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खड़े रह गए लाखों की लागत से तैयार रेलवे के 70 आइसोलेशन कोच

Tue, 17 Aug 2021 01:42 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 17 Aug 2021 01:42 AM IST
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70 isolation coaches of railways ready at the cost of lakhs left standing
झांसी। कोराना की लहर में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सवा साल पहले तैयार किए गए 70 आइसोलेशन कोचों का अब तक इस्तेमाल नहीं हो सका है। लाखों की लागत से बने कोच खड़े ही रह गए। इनकी कोई जरूरत नहीं पड़ी तो अब इनमें से 50 कोचों को दोबारा पटरी पर दौड़ा दिया गया है।
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उत्तर मध्य रेल प्रशासन ने बढ़ती कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या को देखते अप्रैल 2020 में झांसी, आगरा व प्रयागराज मंडल में आइसोलेशन कोच तैयार किए थे। इनमें 70 कोच झांसी में तैयार किए गए थे। किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए दस कोचों को जोड़कर एक ट्रेन प्लेटफार्म छह पर खड़ी कर दी गई थी। प्रत्येक कोच में 8 आइसोलेशन वार्ड (नौ बेड) तैयार किए गए, जिसमें प्रत्येक वार्ड में आपातकालीन स्थिति में एक मरीज को रखा जा सकता है। बोगियों को आइसोलेशन वार्ड में तब्दील करने के लिए शयनयान एवं सामान्य श्रेणी के कोच को परिवर्तित किया गया।
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लेकिन 70 कोचों में कोई संक्रमित भर्ती नहीं किया गया। ऐसे में अब 50 को पटरी पर दौड़ा दिया गया है। दस कोचों की एक ट्रेन झांसी डिपो में पर खड़ी है, जबकि पांच कोच ग्वालियर में हैं। लाखों रुपये खर्च कर तैयार किए गए ये कोच अब तक धूल खा रहे हैं। इस संबंध में जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि आइसोलेशन कोचों का उपयोग जिला प्रशासन के आदेश पर किया जाना है। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कोचों को तैयार किया गया है।
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धूल खा रहे कोच, कई रख-रखाव के अभाव में हुए बेकार
सवा साल बीतने के बाद भी आइसोलेशन कोच में एक भी मरीज भर्ती नहीं किया गया है। ट्रेन को प्लेटफार्म छह से हटाकर डिपो यार्ड पर खड़ा कर दिया गया। कोरोना की दूसरी लहर के बाद इन दिनों आइसोलेशन कोच धूल खा रहे हैं। कोच में जो इंतजाम किए गए थे वे भी रख-रखाव के अभाव में बेकार हो गए हैं। हालांकि, 70 में से अब 20 कोच ही आइसोलेशन हैं। बाकी दोबारा सवारी गाड़ियों के साथ लगकर पटरी पर दौड़ने लगे हैं।

एक कोच पर 77678 रुपये का दिखाया खर्च
झांसी। रेलवे से मुंबई के रहने वाले अजय बाशुदेव बोस ने सूचना अधिकार के तहत आइसोलेशन कोच के संबंध में जानकारी मांगी थी। रेलवे द्वारा बताया गया कि प्रत्येक आइसोलेशन कोच पर 77678 रुपये खर्च किए गए। इसमें दो बोतल होल्डर, दो कपड़े टांगने के हुक, ऑक्सीजन सिलिंडर ब्रैकेट, पैर वाले तीन कूड़ेदान, स्नानघर में व्यवस्था (स्टूल, मग, बाल्टी), हर कोच में एक नर्स और चिकित्सक के लिए अलग से कक्ष बनाया गया है। कोच में प्लास्टिक के चादर लगाए हैं। मेडिकल उपकरणों को चलाने के लिए पर्याप्त बिजली के स्विच व बीच की बर्थ को हटाया गया है। इस हिसाब से झांसी रेल मंडल में तैयार कोचों पर 54.37 लाख रुपये खर्च किए गए।
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