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विदेशी पर्यटकों के लिए ज्यादा सुगम नहीं गतिमान एक्सप्रेस-City
Updated Tue, 25 Sep 2018 01:57 AM IST
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विदेशी पर्यटकों के लिए गतिमान एक्सप्रेस बनी ज्यादा सुगम
शताब्दी एक्सप्रेस के ठहराव स्टेशन बढ़ने से महत्ता हो रही खत्म
- डिनर के वक्त पर पहुंच जाते हैं आगरा
- वृद्ध पर्यटकों को आने में नहीं होती दिक्कत
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। आगरा से शताब्दी एक्सप्रेस से आने के बाद झांसी होकर खजुराहो जाने वाले विदेशी पर्यटकों (टूर) का ट्रैफिक अब गतिमान एक्सप्रेस से सफर करना ज्यादा पसंद करने लगा है। इस ट्रेन से वह वक्त पर आगरा पहुंच जाते हैं, जिससे वह होटल समय पर होटल पहुंचकर डिनर (रात्रि भोजन) कर लेते हैं। दूसरा, आगरा से सुबह जल्दी नहीं चलना पड़ता, जिससे वृद्ध पर्यटकों को परेशानी नहीं होती। बस से भी नहीं आना पड़ता।
भारतीय रेल में जब वीआईपी शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ था, उसमें एक ट्रेन (गाड़ी संख्या 12001/12002) दिल्ली से झांसी के मध्य भी चलाई गई थी। उस समय यह ट्रेन दिल्ली के बाद मथुरा, आगरा व ग्वालियर में ही रुकती थी। बाद में इसका विस्तार भोपाल स्टेशन तक कर दिया गया। मगर, जबसे इस ट्रेन को हबीबगंज तक किया गया है, तब से इसकी महत्ता कम होती जा रही है। इसका मुख्य कारण ट्रेन का समय पालन बिगड़ना है। चूंकि, इस ट्रेन में अधिकांश विदेशी, वीआईपी या धनाढ्य लोग ही यात्रा करते हैं। समय पालन बिगड़ने से टूरिस्ट एजेंसियां अब इस ट्रेन से विदेशी पर्यटकों को आगरा से झांसी लाना कम करती जा रही है। वह शताब्दी एक्सप्रेस की जगह गतिमान एक्सप्रेस को ज्यादा आरामदायक मान रहे हैं। इससे गतिमान एक्सप्रेस में विदेशी पर्यटकों के आने की संख्या बढ़ती जा रही हैं।
दरअसल, शताब्दी एक्सप्रेस से आगरा जाने वाले पर्यटक रात सवा नौ बजे के बाद ही पहुंच पाते हैं। होटल पहुंचने तक दस और डिनर लेने तक ग्यारह बज जाते हैं। जबकि, वह गतिमान एक्सप्रेस में झांसी से दोपहर 3.05 बजे सवार होकर आगरा शाम 5.50 बजे आगरा पहुंच जाते हैं। वहीं, आगरा से आने में भी शताब्दी एक्सप्रेस सुबह 8.15 बजे चलती है, इससे वृद्ध पर्यटक सुबह उठने में परेशान होते हैं। जबकि, गतिमान एक्सप्रेस का समय सुबह 9.55 बजे है।
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प्लेटफार्म एक पर लायी जाए शताब्दी एक्सप्रेस
टूरिस्ट एजेंट एंथोनी ने बताया कि यह सही है कि गतिमान एक्सप्रेस से अधिक टूर आने जाने लगे हैं। मगर, अभी भी शताब्दी एक्सप्रेस से कई टूर आगरा भेजे जा रहे हैं। अगर, शताब्दी एक्सप्रेस को प्लेटफार्म एक पर लाना शुरू कर दिया जाए तो पर्यटक झांसी का किला देखकर भी वापस लौट सकते हैं। क्योंकि, शताब्दी एक्सप्रेस के प्लेटफार्म चार या पांच से जाने पर लगेज बुक करने और पर्यटकों के उक्त प्लेटफार्म तक पहुंचने में एक से दो घंटे का वक्त लग जाता है।
50 हजार से अधिक आते हैं विदेशी पर्यटक
हर साल आगरा से झांसी होकर ओरछा और खजुराहो जाने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या 50 हजार से अधिक होती है। यह अधिकांश टूर ट्रेन और कुछ बस से आते हैं। मालूम हो कि, विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो, ओरछा के दर्शनीय स्थलों को देखने के लिए पंद्रह जुलाई से पंद्रह सितंबर तक स्पेनिश व इटेलियन ग्रुप भारत आते हैं। इसी तरह अक्तूबर से फरवरी तक अमेरिकन, ब्रिटिश, चाइना, जापान, कोरिया के ग्रुप आते हैं। अधिकतर विदेशी सैलानी निर्धारित कार्यक्रम के हिसाब से शताब्दी एक्सप्रेस से आगरा से झांसी आते हैं और एक दिन खजुराहो में गुजारने के बाद वापस शताब्दी एक्सप्रेस से लौट जाते हैं। कुछ यात्री एक दिन ओरछा व एक दिन खजुराहो में बिताने के बाद लौटते हैं। टूर आपरेटरों ने झांसी का किला व संग्रहालय को चार्ट में शामिल कर रखा है, मगर सुविधाओं के अभाव में यहां पर्यटक नहीं ठहरते हैं।
