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कहानियों का हुआ पाठ, पूछे गए सवाल
jhansi
Updated Tue, 19 Dec 2017 12:52 AM IST
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books festivle
- फोटो : amar ujala
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय पुस्तक मेले में कहानीकार मनीषा कुलश्रेष्ठ, चरण सिंह पथिक और बालेंदु द्विवेदी ने कहानियों का पाठ किया। रचनाकारों ने पुस्तक प्रेमियों के सवालों का जवाब देकर जिज्ञासाओं को शांत भी किया।
पुस्तक मेले में सोमवार को लेखक से मिलिए कार्यक्रम में कहानीकार मनीषा ने अपनी कहानी केयर आफ स्वात घाटी का पाठ किया। इसमें प्रज्ञा और गर्भाशय के बीच जूझती एक ऐसी स्त्री का वर्णन किया गया है, जो समाज की विडंबनाओं से घिरी है। वह स्त्री परिवार से विद्रोह का मानस बनाने के बाद पुन: उसी का आश्रय ग्रहण करती है। इसके बाद चरण सिंह पथिक ने अपनी कहानी ‘मुर्गा’ का पाठ किया। इसमें शिक्षा क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को रेखांकित किया गया है। बालेंदु द्विवेदी ने अपनी कहानी ‘बरम भोज’ का पाठ किया। इसमें गरीबी और नशाखोरी से घिरे व्यक्ति की मनोदशाओं और पूर्वांचल की सामाजिक विद्रूपताओं का उल्लेख किया गया। संजय तिवारी ने अपनी कविता ‘मैं यशोधरा बोल रही हूं’ का पाठ किया। कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने साहित्यकारों को स्मृति चिह्न दिए। नीरज व उनकी टीम ने रंगारंग प्रस्तुति दी।
आज के कार्यक्रम
मंगलवार को लेखक से मिलिए कार्यक्रम में बुंदेली के सभी रचनाकार पाठक मंच पर उपस्थित रहेंगे। सीताराम कुशवाहा और उनके साथी बुंदेली वाद्य यंत्र के साथ बुंदेली लोकगीत का कार्यक्रम पेश करेंगे।
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पुस्तक मेले में सोमवार को लेखक से मिलिए कार्यक्रम में कहानीकार मनीषा ने अपनी कहानी केयर आफ स्वात घाटी का पाठ किया। इसमें प्रज्ञा और गर्भाशय के बीच जूझती एक ऐसी स्त्री का वर्णन किया गया है, जो समाज की विडंबनाओं से घिरी है। वह स्त्री परिवार से विद्रोह का मानस बनाने के बाद पुन: उसी का आश्रय ग्रहण करती है। इसके बाद चरण सिंह पथिक ने अपनी कहानी ‘मुर्गा’ का पाठ किया। इसमें शिक्षा क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को रेखांकित किया गया है। बालेंदु द्विवेदी ने अपनी कहानी ‘बरम भोज’ का पाठ किया। इसमें गरीबी और नशाखोरी से घिरे व्यक्ति की मनोदशाओं और पूर्वांचल की सामाजिक विद्रूपताओं का उल्लेख किया गया। संजय तिवारी ने अपनी कविता ‘मैं यशोधरा बोल रही हूं’ का पाठ किया। कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने साहित्यकारों को स्मृति चिह्न दिए। नीरज व उनकी टीम ने रंगारंग प्रस्तुति दी।
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आज के कार्यक्रम
मंगलवार को लेखक से मिलिए कार्यक्रम में बुंदेली के सभी रचनाकार पाठक मंच पर उपस्थित रहेंगे। सीताराम कुशवाहा और उनके साथी बुंदेली वाद्य यंत्र के साथ बुंदेली लोकगीत का कार्यक्रम पेश करेंगे।
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