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ब्रेक लगाने पर बिजली पैदा करेगा रेल का इंजन, बीएचईएल ने विकसित किया रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम
Fri, 08 Feb 2019 09:21 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
Published by: Vikas Kumar
Updated Fri, 08 Feb 2019 09:21 PM IST
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ट्रेन इंजन
- फोटो : फाइल फोटो
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रेलवे द्वारा बहुतायत संख्या में प्रयोग किए जाने वाले ‘डब्लूएजी-7’ इंजन में भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) ने नवीन तकनीकी विकसित की है, जिसके तहत ब्रेक लगने पर पैदा होने वाली ऊर्जा से बिजली उत्पादित होगी, जिसे वापस ओवरहेड लाइन में फीड किया जाएगा। इस प्रयोग के सफल होने पर शुक्रवार को पहला नवीन तकनीकी से लैस इंजन रेलवे को समर्पित किया गया।
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रेलवे के डब्लूएजी-7 इंजन डीसी मोटर पर संचालित किए जाते हैं। इसमें डायनामिक ब्रेकिंग के दौरान बहुत सारी ऊर्जा निकलती है, जो गर्मी के रूप में बर्बाद हो जाती है। इस ऊर्जा को बचाने के लिए बीएचईएल ने रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम (पुनर्योजी ब्रेकिंग प्रणाली) विकसित की है। इसके तहत इंजन में लगी डीसी ट्रैक्शन मोटर्स ब्रेक लगाने पर जेनरेटर की तरह काम करने लगती हैं। 15 से सौ किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रहे इंजन में ये काम करती है। इंजन की गति के अनुसार प्रत्येक ब्रेकिंग पर 30 से 50 किलोवाट ऊर्जा का उत्पादन होता है। नव विकसित की गई प्रणाली में उत्पादित ऊर्जा वापस ओएचई लाइन में भेजने की व्यवस्था की गई है।
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बीएचईएल के अध्यक्ष एवं प्रबंधक निदेशक अतुल सोबती ने बताया कि रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम से लैस देश का ये पहला इंजन है। इससे रेलवे की बिजली की बचत होगी। ये प्रणाली बीएचईएल ने अपने प्रयासों से ‘मेक इन इंडिया’ के तहत विकसित की है। शुक्रवार को बीएचईएल की झांसी इकाई में आयोजित कार्यक्रम में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम से लैस पहले इंजन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस मौके पर रेलवे बोर्ड के मेंबर (ट्रैक्शन) घनश्याम सिंह विशेष रूप से मौजूद रहे।
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