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बीयू: चार्ट फर्जीवाड़ा में चार के रिजल्ट निरस्त
ब्यूरो
Updated Fri, 05 Feb 2016 12:49 AM IST
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में टैबुलेशन चार्टों की कटिंग कर हुए फर्जीवाड़े में चार छात्रों के रिजल्ट निरस्त कर दिए गए हैं। जल्द ही कुछ और छात्रों पर गाज गिरने की उम्मीद जताई जा रही है।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में टैबुलेशन चार्टों में कटिंग का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। बीयू प्रशासन ने इस पर रोक लगाने के लिए विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से अब तक के सभी चार्टों के डिजिटाइजेशन कराने की प्रक्रिया शुरू की लेकिन अभी भी कई वर्षों के चार्ट डिजिटाइज्ड होने से रह गए हैं।
चूंकि, यह निर्णय पूर्व कुलपति प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय का था, इसलिए उनके हटते ही यह प्रक्रिया मंद पड़ गई है। अब इन्हीं हालातों का फायदा उठाते हुए चार्टों में कटिंग जोरों पर चल रही है। वहीं, कुछ पुराने मामलों में चार्टों में कटिंग कर फर्जीवाड़ा करने की शिकायत मिलने के बाद कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी थी।
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सूत्रों की मानें तो कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में चार्टों से हो रहे फर्जीवाड़े की पुष्टि कर दी है। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ही चार छात्रों का रिजल्ट निरस्त कर दिया गया है। विश्वविद्यालय के इतिहास में फर्जीवाड़े के मामले में यह बड़ी कार्रवाई बताई जा रही है।
एलएलबी के हैं सभी छात्र
जिन चार छात्रों के परीक्षा परिणाम निरस्त किए गए हैं, वह सभी बीकेडी के एलएलबी के छात्र हैं। सूत्रों ने बताया कि चारों छात्र पहले साल परीक्षा के दौरान फेल हो गए थे, बाद में उन्होंने बीयू कर्मचारियों से सेटिंग कर चार्टों में कटिंग कराकर नंबर बढ़वा लिए। इसके बाद छात्रों ने द्वितीय वर्ष में प्रवेश लिया। जांच में पाया गया कि फर्जीवाड़े में सहायक कुलसचिव के फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल हुआ है। उन्होंने खुद दस्तावेजों पर अपने हस्ताक्षर होने से इंकार किया है।
कर्मियों पर कस सकता शिकंजा
छात्रों पर कार्रवाई के बाद अब विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के खिलाफ शिकंजा कस सकता है। मनमाने पैसे वसूल कर जेबें गर्म करने वाले कर्मियों के खिलाफ अब बीयू प्रशासन को सबूत भी मिल गए हैं। इन्हीं सबूतों को सीढ़ी बनाकर बीयू प्रशासन फर्जीवाड़े में लिप्त गिरोह के गिरेबां तक पहुंच सकता है। इसके लिए बीयू प्रशासन छात्रों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करा सकता है।
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में टैबुलेशन चार्टों में कटिंग का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। बीयू प्रशासन ने इस पर रोक लगाने के लिए विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से अब तक के सभी चार्टों के डिजिटाइजेशन कराने की प्रक्रिया शुरू की लेकिन अभी भी कई वर्षों के चार्ट डिजिटाइज्ड होने से रह गए हैं।
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चूंकि, यह निर्णय पूर्व कुलपति प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय का था, इसलिए उनके हटते ही यह प्रक्रिया मंद पड़ गई है। अब इन्हीं हालातों का फायदा उठाते हुए चार्टों में कटिंग जोरों पर चल रही है। वहीं, कुछ पुराने मामलों में चार्टों में कटिंग कर फर्जीवाड़ा करने की शिकायत मिलने के बाद कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी थी।
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सूत्रों की मानें तो कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में चार्टों से हो रहे फर्जीवाड़े की पुष्टि कर दी है। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ही चार छात्रों का रिजल्ट निरस्त कर दिया गया है। विश्वविद्यालय के इतिहास में फर्जीवाड़े के मामले में यह बड़ी कार्रवाई बताई जा रही है।
एलएलबी के हैं सभी छात्र
जिन चार छात्रों के परीक्षा परिणाम निरस्त किए गए हैं, वह सभी बीकेडी के एलएलबी के छात्र हैं। सूत्रों ने बताया कि चारों छात्र पहले साल परीक्षा के दौरान फेल हो गए थे, बाद में उन्होंने बीयू कर्मचारियों से सेटिंग कर चार्टों में कटिंग कराकर नंबर बढ़वा लिए। इसके बाद छात्रों ने द्वितीय वर्ष में प्रवेश लिया। जांच में पाया गया कि फर्जीवाड़े में सहायक कुलसचिव के फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल हुआ है। उन्होंने खुद दस्तावेजों पर अपने हस्ताक्षर होने से इंकार किया है।
कर्मियों पर कस सकता शिकंजा
छात्रों पर कार्रवाई के बाद अब विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के खिलाफ शिकंजा कस सकता है। मनमाने पैसे वसूल कर जेबें गर्म करने वाले कर्मियों के खिलाफ अब बीयू प्रशासन को सबूत भी मिल गए हैं। इन्हीं सबूतों को सीढ़ी बनाकर बीयू प्रशासन फर्जीवाड़े में लिप्त गिरोह के गिरेबां तक पहुंच सकता है। इसके लिए बीयू प्रशासन छात्रों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करा सकता है।