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एटीएम छोड़ गए साथ, नकदी के लिए लोग हुए परेशान
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झांसी। लगातार दो दिनों तक बैंकों में अवकाश रहा। ऐसे में लोग नकदी के लिए पूरी तरह से एटीएम पर आश्रित रहे। लेकिन, शुक्रवार को महानगर के ज्यादातर एटीएम साथ छोड़ गए। किसी में नकदी नहीं थी तो किसी की मशीन खराब थी। इन हालतों में लोग भीषण गर्मी में पैसे के लिए यहां से वहां चक्कर लगाते देखे गए।
बालाजी रोड निवासी प्रितिन को नकद 15 हजार रुपये की जरूरत थी। इसके लिए कचहरी पर लगे एटीएम पर पहुंचे, यहां मशीन काम नहीं कर रही थी। इसके बाद वे कलक्ट्रेट के गेट के पास एटीएम पर पहुंचे, यहां तख्ती लगी मिली कि दोनों मशीन खराब हैं। बीकेडी के पास के एटीएम से रकम नहीं निकली, जबकि एसबीआई मुख्य शाखा के एटीएम का शटर ही बंद था। थक हारकर वे अपने घर लौट गए। इस तरह की परेशानी से शुक्रवार को महानगर में तमाम लोग जूझते नजर आए। इससे लोगों के जरूरी काम तक प्रभावित हो गए। अक्सर यही स्थिति बनी रहती है। बावजूद, बैंक प्रबंधन अपने ग्राहकों की सुविधा की ओर से नजर फेरे रहते हैं। बता दें कि महानगर में अलग-अलग बैंकों के 53 एटीएम हैं, लेकिन अक्सर इनमें से ज्यादातर साथ छोड़ जाते हैं।
जब चला नहीं सकते तो बैंकों को एटीएम लगाने भी नहीं चाहिए। कम से कम लोगों को उम्मीद तो नहीं रहेगी, जिससे परेशान भी नहीं होना पड़ेगा।
- अनिल वर्मा
चार एटीएम पर चक्कर लगा आए हैं, लेकिन कहीं भी पैसा नहीं मिला। कहीं मशीन खराब थी तो कोई एटीएम खाली था। उसमें करेंसी नहीं थी।
- दीपक कुमार
शहर का कोई भी एटीएम भरोसेमंद नहीं है। कभी भी कोई भी एटीएम बंद हो जाता है। ऐसे में नकदी के लिए यहां-वहां चक्कर काटने पड़ जाते हैं।
- कैलाश पिपरया
बैंक अपनी शाखाओं में लगे एटीएम भी नहीं चला पा रहे हैं, ऐसे में अन्य जगहों पर लगे एटीएम से उम्मीद ही क्या कर सकते हैं।
- हरी अग्रवाल
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बालाजी रोड निवासी प्रितिन को नकद 15 हजार रुपये की जरूरत थी। इसके लिए कचहरी पर लगे एटीएम पर पहुंचे, यहां मशीन काम नहीं कर रही थी। इसके बाद वे कलक्ट्रेट के गेट के पास एटीएम पर पहुंचे, यहां तख्ती लगी मिली कि दोनों मशीन खराब हैं। बीकेडी के पास के एटीएम से रकम नहीं निकली, जबकि एसबीआई मुख्य शाखा के एटीएम का शटर ही बंद था। थक हारकर वे अपने घर लौट गए। इस तरह की परेशानी से शुक्रवार को महानगर में तमाम लोग जूझते नजर आए। इससे लोगों के जरूरी काम तक प्रभावित हो गए। अक्सर यही स्थिति बनी रहती है। बावजूद, बैंक प्रबंधन अपने ग्राहकों की सुविधा की ओर से नजर फेरे रहते हैं। बता दें कि महानगर में अलग-अलग बैंकों के 53 एटीएम हैं, लेकिन अक्सर इनमें से ज्यादातर साथ छोड़ जाते हैं।
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जब चला नहीं सकते तो बैंकों को एटीएम लगाने भी नहीं चाहिए। कम से कम लोगों को उम्मीद तो नहीं रहेगी, जिससे परेशान भी नहीं होना पड़ेगा।
- अनिल वर्मा
चार एटीएम पर चक्कर लगा आए हैं, लेकिन कहीं भी पैसा नहीं मिला। कहीं मशीन खराब थी तो कोई एटीएम खाली था। उसमें करेंसी नहीं थी।
- दीपक कुमार
शहर का कोई भी एटीएम भरोसेमंद नहीं है। कभी भी कोई भी एटीएम बंद हो जाता है। ऐसे में नकदी के लिए यहां-वहां चक्कर काटने पड़ जाते हैं।
- कैलाश पिपरया
बैंक अपनी शाखाओं में लगे एटीएम भी नहीं चला पा रहे हैं, ऐसे में अन्य जगहों पर लगे एटीएम से उम्मीद ही क्या कर सकते हैं।
- हरी अग्रवाल