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Jhansi News: जिले की पांच प्राचीन इमारतें पुरातत्व विभाग संरक्षित करेगा
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ललितपुर। पुरातत्व विभाग जिले की प्राचीन इमारतों को संरक्षित करने की तैयारी में है। इस संबंध में पुरातत्व विभाग ने जिला प्रशासन से पांच इमारतों देवगढ़ का प्राचीन दुर्ग का परकोटा, मड़ावरा का किला, सिरसी की गढ़ी, बानपुर का किला और नवागढ के भित्त चित्र के स्वामित्व संबधी दस्तावेज मांगे हैं। राज्यपाल के अनुमोदन से यह सभी पांच पुरातत्व जगहों को स्वामित्तव में परिवर्तन किया जाएगा। अभी तक इनकी देखभाल करने को लिए उत्तरदायी संस्था नहीं है।
जनपद में इतिहास और संस्कृति की धरोहर बिखरी पड़ी है। जिसमें से कुछ प्राचीन धरोहरें देखरेख के अभाव में जर्जर और खस्ताहाल हो गई है। हाल में शासन ने बुंदेलखंड़ में पर्यटन की संभावनाओं और इनके विकास के लिए तमाम कार्ययोजना तैयार की। जिसमें जनपद के सात प्राचीन किलों का जीर्णोद्घार कर इन्हें पर्यटन के रूप में बनाने का निर्णय लिया गया। सात किलों के बाद अब जनपद के पांच प्राचीन इमारतों को सहेजकर संरक्षित करने का काम पुरातत्व विभाग ने शुरू कर दिया है। इसके लिए पुरातत्व विभाग ने जिला प्रशासन से इन पांचों इमारतों के स्वामित्व संबधी खसरा-खतौनी मांगी है। जिला प्रशासन द्वारा पुरातत्व विभाग को इन प्राचीन इमारतों के राजस्व अभिलेख उपलब्ध कराए जा रहे है। राजस्व अभिलेख मिलने के बाद पुरातत्व विभाग इसको लेकर एक अभिसूचना जारी होगी और आपत्तियों मांगी जाएंगी। इसके बाद इन पांच इमारतों के संरक्षण करने का प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। राज्यपाल इस प्रस्ताव को मंजूर करते हुए इन सभी इमारतों को पुरातत्व विभाग के संरक्षण में दे देगा। सबकुछ ठीक रहा तो जनपद की अन्य प्राचीन इमारतों, मंदिरों के बाद यह पांच इमारतें भी पुरातत्व विभाग के संरक्षण में पहुंच जाएंगी।
पुरातत्व विभाग ने जनपद की पांच प्राचीन इमारतों के राजस्व संबधी खसरा-खतौनी मांगी है जिसको उपलब्ध कराया जा रहा है। - आलोक सिंह, जिलाधिकारी
जिले की पांच प्राचीन स्मारकों को संरक्षित करने के लिए राजस्व अभिलेख मांगे गए हैं। अभिलेख मिलने के बाद अभिसूचना जारी की जाएगी और आपत्तियां दर्ज होगी। इसके बाद इस प्रस्ताव को अनुमोदन के लिए राज्यपाल को भेज दिया जाएगा। राज्यपाल इन इमारतों को पुरातत्व विभाग के संरक्षण में दे दिया जाएगा। - मनोज कुमार यादव, सहायक पुरातत्व अधिकारी, झांसी
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जनपद में इतिहास और संस्कृति की धरोहर बिखरी पड़ी है। जिसमें से कुछ प्राचीन धरोहरें देखरेख के अभाव में जर्जर और खस्ताहाल हो गई है। हाल में शासन ने बुंदेलखंड़ में पर्यटन की संभावनाओं और इनके विकास के लिए तमाम कार्ययोजना तैयार की। जिसमें जनपद के सात प्राचीन किलों का जीर्णोद्घार कर इन्हें पर्यटन के रूप में बनाने का निर्णय लिया गया। सात किलों के बाद अब जनपद के पांच प्राचीन इमारतों को सहेजकर संरक्षित करने का काम पुरातत्व विभाग ने शुरू कर दिया है। इसके लिए पुरातत्व विभाग ने जिला प्रशासन से इन पांचों इमारतों के स्वामित्व संबधी खसरा-खतौनी मांगी है। जिला प्रशासन द्वारा पुरातत्व विभाग को इन प्राचीन इमारतों के राजस्व अभिलेख उपलब्ध कराए जा रहे है। राजस्व अभिलेख मिलने के बाद पुरातत्व विभाग इसको लेकर एक अभिसूचना जारी होगी और आपत्तियों मांगी जाएंगी। इसके बाद इन पांच इमारतों के संरक्षण करने का प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। राज्यपाल इस प्रस्ताव को मंजूर करते हुए इन सभी इमारतों को पुरातत्व विभाग के संरक्षण में दे देगा। सबकुछ ठीक रहा तो जनपद की अन्य प्राचीन इमारतों, मंदिरों के बाद यह पांच इमारतें भी पुरातत्व विभाग के संरक्षण में पहुंच जाएंगी।
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पुरातत्व विभाग ने जनपद की पांच प्राचीन इमारतों के राजस्व संबधी खसरा-खतौनी मांगी है जिसको उपलब्ध कराया जा रहा है। - आलोक सिंह, जिलाधिकारी
जिले की पांच प्राचीन स्मारकों को संरक्षित करने के लिए राजस्व अभिलेख मांगे गए हैं। अभिलेख मिलने के बाद अभिसूचना जारी की जाएगी और आपत्तियां दर्ज होगी। इसके बाद इस प्रस्ताव को अनुमोदन के लिए राज्यपाल को भेज दिया जाएगा। राज्यपाल इन इमारतों को पुरातत्व विभाग के संरक्षण में दे दिया जाएगा। - मनोज कुमार यादव, सहायक पुरातत्व अधिकारी, झांसी
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