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झांसी के 75 अस्पतालों के पास नहीं है नगर निगम का लाइसेंस
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झांसी। महानगर की सीमा के भीतर 75 अस्पताल संचालक ऐसे हैं जिन्होंने अब तक नगर निगम से लाइसेंस नहीं बनवाया है। इसके लिए नगर निगम द्वारा कई बार सूचना भेजी गईं है। लेकिन संचालक लाइसेंस बनवाने से मना कर रहे हैं। लेकिन अब नगर निगम ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए लाइसेंस जारी करवाने की जिम्मेदारी मुख्य चिकित्साधिकारी को सौंप दी है। इसके लिए नगर निगम ने सीएमओ को पत्र भी भेजा है।
शहर में व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित करने पर नगर निगम से लाइसेंस लेना अनिवार्य है। इसके लिए नगर निगम को लाइसेंस शुल्क अदा करना होता है। लाइसेंस शुल्क से नगर निगम की आय में इजाफा होता है। वहीं एक साल के बाद लाइसेंस का नवीनीकरण करना भी आवश्यक होता है। इसके लिए नगर निगम ने अभियान को शुरू किया है। जिसके तहत शहर के समस्त व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लाइसेंस को जारी किया जा रहा है। वर्तमान में शहर में लगभग 200 नर्सिंग होम एवं अस्पतालों का संचालन किया जा रहा है। जिसमें से तकरीबन सवा सौ नर्सिंग होम और अस्पतालों का लाइसेंस नगर निगम द्वारा जारी किया गया है। लेकिन लगभग 75 नर्सिंग होम एवं अस्पताल संचालक लाइसेंस लेने के लिए राजी नहीं है। इसके लिए नगर निगम द्वारा कई बार पत्र लिखकर सूचना जारी की गई है। लेकिन अब नगर निगम द्वारा सीएमओ को पत्र लिख गया है।
महानगर के लगभग 75 नर्सिंग होम और अस्पताल के संचालक लाइसेंस लेने को तैयार नहीं हैं। इसके लिए कई बार सूचना भेजी गई है। लाइसेंस को जारी करवाने के लिए सीएमओ को पत्र लिखा गया है।
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डीएम कटियार, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी
यह है लाइसेंस शुल्क रुपये
बीस बेड़ का नर्सिंग होम 2000
बीस बेड़ से अधिक नर्सिंग होम 5000
बीस बेड का प्रसूति ग्रह 4000
बीस बेड से अधिक प्रसूत ग्रह 5000
प्राइवेट क्लीनिक 3000
डेंटल क्लीनिक 4000
एक्सरे सेंटर 2000
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शहर में व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित करने पर नगर निगम से लाइसेंस लेना अनिवार्य है। इसके लिए नगर निगम को लाइसेंस शुल्क अदा करना होता है। लाइसेंस शुल्क से नगर निगम की आय में इजाफा होता है। वहीं एक साल के बाद लाइसेंस का नवीनीकरण करना भी आवश्यक होता है। इसके लिए नगर निगम ने अभियान को शुरू किया है। जिसके तहत शहर के समस्त व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लाइसेंस को जारी किया जा रहा है। वर्तमान में शहर में लगभग 200 नर्सिंग होम एवं अस्पतालों का संचालन किया जा रहा है। जिसमें से तकरीबन सवा सौ नर्सिंग होम और अस्पतालों का लाइसेंस नगर निगम द्वारा जारी किया गया है। लेकिन लगभग 75 नर्सिंग होम एवं अस्पताल संचालक लाइसेंस लेने के लिए राजी नहीं है। इसके लिए नगर निगम द्वारा कई बार पत्र लिखकर सूचना जारी की गई है। लेकिन अब नगर निगम द्वारा सीएमओ को पत्र लिख गया है।
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महानगर के लगभग 75 नर्सिंग होम और अस्पताल के संचालक लाइसेंस लेने को तैयार नहीं हैं। इसके लिए कई बार सूचना भेजी गई है। लाइसेंस को जारी करवाने के लिए सीएमओ को पत्र लिखा गया है।
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डीएम कटियार, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी
यह है लाइसेंस शुल्क रुपये
बीस बेड़ का नर्सिंग होम 2000
बीस बेड़ से अधिक नर्सिंग होम 5000
बीस बेड का प्रसूति ग्रह 4000
बीस बेड से अधिक प्रसूत ग्रह 5000
प्राइवेट क्लीनिक 3000
डेंटल क्लीनिक 4000
एक्सरे सेंटर 2000