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Jhansi News: चाहे थाना हो या तहसील.. हर काम की तय है ‘फीस’
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। सरकारी दफ्तरों में हर काम की कीमत तय है। तहसील में चाहे दाखिल खारिज कराना हो, चाहे वरासत या फिर थाने का कोई काम, बिना सुविधा शुल्क दिए काम हो पाना संभव नहीं। झांसी एंटी करप्शन टीम पिछले 18 महीने में रिश्वत के मोह में फंसे 29 सरकारी कर्मचारियों को अपना निशाना बना चुकी है। हालांकि, रिश्वत लेने वालों के मुकाबले यह संख्या बेहद कम है।
एंटी करप्शन का निशाना बनने वालों में सबसे अधिक लेखपाल, दरोगा, सिपाही से लेकर शिक्षा विभाग के स्टेनो शामिल हैं। बीएसए का स्टेनो सुरेश कुमार शिक्षिका से पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा जा चुका है। इसी तरह, डीआईओएस उरई कार्यालय में तैनात बाबू को जीपीएफ का पैसा मांगने पर टीम ने रंगे हाथ पकड़ा था। यह सब चंद नमूने हैं। तकरीबन हर विभाग में ही रिश्वतखोर कर्मचारियों का मकड़जाल है। थानों में बिना सुविधा शुल्क चुकाए सत्यापन रिपोर्ट तक लगना मुश्किल है।यही हाल बिजली विभाग, खनिज, सिंचाई विभाग, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग का भी है। बिजली विभाग, नगर निगम के कर्मचारी भी कुछ महीने पहले ही एंटी करप्शन टीम के हत्थे चढ़ चुके हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि हर विभाग के कर्मचारियों की शिकायतें मिलती हैं। अभी तक 31 से ज्यादा शिकायतें लंबित हैं। वहीं, एजेंसियां भी लोगों को इसके लिए जागरूक कर रही हैं।
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