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160 देशों में अशांति और जातीय हिंसा-City

Thu, 09 Nov 2017 07:22 PM IST
Updated Thu, 09 Nov 2017 07:22 PM IST
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160 देशों में अशांति और जातीय हिंसा-City
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अशांति और जातीय हिंसा से जूझ रहे हैं 160 देश
- बीयू में आयोजित कार्यक्रम में बोले कुलपति प्रो. आरपी यादव
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरपी यादव ने कहा कि दुनिया के 194 राष्ट्रों में 160 ऐसे हैं, जिनमें किसी न किसी प्रकार की जातीय हिंसा और अशांति के मामले दिखाई दे रहे हैं। भारत सबसे ज्यादा युवा शक्ति वाले देश के रूप में उभर रहा है और तमाम विघटनकारी शक्तियां विध्वंसक कामों को अंजाम देने के प्रयास में हैं। ऐसे में देश के नीति नियंताओं के सामने अधिकतम लोगों को क्रियाशील, सक्रिय शक्ति के रूप में बदलने की चुनौती है। वह बीयू में एनसीसी द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ती जनसंख्या का बोझ सामाजिक समरसता को दबाव मेें ला रहा है। सबको मिलकर सोचना होगा कि युवा शक्ति का अधिकतम उपयोग कैसे किया जाए। बीयू कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि उत्तरी कोरिया के सनकी तानाशाह की वजह से आज दुनिया के सिर पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। ज्ञान की शक्ति दुनिया में सबसे बड़ी है। अमेरिका और रूस के बीत लंबे समय तक चले शीत युद्ध का जिक्र करते हुए बोले कि दुनिया के विचारकों और समीक्षकों की चेतावनियों का ही असर रहा कि इन दोनों ने कभी परमाणु शक्ति का प्रयोग नहीं किया। इस दौरान एनसीसी अधिकारी प्रो. सुनील काबिया, डॉ. रश्मि सिंह, डॉ. विनीत कुमार, डॉ. सीपी पैन्यूली, सतीश साहनी, उमेश शुक्ला मौजूद रहे।
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