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झांसी में हुआ ब्लैक फंगस का पहला ऑपरेशन
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झांसी। झांसी में सोमवार को ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) का पहला ऑपरेशन हुआ। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की बारह सदस्यीय टीम ने तीन घंटे के ऑपरेशन में मरीज की नाक और आंख में मौजूद फंगस को साफ किया। ऑपरेशन सफल रहा और मरीज के जल्द स्वस्थ होने की संभावना जताई जा रही है।
ललितपुर के ग्राम पनारी निवासी अड़तीस वर्षीय विवेक तकरीबन डेढ़ महीने पहले कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आ गए थे। बाद में उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी। लेकिन, पिछले कुछ दिनों से उनकी आंख में सूजन थी और दर्द हो रहा था। इलाज के लिए वे शनिवार को महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पहुंचे थे। जांच में ब्लैक फंगस की आशंका नजर आई। इस पर उन्हें भर्ती कर लिया गया और एमआरआई जांच कराई गई, जिसमें फंगस की पुष्टि हुई। मधुमेह का स्तर बढ़ा होने की वजह से उनका तुरंत ऑपरेशन नहीं किया सका। चिकित्सकों ने पहले उनके मधुमेह को नियंत्रित किया। इसके बाद सोमवार को सुबह 11.30 बजे उन्हें ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया। यहां ईएनटी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. जितेंद्र यादव की अगुवाई में बारह सदस्यीय टीम ने उनका ऑपरेशन किया, जो लगभग तीन घंटे तक चला। बाद में डा. जितेंद्र यादव ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान मरीज की आंख और नाक में मौजूद फंगस के शिकार हिस्सों को हटा दिया गया है। ऑपरेशन सफल रहा है। मरीज जल्द ही स्वस्थ हो जाएगा। मरीज सही समय पर अस्पताल पहुंच गया था, वरना परेशानी और भी बढ़ सकती थी।
ब्लैक फंगस के दो मरीजों की हो चुकी है मौत
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में पिछले दिनों तीन कोरोना संक्रमितों में ब्लैक फंगस के लक्षण पाए गए थे। इनमें से बेहद कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले दो मरीजों की मौत भी हो चुकी है। ये दोनों ही मरीज वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे थे। ब्लैक फंगस के मरीज सामने आने के बाद अस्पताल में सतर्कता बढ़ा दी गई है। कोरोना वायरस से संक्रमित मधुमेह की मरीजों की निगरानी बढ़ा दी गई है। उनका मधुमेह का स्तर नियंत्रित रहे, इसके उपाय किए जाने लगे हैं। इसके अलावा मरीजों की मुंह, आंख, नाक, कान की नियमित जांच की व्यवस्था कर दी गई है।
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ये हैं लक्षण
झांसी। चिकित्सकों के अनुसार म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) अधिकतर कमजोर प्रतिरोधक क्षमता होने और मधुमेह स्तर बढ़ने पर प्रभाव डालता है। संदिग्ध मरीज की आंखों में लाली आना, सूजन, जलन और आंखों में पानी आता है। इसके बाद आंखें घूमना बंद कर देती हैं, धुंधलापन होने लगता है और आंख बाहर निकलने लगती है। लगातार अनदेखी करने पर आंखों की रोशनी भी जा सकती है। डॉक्टर बताते हैं कि गंभीर परिस्थिति में संक्रमण से प्रभावित अंग को काटना भी पड़ सकता है।
बरतें सावधान
झांसी। मधुमेह के रोगियों को इस बीमारी से ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे में अपने मधुमेह स्तर को नियंत्रित रखें। प्रतिरोधक क्षमता को कम नहीं होने दें। पर्याप्त नींद लें। साथ ही लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेकर एमआरआई और सीटी स्कैन करवाएं।
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ललितपुर के ग्राम पनारी निवासी अड़तीस वर्षीय विवेक तकरीबन डेढ़ महीने पहले कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आ गए थे। बाद में उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी। लेकिन, पिछले कुछ दिनों से उनकी आंख में सूजन थी और दर्द हो रहा था। इलाज के लिए वे शनिवार को महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पहुंचे थे। जांच में ब्लैक फंगस की आशंका नजर आई। इस पर उन्हें भर्ती कर लिया गया और एमआरआई जांच कराई गई, जिसमें फंगस की पुष्टि हुई। मधुमेह का स्तर बढ़ा होने की वजह से उनका तुरंत ऑपरेशन नहीं किया सका। चिकित्सकों ने पहले उनके मधुमेह को नियंत्रित किया। इसके बाद सोमवार को सुबह 11.30 बजे उन्हें ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया। यहां ईएनटी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. जितेंद्र यादव की अगुवाई में बारह सदस्यीय टीम ने उनका ऑपरेशन किया, जो लगभग तीन घंटे तक चला। बाद में डा. जितेंद्र यादव ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान मरीज की आंख और नाक में मौजूद फंगस के शिकार हिस्सों को हटा दिया गया है। ऑपरेशन सफल रहा है। मरीज जल्द ही स्वस्थ हो जाएगा। मरीज सही समय पर अस्पताल पहुंच गया था, वरना परेशानी और भी बढ़ सकती थी।
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ब्लैक फंगस के दो मरीजों की हो चुकी है मौत
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में पिछले दिनों तीन कोरोना संक्रमितों में ब्लैक फंगस के लक्षण पाए गए थे। इनमें से बेहद कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले दो मरीजों की मौत भी हो चुकी है। ये दोनों ही मरीज वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे थे। ब्लैक फंगस के मरीज सामने आने के बाद अस्पताल में सतर्कता बढ़ा दी गई है। कोरोना वायरस से संक्रमित मधुमेह की मरीजों की निगरानी बढ़ा दी गई है। उनका मधुमेह का स्तर नियंत्रित रहे, इसके उपाय किए जाने लगे हैं। इसके अलावा मरीजों की मुंह, आंख, नाक, कान की नियमित जांच की व्यवस्था कर दी गई है।
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ये हैं लक्षण
झांसी। चिकित्सकों के अनुसार म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) अधिकतर कमजोर प्रतिरोधक क्षमता होने और मधुमेह स्तर बढ़ने पर प्रभाव डालता है। संदिग्ध मरीज की आंखों में लाली आना, सूजन, जलन और आंखों में पानी आता है। इसके बाद आंखें घूमना बंद कर देती हैं, धुंधलापन होने लगता है और आंख बाहर निकलने लगती है। लगातार अनदेखी करने पर आंखों की रोशनी भी जा सकती है। डॉक्टर बताते हैं कि गंभीर परिस्थिति में संक्रमण से प्रभावित अंग को काटना भी पड़ सकता है।
बरतें सावधान
झांसी। मधुमेह के रोगियों को इस बीमारी से ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे में अपने मधुमेह स्तर को नियंत्रित रखें। प्रतिरोधक क्षमता को कम नहीं होने दें। पर्याप्त नींद लें। साथ ही लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेकर एमआरआई और सीटी स्कैन करवाएं।