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यूक्रेन में फंसे छात्रों की मदद में जुटे हुए हैं अक्षेंद्र
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झांसी। यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे नई बस्ती निवासी अक्षेंद्र बादल बुधवार को अपने घर वापस लौट आए। लेकिन, अब वे यहां रह यूक्रेन में फंसे अन्य छात्रों की मदद में जुटे हुए हैं। ‘सपोर्ट यूक्रेन स्टूडेंट्स’ व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है, जिसके जरिये वे छात्रों को हर संभव मदद पहुंचा रहे हैं।
अक्षेंद्र बादल का बुधवार को हंगरी के रास्ते भारत आना हुआ है। हंगरी पहुंचने में उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था। यहां तक कि घंटों पानी तक नहीं मिल पाया था। वहां फंसे अन्य छात्रों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए अक्षेंद्र ने ‘सपोर्ट यूक्रेन स्टूडेंट्स’ के नाम से व्हाट्एसएप ग्रुप बनाया है। इसमें यूक्रेन में फंसे हुए पंद्रह मेडिकल यूनिवर्सिटी के छात्रों को उन्होंने जोड़ रखा है। ग्रुप के जरिये छात्रों को जानकारी दी जा रही है कि किस तरह से वे सुरक्षित ढंग से यूक्रेन से निकलें। छात्रों को सुरक्षित रास्ते बताए जा रहे हैं। इसके अलावा वापसी की अन्य प्रक्रियाओं की भी जानकारी दी जा रही है।
अक्षेंद्र ने बताया कि वे पिछले पांच सालों से यूक्रेन में हैं। इससे उन्हें वहां की अच्छी समझ हो गई है। इसके अलावा जब वे वहां फंसे हुए थे, तब उनकी मदद को भी कई सारे लोग आगे आए थे। यहां तक कि हंगरी के एक दोस्त ने उन्हें अपनी सिम तक दे दी थी। ऐसे में दूसरे छात्रों की मदद करना उनका फर्ज बनता है।
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अक्षेंद्र बादल का बुधवार को हंगरी के रास्ते भारत आना हुआ है। हंगरी पहुंचने में उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था। यहां तक कि घंटों पानी तक नहीं मिल पाया था। वहां फंसे अन्य छात्रों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए अक्षेंद्र ने ‘सपोर्ट यूक्रेन स्टूडेंट्स’ के नाम से व्हाट्एसएप ग्रुप बनाया है। इसमें यूक्रेन में फंसे हुए पंद्रह मेडिकल यूनिवर्सिटी के छात्रों को उन्होंने जोड़ रखा है। ग्रुप के जरिये छात्रों को जानकारी दी जा रही है कि किस तरह से वे सुरक्षित ढंग से यूक्रेन से निकलें। छात्रों को सुरक्षित रास्ते बताए जा रहे हैं। इसके अलावा वापसी की अन्य प्रक्रियाओं की भी जानकारी दी जा रही है।
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अक्षेंद्र ने बताया कि वे पिछले पांच सालों से यूक्रेन में हैं। इससे उन्हें वहां की अच्छी समझ हो गई है। इसके अलावा जब वे वहां फंसे हुए थे, तब उनकी मदद को भी कई सारे लोग आगे आए थे। यहां तक कि हंगरी के एक दोस्त ने उन्हें अपनी सिम तक दे दी थी। ऐसे में दूसरे छात्रों की मदद करना उनका फर्ज बनता है।
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