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अमर उजाला संवाद : अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों को जरूर याद रखें महिलाएं
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। परिवार और समाज को दिशा देने में महिलाओं की अहम भूमिका होती है। महिला सशक्तीकरण के लिए उनका आत्मनिर्भर होना बेहद जरूरी है। इसके अलावा उन्हें उनके अधिकारों की जानकारी भी होनी चाहिए। साथ ही वे अपने कर्तव्यों को भी जरूर याद रखें। यह बात अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद में महिला अधिवक्ताओं ने कही।
महिला वकीलों ने कहा कि बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सभी तरह से प्रयास होने चाहिए। उन्हें बेहतर शिक्षा देनी चाहिए, ताकि वह स्वावलंबी बन सकें। संपत्ति में अधिकार का कानून तो है, लेकिन यह उन्हें आसानी से हासिल नहीं हो पाता है। महिलाओं के लिए कानून बनाने के साथ-साथ उन्हें धरातल पर उतारने की व्यवस्था भी की जानी चाहिए। साथ ही महिलाओं के लिए त्वरित न्याय की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा महिला अधिवक्ताओं ने आधी आबादी से जुड़े अन्य मुद्दे भी उठाए।
महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों में न्यायिक प्रक्रिया लंबी न हो। व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें उन्हें त्वरित न्याय मिल सके। - अमृता गुप्ता
बेटी को शादी में दहेज देने की जगह उसके नाम फिक्स डिपॉजिट कर देनी चाहिए, ताकि परेशानी की स्थिति में उन्हें किसी के सामने हाथ न फैलाने पड़ें। - शुभलता अग्रवाल
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तलाक के मामलों में सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को उठानी पड़ती है। इस प्रक्रिया की जटिलताओं को दूर कर इसे आसान बनाना चाहिए। - प्रीति पटेल
महिलाओं को अधिकार तो बहुत दिए गए हैं, लेकिन यह उन्हें आसानी से नहीं मिल पाते हैं। महिलाओं के अधिकार उनके लिए सुलभ बनाने चाहिए। - हर्षना उदय
महिलाएं अपने अधिकारों का दुरुपयोग न करें, उन्हें इस बात का ख्याल रखना चाहिए। साथ ही दुरुपयोग को रोकने के लिए कानून में भी कड़े प्रावधान किए जाने चाहिए। - रजनी जैन
महिलाओं को मिले अधिकारों के दुरुपयोग की वजह से कई महिलाएं न्याय से वंचित रह जाती हैं। हर वास्तविक पीड़ित को न्याय मिले, इसकी व्यवस्था की जानी चाहिए। - निर्मला चौरसिया
समाज में तलाक जैसे शब्द तेजी से आम होते जा रहे हैं, यह सामाजिक विकृति को दर्शाता है। महिलाओं को अपने अधिकार और कर्तव्यों के बीच संतुलन बैठाना चाहिए। - राशि साहू
तलाक के मामलों में अक्सर महिलाओं के मायके वाले भी साथ नहीं देते, वे अकेली पड़ जाती हैं। न्यायिक प्रक्रिया में महिलाओं का संबल बढ़ाने का प्रावधान किया जाना चाहिए। - जयंती सिंह
महिलाओं के लिए कानून बनाना ही काफी नहीं है, उनका पालन कराना बेहद जरूरी है। आमतौर पर महिलाएं उनके प्रति होने वाले अपराध की आसानी से रिपोर्ट तक दर्ज नहीं करा पाती हैं। - अनुष्का भारद्वाज
आईपीसी की जगह बीएनएस लागू तो कर दिया गया है, लेकिन अदालतों में लंबित मामलों की संख्या बहुत है। इससे त्वरित न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती है। - नीलम चौधरी
कचहरी में महिला वकीलों को मिलें सुविधाएं
संवाद में आईं महिला अधिवक्ताओं ने कहा कि कचहरी परिसर में महिला वकीलों के लिए अलग से कोई सुविधाएं नहीं हैं। उनके लिए अलग कक्ष होना चाहिए, ताकि वादकारी महिलाएं अपनी बात खुलकर उनके समक्ष रख सकें। इसके अलावा वॉशरूम की भी बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए। महिलाओं को वकालत के पेशे में आने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
