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77.35 लाख के घोटाले की फाइल अफसरों ने दबाई
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झांसी। सिंचाई विभाग में बिना काम कराए तत्कालीन एक्सईएन द्वारा 77.35 लाख का भुगतान कर देने के मामले में शासन के आदेश के बावजूद आरोपियों के खिलाफ अब तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। अफसरों की रणनीति समय बिताकर पूरे मामले को ठंडा करने की है। उधर, लाखों रुपये हड़प चुकी एजेंसियां (फर्म) भी अफसरों की मदद से बचने की राह तलाशने में जुटी हैं।
बेतवा प्रखंड के तत्कालीन एक्सईएन संजय कुमार ने पिछले सीजन में नहरों की सफाई, मरम्मत कार्य के लिए छह फर्मों के बीच 77.35 लाख का भुगतान बिना काम कराए ही कर दिया। इस घोटाले का सबसे पहले खुलासा अमर उजाला ने किया था। शासन के निर्देश पर जांच शुरू हुई। तत्कालीन अधीक्षण अभियंता केबी लाल की अगुवाई में कमेटी ने पाया कि बिना एग्रीमेंट किए पूरा पैसा मनमाने तरीके से छह फार्मों में बांटा गया। रिपोर्ट के आधार पर 12 अक्तूबर को उपसचिव अशोक कुमार श्रीवास्तव ने तत्कालीन अधिशासी अभियंता संजय कुमार, कैशियर अजीत कुमार, लेखाधिकारी संतोष प्रजापति को निलंबित करने के साथ ही सभी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। एक तरफ सरकार लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति अपनाने की बात कर रही है। वहीं, अफसर करीब एक माह बाद भी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज नहीं करा सके। सूत्रों का कहना है आरोपियों को विधिक रास्ता मुहैया कराने की खातिर जानबूझकर समय दिया जा रहा। वहीं आरोपी एजेंसियां बचने के लिए राजनैतिक सूत्र तलाशने में जुटी हुई हैं। उनसे रिकवरी वसूलकर छोड़ने की भी कोशिश की जा रही है।
इन एजेंसियों को किया गया था भुगतान
मां कामाक्षी सप्लायर्स को एक अक्तूबर 2019 को 9.99 लाख रुपये
मेसर्स शब्द कंस्ट्रक्शन को 26 सिंतबर 2019 को 46.53 लाख रुपये
मेसर्स अनुज कंस्ट्रक्शन को चार नंवबर 2019 को 4.98 लाख रुपये
मेसर्स रोहित कंस्ट्रक्शन को चार दिसंबर 2019 को 5.90 लाख रुपये
मेसर्स जेपी इंटरप्राइजेज को चार दिसंबर 2019 को 5.90 लाख रुपये
बाबू प्रसाद तिवारी फर्म चार दिसंबर 2019 को 4.10 लाख रुपये
इस मामले की पूरी फाइल मंगवाई है। शासन के निर्देश के मुताबिक जल्द ही इस मामले में कार्रवाई कराई जाएगी। त्रिलोक चंद्र शर्मा, मुख्य अभियंता, एलवन, बेतवा परियोजना।
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बेतवा प्रखंड के तत्कालीन एक्सईएन संजय कुमार ने पिछले सीजन में नहरों की सफाई, मरम्मत कार्य के लिए छह फर्मों के बीच 77.35 लाख का भुगतान बिना काम कराए ही कर दिया। इस घोटाले का सबसे पहले खुलासा अमर उजाला ने किया था। शासन के निर्देश पर जांच शुरू हुई। तत्कालीन अधीक्षण अभियंता केबी लाल की अगुवाई में कमेटी ने पाया कि बिना एग्रीमेंट किए पूरा पैसा मनमाने तरीके से छह फार्मों में बांटा गया। रिपोर्ट के आधार पर 12 अक्तूबर को उपसचिव अशोक कुमार श्रीवास्तव ने तत्कालीन अधिशासी अभियंता संजय कुमार, कैशियर अजीत कुमार, लेखाधिकारी संतोष प्रजापति को निलंबित करने के साथ ही सभी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। एक तरफ सरकार लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति अपनाने की बात कर रही है। वहीं, अफसर करीब एक माह बाद भी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज नहीं करा सके। सूत्रों का कहना है आरोपियों को विधिक रास्ता मुहैया कराने की खातिर जानबूझकर समय दिया जा रहा। वहीं आरोपी एजेंसियां बचने के लिए राजनैतिक सूत्र तलाशने में जुटी हुई हैं। उनसे रिकवरी वसूलकर छोड़ने की भी कोशिश की जा रही है।
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इन एजेंसियों को किया गया था भुगतान
मां कामाक्षी सप्लायर्स को एक अक्तूबर 2019 को 9.99 लाख रुपये
मेसर्स शब्द कंस्ट्रक्शन को 26 सिंतबर 2019 को 46.53 लाख रुपये
मेसर्स अनुज कंस्ट्रक्शन को चार नंवबर 2019 को 4.98 लाख रुपये
मेसर्स रोहित कंस्ट्रक्शन को चार दिसंबर 2019 को 5.90 लाख रुपये
मेसर्स जेपी इंटरप्राइजेज को चार दिसंबर 2019 को 5.90 लाख रुपये
बाबू प्रसाद तिवारी फर्म चार दिसंबर 2019 को 4.10 लाख रुपये
इस मामले की पूरी फाइल मंगवाई है। शासन के निर्देश के मुताबिक जल्द ही इस मामले में कार्रवाई कराई जाएगी। त्रिलोक चंद्र शर्मा, मुख्य अभियंता, एलवन, बेतवा परियोजना।
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