फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   agresion against hydrabad gang rape

न कोई सुनवाई, न कोई तारीख, सिर्फ मौत की सजा का हो एलान

Wed, 04 Dec 2019 01:48 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 04 Dec 2019 01:48 AM IST
विज्ञापन
agresion against hydrabad gang rape
हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की पुण्यतिथि के अवसर मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में अमर उजाला एवं खेल व
झांसी। हैदराबाद में महिला चिकित्सक की सामूहिक दुष्कर्म के बाद हुई जघन्य हत्या के बाद से एक बार फिर महिला सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस मसले पर मंगलवार को अमर उजाला के नारी गरिमा के साझा संकल्प ‘अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल्स’ के तहत संवाद का आयोजन किया गया, जिसमें आए महानगर के बुद्धिजीवियों ने एक स्वर में दरिंदों को तत्काल मौत की सजा देने की मांग की।
विज्ञापन

अमर उजाला के ग्वालियर रोड औद्योगिक क्षेत्र स्थित कार्यालय में आयोजित संवाद में शामिल हुए लोगों ने कहा कि घटना सबके सामने है, घटना को अंजाम देने वाले भी। ऐसे में न तो कोई सुनवाई होनी चाहिए और न तारीख पर तारीख होनी चाहिए, सिर्फ सजा का एलान होना चाहिए। इसके अलावा ज्यादातर लोगों ने कहा कि नैतिक शिक्षा के अभाव की वजह से इस तरह की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है। इसका पाठ घर से लेकर उच्च शिक्षा तक बच्चों को पढ़ाया जाना चाहिए। बेटियों को सेल्फ डिफेंस का प्रशिक्षण भी पाठ्यक्रम का हिस्सा होनी चाहिए। इससे वे आत्मरक्षा तो कर ही सकेंगी, साथ ही आत्मविश्वास में भी बढ़ोत्तरी होगी। बच्चों पर नजर रखना जरूरी है। उनकी आजादी के नाम पर उनकी गलतियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, फिर चाहे वो लड़का हो या लड़की।
विज्ञापन

न्याय में हुई देरी से लगता है कि न्याय मिला ही नहीं। न्याय का त्वरित होना जरूरी है। खासतौर पर हैदराबाद जैसी हैवानियत के मामलों में स्पेशल सेल बनाकर मुकदमे को तत्काल अंजाम तक पहुंचाया जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

- विवेक स्वामी, अधिवक्ता
आत्मरक्षा का प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का हिस्सा होना चाहिए। इससे बेटियों का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। इसके अलावा बेटियों की मदद के लिए मोबाइल एप भी होना चाहिए, जिससे तत्काल उन्हें पुलिस सहायता मिल सके।
- अमित माहौर, संरक्षक - बुंदेलखंड विवाह स्थल एसोसिएशन
बच्चों को अच्छे संस्कार दिए जाने चाहिए। उनके साथ सकारात्मक बातें करें। नकारात्मकता उन पर हावी न होने दें। हैदराबाद जैसी हैवानियत की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सबसे पहले हमें समाज का दृष्टिकोण बदलना होगा।
- नेहा तिवारी, डाक विभाग कर्मचारी
सिस्टम की गड़बड़ी की वजह से इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं। दोषियों को कंपा देने वाली सजा देनी चाहिए। नाबालिग अपराधी को भी उसके अपराध की बराबर सजा दी चाहिए। छूट किसी को नहीं दी जानी चाहिए।
- अंजू सिंह, उपाध्यक्ष - जेसीआई गूंज
हैदराबाद के हैवानों ने एकदम से इतनी बड़ी घटना को अंजाम नहीं दिया होगा। पहले उन्होंने छोटी-छोटी वारदातें भी की होंगी, जिन्हें नजरअंदाज किया होगा। इससे वे आगे बढ़ते गए। इसमें समाज, पुलिस सभी की गलती है।
- अनु मिश्रा, चेयरपर्सन - महात्मा हंसराज मॉडर्न पब्लिक स्कूल
शिक्षा अपना उद्देश्य हासिल नहीं कर पाई। हैदराबाद जैसी घटना को देखकर तो ये कहा ही जा सकता है। हमने कैसे समाज का निर्माण किया है, ये आज सोचना होगा। समाज की सोच में बदलाव की जरूरत है।
- शिराज खान, एसोसिएट प्रोफेसर - राजकीय महिला महाविद्यालय
हैदराबाद के गुनहगारों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर सजा दी जाए। सजा भी ऐसी हो, जिससे अन्य अपराधियों में खौफ पैदा हो। न्यायिक प्रक्रिया में देरी अपराधियों को सही सजा देने में बाधक बनती है।
- डॉ. कल्पना दुबे, शिक्षिका
टीवी और सोशल मीडिया पर आज क्या परोसा जा रहा है, क्या कभी इसका मूल्यांकन किया जाता है। सेंसर बोर्ड क्या कर रहा है, ये समझ से परे है। अपने साथ होने वाले अन्याय का जवाब बेटियों को खुद देना सीखना होगा।
- दीपाली रायकवार, प्रदेश अध्यक्ष - रायकवार, निषाद सभा
मोमबत्ती की जगह अब दोषियों को जलाने का वक्त आ गया है। तब ही हैदराबाद जैसी हैवानियत की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी। सख्त कानून बनाया जाए। हैवानों को उनके गुनाह के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
- रुचि गोस्वामी, शिक्षिका
लड़कियां यदि छेड़खानी का जवाब तुरंत देना सीख जाएं, तो हैदराबाद जैसी हैवानियत को अंजाम देने से पहले अपराधियों को सोचना होगा। छोटी-मोटी घटनाओं पर बेटियों की चुप्पी, बड़ी घटना का कारक बनती है।
- डॉ. ममता दासानी, शिक्षिका
वकील जब ऐसे अपराधियों का मुकदमा नहीं लड़ेंगे, तो उन्हें जल्द और सही सजा अपने आप ही मिल जाएगी। साथ ही, अब वक्त इंटरनेट की समीक्षा करने का भी है। नेट पर गंदी सामग्री किसी दशा में नहीं होनी चाहिए।

- राजकुमार डेंगरे, कारोबारी
जिस तरह पर्यावरण विज्ञान को पाठयक्रम में शामिल किया गया है, उसी प्रकार सेल्फ डिफेंस और नैतिक शिक्षा को भी शामिल करना होगा। पूरी संजीदगी के साथ बालक और बालिकाओं को इसका ज्ञान देना होगा।
- डॉ. शारदा सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर - आर्य कन्या डिग्री कॉलेज
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed