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प्रतिदिन लगभग दस महिलाओं की हो रही मौत

Tue, 16 Apr 2019 01:25 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 16 Apr 2019 01:25 AM IST
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प्रतिदिन लगभग दस महिलाओं की हो रही मौत

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प्रतिदिन दस महिलाओं की हो रही मौत

झांसी। प्रसव के दौरान गर्भवती महिला के शरीर से अत्यधिक खून बह जाना, हाई ब्लडप्रेशर, संक्रमण, झटके आना और खून की कमी हो जाना मातृ मृत्यु का अहम कारण हो सकता है। असुरक्षित गर्भपात मातृ मृत्यु के कारणों में सबसे प्रमुख कारण है, जिससे हर दिन लगभग 10 महिलाएं अपनी जान गवां देती हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार झांसी में विभिन्न कारणों से वर्ष 2017-18 में लगभग 1513 गर्भपात कराए गए। जबकि, वर्ष 2018-19 में फरवरी तक 1423 गर्भपात हुए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डबल्यूएचओ) के अनुसार विकासशील देशों में हर दिन करीब 830 महिलाएं गर्भावस्था या शिशु जन्म से संबंधित कारणों से काल के गाल में समा जातीं हैं। इसमें ग्रामीण स्तर की गरीब महिलाएं सबसे ज्यादा मातृ मृत्यु का शिकार होतीं हैं। असुरक्षित गर्भपात से जहां विकसित देशों में एक लाख पर 30 महिलाओं की जान जाती है। वहीं, विकासशील देशों में 220 महिलाओं की जान चली जाती है। करीब 70 लाख महिलाएं हर साल असुरक्षित गर्भपात के कारण अस्पतालों में भर्ती होती हैं। जबकि, भारत में हर साल में डेढ़ करोड़ से अधिक गर्भपात होते हैं।
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अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन के जैन ने बताया कि भारत में गर्भपात कराना कानूनी रूप से मान्य है। चिकित्सीय विधि से गर्भावस्था समाप्ति का कानून 1971 में ही बन गया था। इस एक्ट के अंतर्गत कुछ खास प्रकार की गर्भावस्था (गर्भवती महिला को जीवन का खतरा, गर्भवती महिलाओं के अतिरिक्त स्वास्थ्य को गंभीर क्षति, गर्भवती महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर क्षति, इस बात का पर्याप्त जोखिम की यदि बच्चा हुआ तो वह शारीरिक व मानसिक रूप से पीड़ित विकलांग हो, गर्भ निरोधक की असफलता आदि) को पंजीकृत चिकित्सक द्वारा समाप्त करने की अनुमति है। यदि, गर्भावस्था को पंजीकृत चिकित्सक के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा समाप्त किया जाता है तो यह भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
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जिला महिला अस्पताल की प्रसूति विशेषज्ञ डॉ. वसुधा अग्रवाल बताती हैं कि जो लोग दवाई खाकर गर्भपात करने की कोशिश करते हैं उससे महिलाओं को जान का खतरा रहता है। इसी के साथ जो लिंग जांच के बाद गर्भपात कराते हैं वह एक तो कानूनी रूप से अपराध है और इससे महिला की जान जाने का खतरा भी रहता है।
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