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सुबह से शाम कोरोना को हराने के बता रहीं नुस्खे, दे रहीं पैगाम
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लोगों के घर घर जाकर कोरोना वायरस से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग के तरीके बता रही है नागरिक सुरक्?
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झांसी। कोरोना से लड़ाई के दौरान उन्हें घर की चिंता नहीं है और न ही परिवार का मोह है। बस कोरोना को हराना ही उन्होंने ठान लिया है। लोगों को कोरोना से बचाने के लिए सड़क पर उतरकर पूरी जिम्मेदारी के साथ कामों को अंजाम दे रही हैं। पीली जैकेट और कैप लगाकर पूरी तन्मयता से कोरोना की जंग में जुटी नारी शक्ति लोगों को लॉकडाउन का पालन कराने की सलाह दे रही है।
महानगर के लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए सिविल डिफेंस की महिला शक्ति पूरे मनोयोग से जुटी है। ये महिलाएं सुबह 10 बजे घर से निकलती हैं। इसके बाद कभी बैंक के बाहर लाइन लगवाती हैं, तो कभी चौराहे पर खड़े होकर बेवजह घूम रहे लोगों को रोकती हैं। इस महिला ब्रिगेड में तमाम ऐसी महिलाएं हैं, जो बीते 18 साल से सिविल डिफेंस के जरिए तमाम सामाजिक कार्यों को अंजाम दे रही हैं। कोरोना के दौर में उनकी जिम्मेदारी दोगुनी हो गई है। अब वे सड़क पर कभी झांकी के जरिए लोगों को जागरूक कर रही हैं, तो कभी हाउस मैपिंग के जरिए डाटा जुटा रही हैं। साथ ही शाम को माइक लेकर तमाम गली मोहल्लों में लोगों से घर में रहने की अपील करती हैं। महिलाओं का कहना है कि परिवार के लोग भी उनका पूरा साथ देते हैं। इस दौर में सबको अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
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कहती हैं महिलाएं
बीते 18 साल से सिविल डिफेंस से जुड़ी हूं। कोरोना के दौर में बैंक के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करा रही हूं। सामाजिक कार्य करके अच्छा लगता है।- कल्पना सिंह
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सुबह 10 बजे घर से निकलती हूं। बैंक आकर लाइन लगवाने के साथ शाम को मोहल्ले में माइक के जरिए लोगों को घरों में रहने के लिए प्रेरित करती हूं।- संगीता सिंह
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सिविल डिफेंस को प्रशासन ने हाउस मैपिंग का जिम्मा सौंपा था। इस काम में बढ़-चढ़कर सहयोग किया। लोगों को भी लॉकडाउन के पालन के लिए बताते हैं।- पुष्पा रायकवार
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हमारा काम लोगों को जागरूक करना है। कभी-कभी लोग लॉकडाउन और कोरोना संक्रमण के प्रभाव को समझते नहीं हैं। हम उन्हें सही जानकारी देते हैं।- मानसी सिंह
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लॉकडाउन का पालन कराने के लिए लोगों को जागरूक करते हैं। बैंक और अपने क्षेत्र की किराना दुकानों के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग कराते हैं।- अनुष्का विश्वकर्मा
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अच्छा लगता है कि संकट के दौर में सिविल डिफेंस के जरिए देश की मदद कर पा रहे हैं। लोगों को भी लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंस को अपनाना होगा।- रत्ना चक्रवर्ती
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महानगर के लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए सिविल डिफेंस की महिला शक्ति पूरे मनोयोग से जुटी है। ये महिलाएं सुबह 10 बजे घर से निकलती हैं। इसके बाद कभी बैंक के बाहर लाइन लगवाती हैं, तो कभी चौराहे पर खड़े होकर बेवजह घूम रहे लोगों को रोकती हैं। इस महिला ब्रिगेड में तमाम ऐसी महिलाएं हैं, जो बीते 18 साल से सिविल डिफेंस के जरिए तमाम सामाजिक कार्यों को अंजाम दे रही हैं। कोरोना के दौर में उनकी जिम्मेदारी दोगुनी हो गई है। अब वे सड़क पर कभी झांकी के जरिए लोगों को जागरूक कर रही हैं, तो कभी हाउस मैपिंग के जरिए डाटा जुटा रही हैं। साथ ही शाम को माइक लेकर तमाम गली मोहल्लों में लोगों से घर में रहने की अपील करती हैं। महिलाओं का कहना है कि परिवार के लोग भी उनका पूरा साथ देते हैं। इस दौर में सबको अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
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कहती हैं महिलाएं
बीते 18 साल से सिविल डिफेंस से जुड़ी हूं। कोरोना के दौर में बैंक के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करा रही हूं। सामाजिक कार्य करके अच्छा लगता है।- कल्पना सिंह
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सुबह 10 बजे घर से निकलती हूं। बैंक आकर लाइन लगवाने के साथ शाम को मोहल्ले में माइक के जरिए लोगों को घरों में रहने के लिए प्रेरित करती हूं।- संगीता सिंह
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सिविल डिफेंस को प्रशासन ने हाउस मैपिंग का जिम्मा सौंपा था। इस काम में बढ़-चढ़कर सहयोग किया। लोगों को भी लॉकडाउन के पालन के लिए बताते हैं।- पुष्पा रायकवार
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हमारा काम लोगों को जागरूक करना है। कभी-कभी लोग लॉकडाउन और कोरोना संक्रमण के प्रभाव को समझते नहीं हैं। हम उन्हें सही जानकारी देते हैं।- मानसी सिंह
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लॉकडाउन का पालन कराने के लिए लोगों को जागरूक करते हैं। बैंक और अपने क्षेत्र की किराना दुकानों के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग कराते हैं।- अनुष्का विश्वकर्मा
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अच्छा लगता है कि संकट के दौर में सिविल डिफेंस के जरिए देश की मदद कर पा रहे हैं। लोगों को भी लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंस को अपनाना होगा।- रत्ना चक्रवर्ती