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मिट्टी की सेहत सुधारेगी जैविक खाद
jhansi
Updated Fri, 12 Jan 2018 01:15 AM IST
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agriculture
- फोटो : demo pic
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जैविक खाद को बढ़ावा देने के लिए जिले के सभी गांवों में वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाई जाएगी। इसमें कृषि विभाग किसानों का सहयोग लेगा। एक गांव से एक ही किसान का चयन होगा। जिले के 745 गांवों में वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाने के लिए किसानों से 15 दिन में ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। जिन किसानों के पहले से रजिस्ट्रेशन हैं, उनको भी विकल्प भरना होगा। खेतों में वर्मी कंपोस्ट खाद का प्रयोग करने से खेत की मिट्टी में सुधार होगा।
बढ़ती जनसंख्या, खेतों का रकबा दिनों- दिन घटना, एक खेत से लगातार एक जैसी फसलें लेने, असंतुलित रासायनिक के प्रयोग और गोबर एवं कंपोस्ट खाद के कम से कम प्रयोग से खेतों की मिट्टी में जीवांश कार्बन की मात्रा लगातार कम होती जा रही है। इससे फसलों के उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है। मिट्टी में जीवांश कार्बन बढ़ाने के लिए जिले के सभी गांवों में वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाई जाएगी। यूनिट बनाने के लिए 07 गुणा 03 गुणा 01 कुल 21 घन मीटर जगह की जरूरत पड़ेगी। प्रत्येक यूनिट बनाने में 08 हजार रुपये खर्च होंगे। किसानों को लागत मूल्य का 50 प्रतिशत और राज्य सरकार द्वारा 25 प्रतिशत अधिकतम 75 प्रतिशत (छह हजार रुपये) अनुदान दिया जाएगा। एक गांव से एक ही किसान का चयन किया जाएगा, इसमें शर्त यह है कि किसान के पास कम से कम एक एकड़ जमीन होनी चाहिए।
ऐसे तैयार होगी
वर्मी कंपोस्ट बनाने के लिए ऐसे स्थान का चयन करना चाहिए, जहां दिन भर छाया रहती हो तथा जमीन की सतह से कम से कम एक मीटर ऊंचाई हो। पेड़ के नीचे या बगीचे में या पुआल का छप्पर बनाकर छायादार स्थान बनाकर 21 घन मीटर का गड्ढा बना लें। इसमें सबसे नीचे ईंट की 11 सेंटीमीटर की परत फिर 20 सेंटीमीटर मोरंग या बालू इसके ऊपर 15 सेंटीमीटर उपजाऊ मिट्टी की परत, इसके बाद आधा सड़ा गोबर डालकर छोड़ देना चाहिए। इसके ऊपर 5 से 10 सेंटीमीटर घरेलू कचरा जैसे फल व सब्जियों के टुकड़े, कटे फल, भूसा, मक्का जलकुंभी व पेड़ों की पत्तियां बिछा दें। 20 से 25 दिन तक पानी का छिड़काव करें। इसके बाद प्रत्येक सप्ताह दो बार 10 सेंटीमीटर सड़ने योग्य कचरा की तह लगाएं और रोज पानी का छिड़काव करें। 6-7 सप्ताह में वर्मी कंपोस्ट बनकर तैयार हो जाती है।
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केंचुआ हैं कारगर
वर्मी कंपोस्ट बनाने के लिए केंचुआ जरूर डालना चाहिए। केंचुआ कचरे के ढेर के नीचे से कंपोस्ट बनाते हुए ऊपर की ओर चलते हैं। इससे कचरे की नई सतह तैयार हो जाती है। लाल प्रजाति के केंचुआ इसके लिए अधिक उपयोगी हैं।
वर्मी कंपोस्ट से लाभ
- वर्मी कंपोस्ट रासायनिक खाद की खपत को कम करके मिट्टी की सेहत सुरक्षित करने का प्रभावी उपाय है।
- मिट्टी के भौतिक तथा जैविक गुणों में सुधार होता है।
- मिट्टीमें नाइट्रोजन स्थिर करने वाले जीवाणुओं की संख्या बड़ती है।
- कचरे से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण होता है।
- वर्मी कंपोस्ट से तैयार फसल, फल व सब्जी की गुणवत्ता बढ़ती है।
15 दिन में कराएं पंजीकरण
जो किसान वर्मी कंपोस्ट यूनिट बनाना चाहते हैं वह 15 दिन में upagriculture.com पर आवेदन कर सकते हैं। जिन किसानों का पहले से पंजीकरण है, उन्हें अलग से आनलाइन आवेदन करना होगा। ‘पहले आओ पहल पाओ’ के आधार पर चयन होगा।
