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एक अप्रैल 2014 से लागू माना जाएगा बढ़ा हुआ हाउसटैक्स, देना होगा अतिभार
amarujala
Updated Sat, 08 Jul 2017 12:44 AM IST
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अगर आप नियमित अपना हाउसटैक्स जमा कर रहे हैं तो बेफिक्र न रहें। आप अभी भी नगर निगम के बकायेदार हैं। जी हां, नगर निगम ने गृहकर सर्वे का काम पूरा कर लिया है। बढ़ा हुआ टैक्स एक अप्रैल 2014 से लागू होगा, जिसका अतिभार आपकी जेब पर पड़ने वाला है। बीस जुलाई से नए बिल जारी होंगी, जिस पर फिलहाल आपत्तियां मांगी जाएंगी।
मान लीजिए अभी आपका गृहकर सौ रुपये प्रतिवर्ष है, जिसे आप नियमित जमा कर रहे हैं। नए सर्वे में इसे अगर 150 रुपये कर दिया गया तो 2014 से अब तक तीन साल का पचास रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से आपको नए बिल में अतिरिक्त जमा करना होगा। इससे पहले 2002-03 में गृहकर बढ़ा था, तब नगर निगम की सीमा के अंतर्गत 68 हजार मकान थे, लेकिन तब से लेकर अब तक 14 साल का समय गुजर गया। इस दौरान शहर में मकानों की संख्या बहुत अधिक बढ़ गई है। गत वर्षों में कराए गए जीआईएस (सेटेलाइट) सर्वे में एक लाख दस हजार मकान और प्लाट चिह्नित किए गए थे। लेकिन, सर्वे के बाद प्लाटों पर भी मकान बन गए। गृहकर सर्वे में एक लाख पंद्रह हजार मकान चिह्नित किए गए। अब इनके डॉटा की फीडिंग का काम चल रहा है। फीडिंग के लिए 15 जुलाई तिथि तय की गई है। माना जा रहा है कि इससे एक-दो दिन आगे तक काम खिसक सकता है। फीडिंग के बाद 20 जुलाई से मकानों के हाउस टैक्स के नए बिल जारी किए जाएंगे। इन बिलों पर आपत्तियां मांगी जाएंगी, यदि किसी गृहस्वामी का हाउस टैक्स मानक के अनुसार ज्यादा लगा है अथवा कम लगा है, तो इसकी जांच कर उसे सही किया जाएगा।
मकान और दुकान अलग-अलग
पूर्व में जो हाउस टैक्स लगाया गया था, उसमें मकानों से हाउस टैक्स लिया जा रहा था। लेकिन, नए कर के मुताबिक मकानों और उसमें बनी दुकानों का टैक्स अलग-अलग लगाया गया है। इसलिए जिन गृहस्वामियों के मकानों में दुकानें हैं और दुकानों को किराए पर दिए हुए हैं, उनको ज्यादा हाउस टैक्स देना पड़ेगा।
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ये हैं गुणांक दरें
- वाणिज्यिक कांपलेक्स, दुकानें व अन्य प्रतिष्ठान जैसे बैंक कार्यालय, तीन स्टार तक होटल, कोचिंग सेंटर और प्रशिक्षण संस्थान का हाउस टैक्स निर्धारित दर का पांच गुना लिया जाएगा।
- सभी प्रकार के क्लीनिक, डायग्नोस्टिक केंद्र, प्रयोगशालाएं, नर्सिंग होम, चिकित्सालय, मेडिकल स्टोर और स्वास्थ्य परिचर्या केंद्र का हाउस टैक्स निर्धारित दर का तीन गुना लिया जाएगा।
- जिम, थियेटर और सिनेमाघर का हाउस टैक्स निर्धारित दर का दो गुना लिया जाएगा।
- छात्रावास व शैक्षणिक संस्थान का हाउस टैक्स निर्धारित दर का के समान लिया जाएगा।
- पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी व गोदाम का हाउस टैक्स निर्धारित दर का तीन गुना लिया जाएगा।
- मॉल, बार का हाउस टैक्स निर्धारित दर का छह गुना लिया जाएगा।
- औद्योगिक इकाइयां, सरकारी, अर्द्ध सरकारी और सार्वजनिक उपक्रम कार्यालय का हाउस टैक्स निर्धारित दर का तीन गुना लिया जाएगा।
- मोबाइल टावर, होर्डिंग वाले मकान, टीवी टावर, कोई अन्य टावर जो भवन की सतह या शिखर पर लगाए गए हैं अथवा खुले स्थान पर लगें हैं, उनका हाउस टैक्स निर्धारित दर का चार गुना लिया जाएगा।
स्वकर में ऐसे तय होता है टैक्स
स्वकर में गृहस्वामी स्वयं तय कर सकते हैं कि उनके मकान का टैक्स कितना लगेगा। इसमें कारपेट (निर्मित) एरिया नापा जाता है। इसमें कमरा व बरामदा की पूरी नाप की जाती है। बालकनी, कारीडोर, रसोई और स्टोर की नाप का 50 प्रतिशत और गैराज की नाप का चौथाई लिया जाता है, जबकि स्नानगृह, शौचालय, पोर्टिको और जीना (सीढ़ियां) के क्षेत्रफल को कारपेट एरिया में नहीं जोड़ा जाता है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि कुल निर्मित भवन के 80 प्रतिशत भाग पर हाउस टैक्स लिया जाता है। कारपेट एरिया में संबधित इलाके में नगर निगम द्वारा निर्धारित प्रतिमाह टैक्स का गुणा करने के बाद उसमें 12 का गुणा कर एक वर्ष का टैक्स निकाला जाता है। इस टैक्स का 10 प्रतिशत हाउस टैक्स जमा करना पड़ता है।
लग रही लाखों रुपये की चपत
धारा 177 के अनुसार जब किसी भवन में निर्माण अथवा पुनर्निर्माण के दौरान कुल क्षेत्रफल में 25 प्रतिशत या अधिक की वृद्धि की जाती है तो निर्माण के समाप्त होने की तिथि के 60 दिन के अंदर गृहस्वामी को नगर निगम में जानकारी देना अनिवार्य है। यदि गृहस्वामी निर्माण की जानकारी नहीं देता है तो विभाग की तरफ से नियमित अंतराल पर सर्वे करने का प्रावधान है। लेकिन, यहां न तो गृहस्वामी इस अतिरिक्त निर्माण कार्य की जानकारी दे रहें हैं और न ही विभागीय सर्वे समय पर हो रहा है। इसका असर राजस्व पर पड़ रहा है, जिससे नगर निगम को लाखों रुपये की चपत लग रही है। क्योंकि ऐसा कोई दिन बकाया नहीं जाता, जब शहर के किसी मकान में निर्माण न हो रहा हो।
आपत्ति के लिए तीस दिन
गृहकर बिल में यदि कोई आपत्ति है तो 30 दिन के अंदर दर्ज कराई जा सकती है। जिन मकान स्वामियों द्वारा मकान का क्षेत्रफल सही भरकर नहीं दिया, उन्हीं भवनों का क्षेत्रफल ठीक से भरने के बाद बिल भेजे जा रहे हैं। टैक्स की दरों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई है।
सदन से लगी है रोक
गृहकर पर सदन से रोक लगी है। इसलिए, यदि गृहकर के नाम पर कुछ किया जाता है तो इसे सदन कर अवहेलना माना जाएगा। इसकी शिकायत शासन से करेंगे।
- किरन वर्मा
महापौर
बिल जारी होंगे, आपत्तियां लेंगे
हाउस टैक्स से छूटे मकानों को जोड़ने के लिए और कानों के क्षेत्रफल का सर्वे पूरा कर लिया गया है। अब कंप्यूटर में फीडिंग हो रही है। इसके बाद बिल जारी होंगे और आपत्तियां मांगी जाएंगी।
- प्रताप सिंह भदौरिया
नगर आयुक्त
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अगर आप नियमित अपना हाउसटैक्स जमा कर रहे हैं तो बेफिक्र न रहें। आप अभी भी नगर निगम के बकायेदार हैं। जी हां, नगर निगम ने गृहकर सर्वे का काम पूरा कर लिया है। बढ़ा हुआ टैक्स एक अप्रैल 2014 से लागू होगा, जिसका अतिभार आपकी जेब पर पड़ने वाला है। बीस जुलाई से नए बिल जारी होंगी, जिस पर फिलहाल आपत्तियां मांगी जाएंगी।
मान लीजिए अभी आपका गृहकर सौ रुपये प्रतिवर्ष है, जिसे आप नियमित जमा कर रहे हैं। नए सर्वे में इसे अगर 150 रुपये कर दिया गया तो 2014 से अब तक तीन साल का पचास रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से आपको नए बिल में अतिरिक्त जमा करना होगा। इससे पहले 2002-03 में गृहकर बढ़ा था, तब नगर निगम की सीमा के अंतर्गत 68 हजार मकान थे, लेकिन तब से लेकर अब तक 14 साल का समय गुजर गया। इस दौरान शहर में मकानों की संख्या बहुत अधिक बढ़ गई है। गत वर्षों में कराए गए जीआईएस (सेटेलाइट) सर्वे में एक लाख दस हजार मकान और प्लाट चिह्नित किए गए थे। लेकिन, सर्वे के बाद प्लाटों पर भी मकान बन गए। गृहकर सर्वे में एक लाख पंद्रह हजार मकान चिह्नित किए गए। अब इनके डॉटा की फीडिंग का काम चल रहा है। फीडिंग के लिए 15 जुलाई तिथि तय की गई है। माना जा रहा है कि इससे एक-दो दिन आगे तक काम खिसक सकता है। फीडिंग के बाद 20 जुलाई से मकानों के हाउस टैक्स के नए बिल जारी किए जाएंगे। इन बिलों पर आपत्तियां मांगी जाएंगी, यदि किसी गृहस्वामी का हाउस टैक्स मानक के अनुसार ज्यादा लगा है अथवा कम लगा है, तो इसकी जांच कर उसे सही किया जाएगा।
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मकान और दुकान अलग-अलग
पूर्व में जो हाउस टैक्स लगाया गया था, उसमें मकानों से हाउस टैक्स लिया जा रहा था। लेकिन, नए कर के मुताबिक मकानों और उसमें बनी दुकानों का टैक्स अलग-अलग लगाया गया है। इसलिए जिन गृहस्वामियों के मकानों में दुकानें हैं और दुकानों को किराए पर दिए हुए हैं, उनको ज्यादा हाउस टैक्स देना पड़ेगा।
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ये हैं गुणांक दरें
- वाणिज्यिक कांपलेक्स, दुकानें व अन्य प्रतिष्ठान जैसे बैंक कार्यालय, तीन स्टार तक होटल, कोचिंग सेंटर और प्रशिक्षण संस्थान का हाउस टैक्स निर्धारित दर का पांच गुना लिया जाएगा।
- सभी प्रकार के क्लीनिक, डायग्नोस्टिक केंद्र, प्रयोगशालाएं, नर्सिंग होम, चिकित्सालय, मेडिकल स्टोर और स्वास्थ्य परिचर्या केंद्र का हाउस टैक्स निर्धारित दर का तीन गुना लिया जाएगा।
- जिम, थियेटर और सिनेमाघर का हाउस टैक्स निर्धारित दर का दो गुना लिया जाएगा।
- छात्रावास व शैक्षणिक संस्थान का हाउस टैक्स निर्धारित दर का के समान लिया जाएगा।
- पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी व गोदाम का हाउस टैक्स निर्धारित दर का तीन गुना लिया जाएगा।