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झांसी। परिवार और समाज को दिशा देने में महिलाओं की अहम भूमिका होती है। महिला सशक्तीकरण के लिए उनका आत्मनिर्भर होना बेहद जरूरी है। इसके अलावा उन्हें उनके अधिकारों की जानकारी भी होनी चाहिए। साथ ही वे अपने कर्तव्यों को भी जरूर याद रखें। यह बात अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद में महिला अधिवक्ताओं ने कही।
महिला वकीलों ने कहा कि बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सभी तरह से प्रयास होने चाहिए। उन्हें बेहतर शिक्षा देनी चाहिए, ताकि वह स्वावलंबी बन सकें। संपत्ति में अधिकार का कानून तो है, लेकिन यह उन्हें आसानी से हासिल नहीं हो पाता है। महिलाओं के लिए कानून बनाने के साथ-साथ उन्हें धरातल पर उतारने की व्यवस्था भी की जानी चाहिए। साथ ही महिलाओं के लिए त्वरित न्याय की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा महिला अधिवक्ताओं ने आधी आबादी से जुड़े अन्य मुद्दे भी उठाए।
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महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों में न्यायिक प्रक्रिया लंबी न हो। व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें उन्हें त्वरित न्याय मिल सके। - अमृता गुप्ता
बेटी को शादी में दहेज देने की जगह उसके नाम फिक्स डिपॉजिट कर देनी चाहिए, ताकि परेशानी की स्थिति में उन्हें किसी के सामने हाथ न फैलाने पड़ें। - शुभलता अग्रवाल
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तलाक के मामलों में सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को उठानी पड़ती है। इस प्रक्रिया की जटिलताओं को दूर कर इसे आसान बनाना चाहिए। - प्रीति पटेल
महिलाओं को अधिकार तो बहुत दिए गए हैं, लेकिन यह उन्हें आसानी से नहीं मिल पाते हैं। महिलाओं के अधिकार उनके लिए सुलभ बनाने चाहिए। - हर्षना उदय
महिलाएं अपने अधिकारों का दुरुपयोग न करें, उन्हें इस बात का ख्याल रखना चाहिए। साथ ही दुरुपयोग को रोकने के लिए कानून में भी कड़े प्रावधान किए जाने चाहिए। - रजनी जैन
महिलाओं को मिले अधिकारों के दुरुपयोग की वजह से कई महिलाएं न्याय से वंचित रह जाती हैं। हर वास्तविक पीड़ित को न्याय मिले, इसकी व्यवस्था की जानी चाहिए। - निर्मला चौरसिया
समाज में तलाक जैसे शब्द तेजी से आम होते जा रहे हैं, यह सामाजिक विकृति को दर्शाता है। महिलाओं को अपने अधिकार और कर्तव्यों के बीच संतुलन बैठाना चाहिए। - राशि साहू
तलाक के मामलों में अक्सर महिलाओं के मायके वाले भी साथ नहीं देते, वे अकेली पड़ जाती हैं। न्यायिक प्रक्रिया में महिलाओं का संबल बढ़ाने का प्रावधान किया जाना चाहिए। - जयंती सिंह
महिलाओं के लिए कानून बनाना ही काफी नहीं है, उनका पालन कराना बेहद जरूरी है। आमतौर पर महिलाएं उनके प्रति होने वाले अपराध की आसानी से रिपोर्ट तक दर्ज नहीं करा पाती हैं। - अनुष्का भारद्वाज
आईपीसी की जगह बीएनएस लागू तो कर दिया गया है, लेकिन अदालतों में लंबित मामलों की संख्या बहुत है। इससे त्वरित न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती है। - नीलम चौधरी
कचहरी में महिला वकीलों को मिलें सुविधाएं
संवाद में आईं महिला अधिवक्ताओं ने कहा कि कचहरी परिसर में महिला वकीलों के लिए अलग से कोई सुविधाएं नहीं हैं। उनके लिए अलग कक्ष होना चाहिए, ताकि वादकारी महिलाएं अपनी बात खुलकर उनके समक्ष रख सकें। इसके अलावा वॉशरूम की भी बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए। महिलाओं को वकालत के पेशे में आने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।