- रामप्रताप
उप कृषि निदेशक
ग्रामसभा आरक्षित है तो उसी किसान को मिलेगा लाभ
यदि कोई ग्राम सभा अनुसूचित जाति/ जनजाति के लिए आरक्षित है तो वहां से अनुसूचित जाति/ जनजाति के किसान का ही चयन किया जाएगा। यदि ग्रामसभा महिलाओं के लिए आरक्षित है तो वहां से महिला कृषक का चयन किया जाएगा।
बढ़ती जनसंख्या, खेतों का रकबा दिनों- दिन घटना, एक खेत से लगातार एक जैसी फसलें लेने, असंतुलित रासायनिक के प्रयोग और गोबर एवं कंपोस्ट खाद के कम से कम प्रयोग से खेतों की मिट्टी में जीवांश कार्बन की मात्रा लगातार कम होती जा रही है। इससे फसलों के उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है। मिट्टी में जीवांश कार्बन बढ़ाने के लिए जिले के सभी गांवों में वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाई जाएगी। यूनिट बनाने के लिए 07 गुणा 03 गुणा 01 कुल 21 घन मीटर जगह की जरूरत पड़ेगी। प्रत्येक यूनिट बनाने में 08 हजार रुपये खर्च होंगे। किसानों को लागत मूल्य का 50 प्रतिशत और राज्य सरकार द्वारा 25 प्रतिशत अधिकतम 75 प्रतिशत (छह हजार रुपये) अनुदान दिया जाएगा। एक गांव से एक ही किसान का चयन किया जाएगा, इसमें शर्त यह है कि किसान के पास कम से कम एक एकड़ जमीन होनी चाहिए।
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ऐसे तैयार होगी
वर्मी कंपोस्ट बनाने के लिए ऐसे स्थान का चयन करना चाहिए, जहां दिन भर छाया रहती हो तथा जमीन की सतह से कम से कम एक मीटर ऊंचाई हो। पेड़ के नीचे या बगीचे में या पुआल का छप्पर बनाकर छायादार स्थान बनाकर 21 घन मीटर का गड्ढा बना लें। इसमें सबसे नीचे ईंट की 11 सेंटीमीटर की परत फिर 20 सेंटीमीटर मोरंग या बालू इसके ऊपर 15 सेंटीमीटर उपजाऊ मिट्टी की परत, इसके बाद आधा सड़ा गोबर डालकर छोड़ देना चाहिए। इसके ऊपर 5 से 10 सेंटीमीटर घरेलू कचरा जैसे फल व सब्जियों के टुकड़े, कटे फल, भूसा, मक्का जलकुंभी व पेड़ों की पत्तियां बिछा दें। 20 से 25 दिन तक पानी का छिड़काव करें। इसके बाद प्रत्येक सप्ताह दो बार 10 सेंटीमीटर सड़ने योग्य कचरा की तह लगाएं और रोज पानी का छिड़काव करें। 6-7 सप्ताह में वर्मी कंपोस्ट बनकर तैयार हो जाती है।
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केंचुआ हैं कारगर
वर्मी कंपोस्ट बनाने के लिए केंचुआ जरूर डालना चाहिए। केंचुआ कचरे के ढेर के नीचे से कंपोस्ट बनाते हुए ऊपर की ओर चलते हैं। इससे कचरे की नई सतह तैयार हो जाती है। लाल प्रजाति के केंचुआ इसके लिए अधिक उपयोगी हैं।
वर्मी कंपोस्ट से लाभ
- वर्मी कंपोस्ट रासायनिक खाद की खपत को कम करके मिट्टी की सेहत सुरक्षित करने का प्रभावी उपाय है।
- मिट्टी के भौतिक तथा जैविक गुणों में सुधार होता है।
- मिट्टीमें नाइट्रोजन स्थिर करने वाले जीवाणुओं की संख्या बड़ती है।
- कचरे से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण होता है।
- वर्मी कंपोस्ट से तैयार फसल, फल व सब्जी की गुणवत्ता बढ़ती है।
15 दिन में कराएं पंजीकरण
जो किसान वर्मी कंपोस्ट यूनिट बनाना चाहते हैं वह 15 दिन में upagriculture.com पर आवेदन कर सकते हैं। जिन किसानों का पहले से पंजीकरण है, उन्हें अलग से आनलाइन आवेदन करना होगा। ‘पहले आओ पहल पाओ’ के आधार पर चयन होगा।
- रामप्रताप
उप कृषि निदेशक
ग्रामसभा आरक्षित है तो उसी किसान को मिलेगा लाभ
यदि कोई ग्राम सभा अनुसूचित जाति/ जनजाति के लिए आरक्षित है तो वहां से अनुसूचित जाति/ जनजाति के किसान का ही चयन किया जाएगा। यदि ग्रामसभा महिलाओं के लिए आरक्षित है तो वहां से महिला कृषक का चयन किया जाएगा।