- मॉल, बार का हाउस टैक्स निर्धारित दर का छह गुना लिया जाएगा।
- औद्योगिक इकाइयां, सरकारी, अर्द्ध सरकारी और सार्वजनिक उपक्रम कार्यालय का हाउस टैक्स निर्धारित दर का तीन गुना लिया जाएगा।
- मोबाइल टावर, होर्डिंग वाले मकान, टीवी टावर, कोई अन्य टावर जो भवन की सतह या शिखर पर लगाए गए हैं अथवा खुले स्थान पर लगें हैं, उनका हाउस टैक्स निर्धारित दर का चार गुना लिया जाएगा।
स्वकर में ऐसे तय होता है टैक्स
स्वकर में गृहस्वामी स्वयं तय कर सकते हैं कि उनके मकान का टैक्स कितना लगेगा। इसमें कारपेट (निर्मित) एरिया नापा जाता है। इसमें कमरा व बरामदा की पूरी नाप की जाती है। बालकनी, कारीडोर, रसोई और स्टोर की नाप का 50 प्रतिशत और गैराज की नाप का चौथाई लिया जाता है, जबकि स्नानगृह, शौचालय, पोर्टिको और जीना (सीढ़ियां) के क्षेत्रफल को कारपेट एरिया में नहीं जोड़ा जाता है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि कुल निर्मित भवन के 80 प्रतिशत भाग पर हाउस टैक्स लिया जाता है। कारपेट एरिया में संबधित इलाके में नगर निगम द्वारा निर्धारित प्रतिमाह टैक्स का गुणा करने के बाद उसमें 12 का गुणा कर एक वर्ष का टैक्स निकाला जाता है। इस टैक्स का 10 प्रतिशत हाउस टैक्स जमा करना पड़ता है।
लग रही लाखों रुपये की चपत
धारा 177 के अनुसार जब किसी भवन में निर्माण अथवा पुनर्निर्माण के दौरान कुल क्षेत्रफल में 25 प्रतिशत या अधिक की वृद्धि की जाती है तो निर्माण के समाप्त होने की तिथि के 60 दिन के अंदर गृहस्वामी को नगर निगम में जानकारी देना अनिवार्य है। यदि गृहस्वामी निर्माण की जानकारी नहीं देता है तो विभाग की तरफ से नियमित अंतराल पर सर्वे करने का प्रावधान है। लेकिन, यहां न तो गृहस्वामी इस अतिरिक्त निर्माण कार्य की जानकारी दे रहें हैं और न ही विभागीय सर्वे समय पर हो रहा है। इसका असर राजस्व पर पड़ रहा है, जिससे नगर निगम को लाखों रुपये की चपत लग रही है। क्योंकि ऐसा कोई दिन बकाया नहीं जाता, जब शहर के किसी मकान में निर्माण न हो रहा हो।
आपत्ति के लिए तीस दिन
गृहकर बिल में यदि कोई आपत्ति है तो 30 दिन के अंदर दर्ज कराई जा सकती है। जिन मकान स्वामियों द्वारा मकान का क्षेत्रफल सही भरकर नहीं दिया, उन्हीं भवनों का क्षेत्रफल ठीक से भरने के बाद बिल भेजे जा रहे हैं। टैक्स की दरों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई है।
सदन से लगी है रोक
गृहकर पर सदन से रोक लगी है। इसलिए, यदि गृहकर के नाम पर कुछ किया जाता है तो इसे सदन कर अवहेलना माना जाएगा। इसकी शिकायत शासन से करेंगे।
- किरन वर्मा
महापौर
बिल जारी होंगे, आपत्तियां लेंगे
हाउस टैक्स से छूटे मकानों को जोड़ने के लिए और कानों के क्षेत्रफल का सर्वे पूरा कर लिया गया है। अब कंप्यूटर में फीडिंग हो रही है। इसके बाद बिल जारी होंगे और आपत्तियां मांगी जाएंगी।
- प्रताप सिंह भदौरिया
नगर आयुक्त