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शताब्दी एक्सप्रेस के ठहराव स्टेशन बढ़ने से महत्ता हो रही खत्म
- डिनर के वक्त पर पहुंच जाते हैं आगरा
- वृद्ध पर्यटकों को आने में नहीं होती दिक्कत
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। आगरा से शताब्दी एक्सप्रेस से आने के बाद झांसी होकर खजुराहो जाने वाले विदेशी पर्यटकों (टूर) का ट्रैफिक अब गतिमान एक्सप्रेस से सफर करना ज्यादा पसंद करने लगा है। इस ट्रेन से वह वक्त पर आगरा पहुंच जाते हैं, जिससे वह होटल समय पर होटल पहुंचकर डिनर (रात्रि भोजन) कर लेते हैं। दूसरा, आगरा से सुबह जल्दी नहीं चलना पड़ता, जिससे वृद्ध पर्यटकों को परेशानी नहीं होती। बस से भी नहीं आना पड़ता।
भारतीय रेल में जब वीआईपी शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ था, उसमें एक ट्रेन (गाड़ी संख्या 12001/12002) दिल्ली से झांसी के मध्य भी चलाई गई थी। उस समय यह ट्रेन दिल्ली के बाद मथुरा, आगरा व ग्वालियर में ही रुकती थी। बाद में इसका विस्तार भोपाल स्टेशन तक कर दिया गया। मगर, जबसे इस ट्रेन को हबीबगंज तक किया गया है, तब से इसकी महत्ता कम होती जा रही है। इसका मुख्य कारण ट्रेन का समय पालन बिगड़ना है। चूंकि, इस ट्रेन में अधिकांश विदेशी, वीआईपी या धनाढ्य लोग ही यात्रा करते हैं। समय पालन बिगड़ने से टूरिस्ट एजेंसियां अब इस ट्रेन से विदेशी पर्यटकों को आगरा से झांसी लाना कम करती जा रही है। वह शताब्दी एक्सप्रेस की जगह गतिमान एक्सप्रेस को ज्यादा आरामदायक मान रहे हैं। इससे गतिमान एक्सप्रेस में विदेशी पर्यटकों के आने की संख्या बढ़ती जा रही हैं।
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दरअसल, शताब्दी एक्सप्रेस से आगरा जाने वाले पर्यटक रात सवा नौ बजे के बाद ही पहुंच पाते हैं। होटल पहुंचने तक दस और डिनर लेने तक ग्यारह बज जाते हैं। जबकि, वह गतिमान एक्सप्रेस में झांसी से दोपहर 3.05 बजे सवार होकर आगरा शाम 5.50 बजे आगरा पहुंच जाते हैं। वहीं, आगरा से आने में भी शताब्दी एक्सप्रेस सुबह 8.15 बजे चलती है, इससे वृद्ध पर्यटक सुबह उठने में परेशान होते हैं। जबकि, गतिमान एक्सप्रेस का समय सुबह 9.55 बजे है।
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प्लेटफार्म एक पर लायी जाए शताब्दी एक्सप्रेस
टूरिस्ट एजेंट एंथोनी ने बताया कि यह सही है कि गतिमान एक्सप्रेस से अधिक टूर आने जाने लगे हैं। मगर, अभी भी शताब्दी एक्सप्रेस से कई टूर आगरा भेजे जा रहे हैं। अगर, शताब्दी एक्सप्रेस को प्लेटफार्म एक पर लाना शुरू कर दिया जाए तो पर्यटक झांसी का किला देखकर भी वापस लौट सकते हैं। क्योंकि, शताब्दी एक्सप्रेस के प्लेटफार्म चार या पांच से जाने पर लगेज बुक करने और पर्यटकों के उक्त प्लेटफार्म तक पहुंचने में एक से दो घंटे का वक्त लग जाता है।
50 हजार से अधिक आते हैं विदेशी पर्यटक
हर साल आगरा से झांसी होकर ओरछा और खजुराहो जाने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या 50 हजार से अधिक होती है। यह अधिकांश टूर ट्रेन और कुछ बस से आते हैं। मालूम हो कि, विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो, ओरछा के दर्शनीय स्थलों को देखने के लिए पंद्रह जुलाई से पंद्रह सितंबर तक स्पेनिश व इटेलियन ग्रुप भारत आते हैं। इसी तरह अक्तूबर से फरवरी तक अमेरिकन, ब्रिटिश, चाइना, जापान, कोरिया के ग्रुप आते हैं। अधिकतर विदेशी सैलानी निर्धारित कार्यक्रम के हिसाब से शताब्दी एक्सप्रेस से आगरा से झांसी आते हैं और एक दिन खजुराहो में गुजारने के बाद वापस शताब्दी एक्सप्रेस से लौट जाते हैं। कुछ यात्री एक दिन ओरछा व एक दिन खजुराहो में बिताने के बाद लौटते हैं। टूर आपरेटरों ने झांसी का किला व संग्रहालय को चार्ट में शामिल कर रखा है, मगर सुविधाओं के अभाव में यहां पर्यटक नहीं ठहरते हैं।