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अब चुप नहीं रहेंगी बेटियां, करेंगी पलटवार
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Tue, 08 Dec 2015 12:26 AM IST
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झांसी। अमर उजाला के ‘बेटी ही बचाएगी’ अभियान के तहत दतिया गेट बाहर स्थित सरस्वती बालिका विद्या मंदिर इंटर कालेज में चल रहे दस दिवसीय ‘एडवांस कराटे ट्रेनिंग कैंप’ का सोमवार को समापन हुआ। इस अवसर पर बालिकाओं ने कैंप में सीखीं आत्मरक्षा की विभिन्न विधाओं का शानदार प्रदर्शन किया।
समापन समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि उप शिक्षा निदेशक नीना उदैनिया ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि लड़कियों को स्वयं अपने हक की लड़ाई लड़नी होगी। इसके लिए मन को मजबूत करना होगा। यह तभी होगा जब बालिकाएं आत्मरक्षा के लिए किसी दूसरे पर निर्भर नहीं होंगी। कराटे की ट्रेनिंग बालिकाओं में आत्मविश्वास का संचार करेगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विद्यालय की प्रधानाचार्य कल्पना सिंह ने कहा कि कराटे का प्रशिक्षण बालिकाओं के लिए जीवन पर्यंत उपयोगी रहेगा। इससे उनका आत्मबल तो बढ़ेगा ही, साथ ही एकाग्रता में भी वृद्धि होगी। बालिकाएं आत्म रक्षा की इस कला को केवल अपने तक ही सीमित न रखें, बल्कि अन्य बालिकाओं को भी इसका प्रशिक्षण दें। इस दौरान जाने माने कराटे एक्सपर्ट मेवालाल राजपूत (चौथा दान ब्लैक बेल्ट) व उनकी टीम की एक्सपर्ट पिंकी रायकवार, शाहीन परवीन, सोनिया व पिंकी गौतम के निर्देशन में बालिकाओं ने पैन, दुपट्टा व किताब जैसी चीजों से आत्मरक्षा के हुनर का प्रदर्शन किया।
कैंप को सफल बनाने में विद्यालय की प्रबंधिका रमा चतुर्वेदी, उप प्रबंधक डा. रवि कनकने, संगीताचार्य कमलेश सोनी, राजीव, आलोक आदि का विशेष सहयोग रहा।
रास्ता बदलने को मजबूर होंगे लड़के
झांसी। विद्यालय की छात्रा चंचल पाठक ने कहा कि आमतौर पर सामने से आती लड़कों की टोली को देखकर लड़कियां अपना रास्ता बदल लेती हैं। लेकिन, कराटे प्रशिक्षण के बाद आत्मविश्वास से परिपूर्ण लड़कियां अपना रास्ता नहीं बदलेंगी, बल्कि लड़कों को रास्ता बदलने को मजबूर करेंगी।
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मानसिक शक्ति में भी हुई वृद्धि
झांसी। विद्यालय की छात्रा स्प्रहा तिवारी ने कहा कि कराटे आज के युग की जरूरत है। इसे हर लड़की को सीखना चाहिए। इससे शारीरिक के साथ-साथ मानसिक शक्ति में भी बढ़ोत्तरी हुई है, इसके बलबूते हर समस्या का हल स्वयं खोजा जा सकता है।
अब हाथ बन गए हैं हथियार
झांसी। विद्यालय की छात्रा आफरीन बानो ने कहा कि कराटे के प्रशिक्षण से अब उनके हाथ हथियार बन गए हैं। वह सोच भी नहीं सकती थीं कि पेन, दुपट्टा, किताब आदि जैसी चीजों के जरिये अपना बचाव भी किया जा सकता है। लेकिन, अब यह संभव है।
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समापन समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि उप शिक्षा निदेशक नीना उदैनिया ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि लड़कियों को स्वयं अपने हक की लड़ाई लड़नी होगी। इसके लिए मन को मजबूत करना होगा। यह तभी होगा जब बालिकाएं आत्मरक्षा के लिए किसी दूसरे पर निर्भर नहीं होंगी। कराटे की ट्रेनिंग बालिकाओं में आत्मविश्वास का संचार करेगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विद्यालय की प्रधानाचार्य कल्पना सिंह ने कहा कि कराटे का प्रशिक्षण बालिकाओं के लिए जीवन पर्यंत उपयोगी रहेगा। इससे उनका आत्मबल तो बढ़ेगा ही, साथ ही एकाग्रता में भी वृद्धि होगी। बालिकाएं आत्म रक्षा की इस कला को केवल अपने तक ही सीमित न रखें, बल्कि अन्य बालिकाओं को भी इसका प्रशिक्षण दें। इस दौरान जाने माने कराटे एक्सपर्ट मेवालाल राजपूत (चौथा दान ब्लैक बेल्ट) व उनकी टीम की एक्सपर्ट पिंकी रायकवार, शाहीन परवीन, सोनिया व पिंकी गौतम के निर्देशन में बालिकाओं ने पैन, दुपट्टा व किताब जैसी चीजों से आत्मरक्षा के हुनर का प्रदर्शन किया।
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कैंप को सफल बनाने में विद्यालय की प्रबंधिका रमा चतुर्वेदी, उप प्रबंधक डा. रवि कनकने, संगीताचार्य कमलेश सोनी, राजीव, आलोक आदि का विशेष सहयोग रहा।
रास्ता बदलने को मजबूर होंगे लड़के
झांसी। विद्यालय की छात्रा चंचल पाठक ने कहा कि आमतौर पर सामने से आती लड़कों की टोली को देखकर लड़कियां अपना रास्ता बदल लेती हैं। लेकिन, कराटे प्रशिक्षण के बाद आत्मविश्वास से परिपूर्ण लड़कियां अपना रास्ता नहीं बदलेंगी, बल्कि लड़कों को रास्ता बदलने को मजबूर करेंगी।
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मानसिक शक्ति में भी हुई वृद्धि
झांसी। विद्यालय की छात्रा स्प्रहा तिवारी ने कहा कि कराटे आज के युग की जरूरत है। इसे हर लड़की को सीखना चाहिए। इससे शारीरिक के साथ-साथ मानसिक शक्ति में भी बढ़ोत्तरी हुई है, इसके बलबूते हर समस्या का हल स्वयं खोजा जा सकता है।
अब हाथ बन गए हैं हथियार
झांसी। विद्यालय की छात्रा आफरीन बानो ने कहा कि कराटे के प्रशिक्षण से अब उनके हाथ हथियार बन गए हैं। वह सोच भी नहीं सकती थीं कि पेन, दुपट्टा, किताब आदि जैसी चीजों के जरिये अपना बचाव भी किया जा सकता है। लेकिन, अब यह संभव है।