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बच्चों के साथ अब अभिभावकों की भी बदली दिनचर्या
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झांसी। कोरोना काल में स्कूल बंद थे। बच्चे ऑनलाइन पढ़ रहे थे। इससे अभिभावकों की भी दिनचर्या कुछ बदल गई थी। सुबह जागकर बच्चों का लंच बॉक्स पैक करना, बच्चों को जगाना, उनको तैयार करना, फिर स्कूल छोड़ने जाना आदि आदतें लगभग छूट ही गईं थी। एक बार फिर से पूर्ण क्षमता के साथ विद्यालय प्रारंभ होने से अभिभावकों के रुटीन में भी बदलाव आ गया है।
दो वर्ष पहले फैली कोरोना महामारी से लगभग तीन माह तक कुछ जरूरी विभागों के अलावा पूरा देश ही बंद रहा था। दो साल तक बच्चों ने सिर्फ ऑनलाइन ही पढ़ाई की। बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई ने परिवारजनों की भी आदतें बदल गईं थीं। क्योंकि बच्चे स्कूल जा नहीं रहे थे लिहाजा मम्मी-पापा को सुबह उठने में कोई जल्दबाजी नहीं रहती थी। क्योंकि अब 14 फरवरी को आए शासनादेश के बाद से ज्यादातर बच्चों ने स्कूल जाना प्रारंभ कर दिया है। इसे बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों की भी आदतों में बदलाव आया है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के स्कूल जाने से उन्हें भी अपना रूटीन बदलना पड़ा है।
बच्चों के सुबह स्कूल जाने से हमें भी सुबह से दौड़भाग करनी पड़ जाती है, अभी तक काम आराम से कर लेते थे। - शालिनी सक्सेना
दो सालों से देर से सोने की आदत हो गई थी लेकिन अब बच्चों से पहले जागना और सबसे मुश्किल उनको जगाना पड़ता है। - कविता जैन
रोजमर्रा के कामों में तो कुछ ज्यादा सुधार नहीं आया है लेकिन सुबह के जो काम अभी तक आराम से होता था, उसे जल्दी करना पड़ रहा।- प्रभा साहू
स्कूल बंद थे तो बच्चों को सुबह स्कूल छोड़ने जाने की भी टेंशन नहीं थी, लेकिन अब उनको स्कूल भेजने के लिए सुबह जल्दी जाग रहे हैं। - मुकेश जैन
बच्चों के स्कूल जाने के बाद हम भी थोड़ी देर राहत की सांस लेते हैं, ऑनलाइन क्लास में तो काम के साथ-साथ बच्चों पर भी नजर रखनी पड़ती थी। - ब्यूटी
बच्चों के स्कूल जाने से हम भी अब उनके साथ-साथ सोने-जागने का समय तय लिए हैं, वरना हमें सोता देखकर उनको भी आलस आता है। - संजय सक्सेना
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दो वर्ष पहले फैली कोरोना महामारी से लगभग तीन माह तक कुछ जरूरी विभागों के अलावा पूरा देश ही बंद रहा था। दो साल तक बच्चों ने सिर्फ ऑनलाइन ही पढ़ाई की। बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई ने परिवारजनों की भी आदतें बदल गईं थीं। क्योंकि बच्चे स्कूल जा नहीं रहे थे लिहाजा मम्मी-पापा को सुबह उठने में कोई जल्दबाजी नहीं रहती थी। क्योंकि अब 14 फरवरी को आए शासनादेश के बाद से ज्यादातर बच्चों ने स्कूल जाना प्रारंभ कर दिया है। इसे बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों की भी आदतों में बदलाव आया है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के स्कूल जाने से उन्हें भी अपना रूटीन बदलना पड़ा है।
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बच्चों के सुबह स्कूल जाने से हमें भी सुबह से दौड़भाग करनी पड़ जाती है, अभी तक काम आराम से कर लेते थे। - शालिनी सक्सेना
दो सालों से देर से सोने की आदत हो गई थी लेकिन अब बच्चों से पहले जागना और सबसे मुश्किल उनको जगाना पड़ता है। - कविता जैन
रोजमर्रा के कामों में तो कुछ ज्यादा सुधार नहीं आया है लेकिन सुबह के जो काम अभी तक आराम से होता था, उसे जल्दी करना पड़ रहा।- प्रभा साहू
स्कूल बंद थे तो बच्चों को सुबह स्कूल छोड़ने जाने की भी टेंशन नहीं थी, लेकिन अब उनको स्कूल भेजने के लिए सुबह जल्दी जाग रहे हैं। - मुकेश जैन
बच्चों के स्कूल जाने के बाद हम भी थोड़ी देर राहत की सांस लेते हैं, ऑनलाइन क्लास में तो काम के साथ-साथ बच्चों पर भी नजर रखनी पड़ती थी। - ब्यूटी
बच्चों के स्कूल जाने से हम भी अब उनके साथ-साथ सोने-जागने का समय तय लिए हैं, वरना हमें सोता देखकर उनको भी आलस आता है। - संजय सक्सेना