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बरुआसागर का किला छह माह से अंधेरे में
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Thu, 08 Oct 2015 01:18 AM IST
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झांसी। बुंदेलखंड परिपथ के अंतर्गत केंद्रीय योजना से बरुआसागर किले में सौ
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से अधिक आकर्षक फसाड लाइटें लगाई गई थीं, लेकिन विद्युत बिलों का भुगतान न
होने से बिजली निगम ने संयोजन काट दिया है, जिससे पिछले छह माह से किले
में अंधेरा पसरा है। ऐसे में पर्यटकों को आकर्षित करने की योजना परवान
चढ़ने से पहले ही ठप्प हो गई।
भारत सरकार ने पर्यटन विभाग के माध्यम से मराठा राजाओं के बरुआसागर स्थित ग्रीष्म कालीन किला को रोशनी से जगमग करने के लिए लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से सौ से अधिक फसाड, फोकस, हाई मास्क लगवाए थे, ताकि खजुराहो आने-जाने वाले पर्यटक किले की ओर भी आकर्षित हों और पर्यटन का विकास हो। किले के आंतरिक व बाहरी हिस्से में इन लाइटों के लगने के बाद विद्युत बिल के भुगतान की जिम्मेदारी नगरपालिका परिषद बरुआसागर को दी गई और लाइटों को हस्तगत भी कराया गया, लेकिन विद्युत बिल लगभग करीब तीन लाख रुपये आने पर संबंधित विभाग ने जमा करने से हाथ खडे़ कर दिए। ऐसे में विद्युत निगम ने संयोजन काट दिया, जिससे लगभग छह माह से किला अंधेरे में है।
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे के मुताबिक किले में फसाड लाइटों के जलने से पर्यटकों की संख्या बढ़ने लगी थी, लेकिन अब अंधेरा रहने से विपरीत प्रभाव पड़ा है। वहीं, नगरपालिका परिषद अध्यक्ष डॉ. मंजू मेहेर यादव ने हमारे संवाददाता को बताया कि पर्यटन विभाग द्वारा लगाई गई लाइटों के लिए विद्युत संयोजन 55 किलो वाट का है, जिससे पालिका पर राजस्व का अत्यधिक भार पड़ रहा है। वहीं विभाग द्वारा लगाई गई लाइटों का भार 55 किलोवाट का नहीं है। 25 किलोवाट का विद्युत संयोजन कराने की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही किला रोशनी से जगमगाएगा।
47 वर्ष में निर्मित हुआ था किला
ऐतिहासिक ग्रीष्मकालीन किले के रूप में प्रचलित बरुआसागर का किला ओरछा के राजा उदित सिंह ने 1689 में बनवाया था। इसका निर्माण 1736 में पूरा हुआ था। निर्माण में ग्रेनाइट पत्थर, लाहौरी ईंट, चूने के मसाले का प्रयोग हुआ है। किले के पास बरुआसागर ताल होने व झरना बहने के कारण शासकों ने इसको ग्रीष्मकालीन किले का नाम दिया। यह किला 1744 में बुंदेला व मराठाओं के बीच हुए युद्ध का गवाह रहा, जिसमें ग्वालियर के शासक महादजी सिंधिया के भाई ज्योति भाऊ सिंधिया ने वीर गति पाई थी। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे के मुताबिक किले में महाराजा गंगाधर राव व महारानी लक्ष्मीबाई भी कुछ समय के लिए ठहरे थे। वर्ष 1988 में यह किला राज्य पुरातत्व विभाग के संरक्षण में आया।
भारत सरकार ने पर्यटन विभाग के माध्यम से मराठा राजाओं के बरुआसागर स्थित ग्रीष्म कालीन किला को रोशनी से जगमग करने के लिए लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से सौ से अधिक फसाड, फोकस, हाई मास्क लगवाए थे, ताकि खजुराहो आने-जाने वाले पर्यटक किले की ओर भी आकर्षित हों और पर्यटन का विकास हो। किले के आंतरिक व बाहरी हिस्से में इन लाइटों के लगने के बाद विद्युत बिल के भुगतान की जिम्मेदारी नगरपालिका परिषद बरुआसागर को दी गई और लाइटों को हस्तगत भी कराया गया, लेकिन विद्युत बिल लगभग करीब तीन लाख रुपये आने पर संबंधित विभाग ने जमा करने से हाथ खडे़ कर दिए। ऐसे में विद्युत निगम ने संयोजन काट दिया, जिससे लगभग छह माह से किला अंधेरे में है।
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे के मुताबिक किले में फसाड लाइटों के जलने से पर्यटकों की संख्या बढ़ने लगी थी, लेकिन अब अंधेरा रहने से विपरीत प्रभाव पड़ा है। वहीं, नगरपालिका परिषद अध्यक्ष डॉ. मंजू मेहेर यादव ने हमारे संवाददाता को बताया कि पर्यटन विभाग द्वारा लगाई गई लाइटों के लिए विद्युत संयोजन 55 किलो वाट का है, जिससे पालिका पर राजस्व का अत्यधिक भार पड़ रहा है। वहीं विभाग द्वारा लगाई गई लाइटों का भार 55 किलोवाट का नहीं है। 25 किलोवाट का विद्युत संयोजन कराने की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही किला रोशनी से जगमगाएगा।
47 वर्ष में निर्मित हुआ था किला
ऐतिहासिक ग्रीष्मकालीन किले के रूप में प्रचलित बरुआसागर का किला ओरछा के राजा उदित सिंह ने 1689 में बनवाया था। इसका निर्माण 1736 में पूरा हुआ था। निर्माण में ग्रेनाइट पत्थर, लाहौरी ईंट, चूने के मसाले का प्रयोग हुआ है। किले के पास बरुआसागर ताल होने व झरना बहने के कारण शासकों ने इसको ग्रीष्मकालीन किले का नाम दिया। यह किला 1744 में बुंदेला व मराठाओं के बीच हुए युद्ध का गवाह रहा, जिसमें ग्वालियर के शासक महादजी सिंधिया के भाई ज्योति भाऊ सिंधिया ने वीर गति पाई थी। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे के मुताबिक किले में महाराजा गंगाधर राव व महारानी लक्ष्मीबाई भी कुछ समय के लिए ठहरे थे। वर्ष 1988 में यह किला राज्य पुरातत्व विभाग के संरक्षण में आया।