फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   ab daka nhi dal payange narsing home

अब ‘डाका’ नहीं डाल पाएंगे नर्सिंगहोम

Mon, 07 May 2018 12:19 AM IST
amarujala
amarujala Updated Mon, 07 May 2018 12:19 AM IST
विज्ञापन
ab daka nhi dal payange narsing home
medition, jhansi news - फोटो : demo
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में अब नर्सिंगहोम ‘डाका’ नहीं डाल पाएंगे। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद कॉलेज प्रशासन ने इमरजेंसी में होने वाली एबीजी जांच कराने के लिए व्यवस्था बदल दी है। किसी भी मरीज की एबीजी जांच कराने के पहले उसका फॉर्म भरा जाएगा। इसके अलावा ओपीडी पर्चा या एमआरडी (मेडिकल रिकॉर्ड) नंबर दर्ज करने को अनिवार्य कर दिया गया है। इससे निजी अस्पताल अपने यहां भर्ती मरीजों की जांच नहीं करा सकेंगे।
विज्ञापन


कुछ प्राइवेट अस्पताल अपने यहां भर्ती मरीजों की एबीजी जांच मेडिकल कॉलेज में करा रहे हैं। यह जांच मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में सिर्फ 150 रुपये में होती है, जबकि निजी अस्पताल मरीजों से 900 से लेकर 1200 रुपये तक वसूलते हैं। एक बार जांच कराने पर नर्सिंगहोम को सीधे 750 से 1050 रुपये की बचत होती है। मेडिकल कॉलेज में एबीजी जांच के लिए कोई नियम-कानून नहीं बना है। कॉलेज में भर्ती जिस मरीज की ये जांच होनी होती है, उसके तीमारदार को ब्लड सैंपल लेकर इमरजेंसी भेज दिया जाता है। वहां न तो मरीज के बाबत पूछताछ की जाती है, न ही ओपीडी पर्चा अथवा फाइल नंबर नोट होता है। इसी का फायदा उठाकर प्राइवेट अस्पताल का स्टाफ भी अपने यहां भर्ती मरीजों की एबीजी जांच करा ले जाता है।
विज्ञापन


‘अमर उजाला’ ने रविवार के अपने अंक में ‘सरकार के बजट पर नर्सिंगहोमों का ‘डाका’’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर निजी अस्पतालों के खेल को उजागर किया, तब जाकर कॉलेज प्रशासन की नींद टूटी। अब मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने एबीजी जांच के लिए नियम बना दिए हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हरीशचंद्र आर्या ने बताया कि इमरजेंसी में एबीजी जांच कराने पर मरीज का ओपीडी पर्चा या एमआरडी नंबर नोट किया जाएगा। ब्लड बैंक में होने वाली जांच के दौरान भरा जाने वाला पर्चा एबीजी जांच के दौरान भी भरकर लाना होगा। इसमें मरीज का नाम, उम्र, पिता/पति का नाम, कंसलटेंट का नाम, भर्ती स्थान आदि का उल्लेख होगा। यह सब जानकारी एबीजी जांच से पूर्व रजिस्टर में दर्ज होगी। इससे निजी अस्पताल अपने यहां के मरीजों की एबीजी जांच मेडिकल कॉलेज में नहीं करा पाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये होती एबीजी
एबीजी (आर्टियल ब्लड गैस एनालिसिस) जांच डायबिटीज, हृदय, पीलिया सहित अन्य गंभीर रोगों में की जाती है। इससे ब्लड में यूरिया, सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम सहित अन्य तत्वों की शरीर में मौजूदगी का आंकलन किया जाता है। उसी आधार पर मरीज का उपचार व दवाएं दी जाती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed