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अल्लाह, रोजों की रहमत से इबादत कबूल फरमाएं
Sat, 18 May 2019 01:24 AM IST
देवेंद्र कुमार
jhansi
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Sat, 18 May 2019 01:24 AM IST
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ramzan
- फोटो : amarujala
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झांसी। रमजानुल मुबारक के दूसरे अशरे के जुमे को मस्जिदों में रोजेदारों की भीड़ उमड़ पड़ी। नमाज के बाद इमामों ने अल्लाह के सामने हाथ फैलाकर दुआ की। अल्लाह से रोजों की रहमत से इबादत कबूल फरमाने, बीमारों को शिफा अता फरमाने, बेरोजगार को रोजगार से लगाने, सभी की मगफिरत फरमाने की दुआ मांगी गई।
माहे रमजान में इबादतों का बड़ा महत्व होता है। इस पवित्र महीने सवाब का दर्जा सत्तर गुना अधिक होने से हर कोई इबादत करने में वक्त निकालता है। घरों व मस्जिदों में लोग अल्लाह की तिलावत करते हैं। रमजान के महीने को तीन अशरों में बांटा गया है। पहला शनिवार को पहला अशरा खत्म होने के बाद शुक्रवार को दूसरे अशरे का पहला जुमा होने से मस्जिदों में नमाजियों की काफी भीड़ देखी गई है। दूसरा अशरा मगफिरत का अशरा होता है इस अशरे में रोजेदार रोजा रखकर अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते है व अपने लिए मगफिरत के लिए दुआ करते हैं। मुफ्ती साबिर कासमी ने बताया कि माहे रमजान का हर दिन और रात में इबादतों का बड़ा ही महत्व होता है। इस अशरे में तौबा करने पर हर रोजेदार व गैर रोजेदारों की मगफिरत होती है। उन्होंने बताया कि दुआ में निकले हर एक आंसू से अल्लाह जहन्नुम की आग को बुझा देते हैं। अल्लाह को दुआ मांगना काफी पसंद है, हर बंदे को अल्लाह से दुआ मांगना चाहिए। दुआ नहीं मांगने वाले से अल्लाह नाराज होते हैं। इस अशरे में अल्लाह से माफी मांगते रहना चाहिए, जिससे की हर बंदे की मगफिरत हो सके।
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माहे रमजान में इबादतों का बड़ा महत्व होता है। इस पवित्र महीने सवाब का दर्जा सत्तर गुना अधिक होने से हर कोई इबादत करने में वक्त निकालता है। घरों व मस्जिदों में लोग अल्लाह की तिलावत करते हैं। रमजान के महीने को तीन अशरों में बांटा गया है। पहला शनिवार को पहला अशरा खत्म होने के बाद शुक्रवार को दूसरे अशरे का पहला जुमा होने से मस्जिदों में नमाजियों की काफी भीड़ देखी गई है। दूसरा अशरा मगफिरत का अशरा होता है इस अशरे में रोजेदार रोजा रखकर अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते है व अपने लिए मगफिरत के लिए दुआ करते हैं। मुफ्ती साबिर कासमी ने बताया कि माहे रमजान का हर दिन और रात में इबादतों का बड़ा ही महत्व होता है। इस अशरे में तौबा करने पर हर रोजेदार व गैर रोजेदारों की मगफिरत होती है। उन्होंने बताया कि दुआ में निकले हर एक आंसू से अल्लाह जहन्नुम की आग को बुझा देते हैं। अल्लाह को दुआ मांगना काफी पसंद है, हर बंदे को अल्लाह से दुआ मांगना चाहिए। दुआ नहीं मांगने वाले से अल्लाह नाराज होते हैं। इस अशरे में अल्लाह से माफी मांगते रहना चाहिए, जिससे की हर बंदे की मगफिरत हो सके।
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