मेलन, कार्यशाला को एक लाख, आकस्मिक व्यय को चालीस हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी।
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इस अनुदान के जारी रहने की तिथि 31 मार्च 2017 तक मान्य होगी। कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने बताया कि शिक्षकों के स्वीकृत पदों को भरने के लिए राज्य सरकार से अनुमति ली जाएगी। वहीं, जल्द ही गोष्ठी, कार्यशाला आयोजित कराई जाएंगी। इसके साथ ही पुस्तकों की खरीद कर सेंट्रल लाइब्रेरी में रखवाई जाएंगी।
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केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद 12वीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत अनुदान प्राप्त केंद्रीय, राज्य अथवा मानित विश्वविद्यालयों में जहां हिंदी का विभाग नहीं थे, वहां इसकी स्थापना हेतु प्रस्ताव मांगा गया था। 16 दिसंबर 2014 को यूजीसी की संयुक्त सचिव द्वारा बीयू कुलसचिव को पत्र भेजकर यूजीसी की विशेषज्ञ समिति द्वारा विभाग स्वीकृति की हरी झंडी मिलने की जानकारी दी गई थी।
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विभाग के लिए आयोग द्वारा एक प्रोफेसर, दो एसोसिएट प्रोफेसर, चार असिस्टेंट प्रोफेसर के साथ-साथ भवन निर्माण को एक करोड़, उपकरण को पांच लाख, पुस्तकें व पत्र-पत्रिकाओं को पचास हजार, गोष्ठी, सम्मेलन, कार्यशाला को एक लाख, आकस्मिक व्यय को चालीस हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी।
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इस अनुदान के जारी रहने की तिथि 31 मार्च 2017 तक मान्य होगी। कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने बताया कि शिक्षकों के स्वीकृत पदों को भरने के लिए राज्य सरकार से अनुमति ली जाएगी। वहीं, जल्द ही गोष्ठी, कार्यशाला आयोजित कराई जाएंगी। इसके साथ ही पुस्तकों की खरीद कर सेंट्रल लाइब्रेरी में रखवाई जाएंगी।