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यूथ: बेरोजगारों को रोजगार की राह दिखा रहे अनूप -City
Updated Sat, 18 Aug 2018 02:12 AM IST
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बेरोजगारों को रोजगार की राह दिखा रहे अनूप
झांसी। रेलवे के सहायक लोको पायलट अनूप अग्रवाल वैसे तो एक साधारण से रेल कर्मचारी हैं। लेकिन, उनका एक जुनून उन्हें सबसे अलग खड़ा करता है। जी हां, अनूप पिछले आठ सालों से युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की नि:शुल्क कोचिंग देते आ रहे हैं। उनके पढ़ाए हुए लगभग सत्तर युवा अब तक नौकरी हासिल कर चुके हैं। अनूप का यह सफर लगातार जारी है।
नरसिंह राव टौरिया निवासी अनूप शुरुआत से ही सरकारी सेवा में जाना चाहते थे। स्कूल की पढ़ाई खत्म होने के बाद उन्होंने इसकी तैयारी शुरू कर दी थी। साल 2006 में उनका चयन पुलिस में हुआ था। लेकिन, इसके बाद भी उनकी पढ़ाई जारी रही। 2010 में उनका चयन रेलवे में सहायक लोको पायलट के पद पर हो गया। हालांकि, इस दरम्यान उनका चयन अन्य विभागों में भी हुआ, परंतु उन्होंने रेलवे को ही प्राथमिकता दी।
अपने को व्यवस्थित करने के बाद अनूप ने दूसरों का जीवन संवारने का बीड़ा उठाया। शुरुआत में उन्होंने अपने मुहल्ले के बेरोजगार युवाओं को नि:शुल्क कोचिंग देना शुरू किया। परिणाम सकारात्मक आए। वर्तमान में अनूप लगभग चालीस युवाओं को नि:शुल्क कोचिंग दे रहे हैं। अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद मिलने वाले वक्त का ज्यादातर हिस्सा वे पढ़ाने में खर्च करते हैं। खासतौर पर वे उन परिवारों के युवाओं को पढ़ाते हैं, जिनके घर में कोई सरकारी सेवा में नहीं है।
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अनूप ने बताया कि किसी को क्रिकेट खेलने का शौक होता है, तो किसी को टीवी देखने का। इसी तरह पढ़ाना उनका शौक है। जब किसी का किसी नौकरी में चयन होता है, तो वो अपने माता-पिता को बाद में उन्हें पहले इसकी सूचना देने आता है। ये असीम आनंद का क्षण होता है। इस काम में उन्हें परिवार का भी भरपूर सहयोग मिलता है।
मिलती है सजा भी
यहां एकदम घर जैसे माहौल में पढ़ाई होती है। अनूप जी को सभी भैया कहते हैं। वे अच्छी पढ़ाई करने पर उपहार में पेन, किताब जैसी भेंट देते हैं, तो पढ़ाई में ढील पकड़े जाने पर मुर्गा बनाने जैसी सजा भी देते हैं। सभी पर उनका बराबर ध्यान रहता है।
- विवेक सिंह राजपूत, विद्यार्थी
महादान कर रहे
आज के दौर में शिक्षा बड़ा व्यवसाय बन गई है। लेकिन, अनूप भैया जैसे लोग शिक्षा का दान कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में दो साल तैयारी की और बैंक में चयन हो गया। उन्होंने कोई फीस नहीं ली। अब मैं भी कोशिश करूंगा की उनकी तरह और लोगों को पढ़ाऊं।
- हर्ष कुमार शर्मा, ग्रामीण बैंक में कार्यरत
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झांसी। रेलवे के सहायक लोको पायलट अनूप अग्रवाल वैसे तो एक साधारण से रेल कर्मचारी हैं। लेकिन, उनका एक जुनून उन्हें सबसे अलग खड़ा करता है। जी हां, अनूप पिछले आठ सालों से युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की नि:शुल्क कोचिंग देते आ रहे हैं। उनके पढ़ाए हुए लगभग सत्तर युवा अब तक नौकरी हासिल कर चुके हैं। अनूप का यह सफर लगातार जारी है।
नरसिंह राव टौरिया निवासी अनूप शुरुआत से ही सरकारी सेवा में जाना चाहते थे। स्कूल की पढ़ाई खत्म होने के बाद उन्होंने इसकी तैयारी शुरू कर दी थी। साल 2006 में उनका चयन पुलिस में हुआ था। लेकिन, इसके बाद भी उनकी पढ़ाई जारी रही। 2010 में उनका चयन रेलवे में सहायक लोको पायलट के पद पर हो गया। हालांकि, इस दरम्यान उनका चयन अन्य विभागों में भी हुआ, परंतु उन्होंने रेलवे को ही प्राथमिकता दी।
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अपने को व्यवस्थित करने के बाद अनूप ने दूसरों का जीवन संवारने का बीड़ा उठाया। शुरुआत में उन्होंने अपने मुहल्ले के बेरोजगार युवाओं को नि:शुल्क कोचिंग देना शुरू किया। परिणाम सकारात्मक आए। वर्तमान में अनूप लगभग चालीस युवाओं को नि:शुल्क कोचिंग दे रहे हैं। अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद मिलने वाले वक्त का ज्यादातर हिस्सा वे पढ़ाने में खर्च करते हैं। खासतौर पर वे उन परिवारों के युवाओं को पढ़ाते हैं, जिनके घर में कोई सरकारी सेवा में नहीं है।
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अनूप ने बताया कि किसी को क्रिकेट खेलने का शौक होता है, तो किसी को टीवी देखने का। इसी तरह पढ़ाना उनका शौक है। जब किसी का किसी नौकरी में चयन होता है, तो वो अपने माता-पिता को बाद में उन्हें पहले इसकी सूचना देने आता है। ये असीम आनंद का क्षण होता है। इस काम में उन्हें परिवार का भी भरपूर सहयोग मिलता है।
मिलती है सजा भी
यहां एकदम घर जैसे माहौल में पढ़ाई होती है। अनूप जी को सभी भैया कहते हैं। वे अच्छी पढ़ाई करने पर उपहार में पेन, किताब जैसी भेंट देते हैं, तो पढ़ाई में ढील पकड़े जाने पर मुर्गा बनाने जैसी सजा भी देते हैं। सभी पर उनका बराबर ध्यान रहता है।
- विवेक सिंह राजपूत, विद्यार्थी
महादान कर रहे
आज के दौर में शिक्षा बड़ा व्यवसाय बन गई है। लेकिन, अनूप भैया जैसे लोग शिक्षा का दान कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में दो साल तैयारी की और बैंक में चयन हो गया। उन्होंने कोई फीस नहीं ली। अब मैं भी कोशिश करूंगा की उनकी तरह और लोगों को पढ़ाऊं।
- हर्ष कुमार शर्मा, ग्रामीण बैंक में कार्यरत