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मुसीबत में बढ़ाए हाथ, नवाजात को मिला नया जीवन
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मुसीबत में बढ़ाए हाथ, नवाजात को मिला नया जीवन
झांसी। सीतापुर से आए मुकेश के दो माह के बच्चे रमन की पीठ पर एक उभार का चिकित्सकों ने ऑपरेशन किया तो मरीज को खून की आवश्यकता पड़ी। खून की व्यवस्था न होने पर मेडिकल कॉलेज के स्वास्थ्य कर्मचारी ने परिवार की विपरीत स्थिति में मदद की।
मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक के लैब असिस्टेंट घनश्याम वर्मा ने बताया कि मुकेश के बच्चे को पीठ पर उभार था, जिसे मेडिकल भाषा में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट कहते हैं। यदि इसका इलाज समय रहते न हो तो ऐसी स्थिति में बच्चे की मौत भी हो सकती थी। पेशे से मजदूर मुकेश ने पहले अपने बच्चे को सीतापुर के ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर दिखाया और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) टीम के संपर्क में आए और मरीज को मेडिकल कॉलेज रिफर कर दिया। ऑपरेशन के दौरान बच्चे को खून की जरूरत पड़ी। विपरीत स्थित में लैब असिस्टेंट ने मुकेश की हालत देख मदद अपनी पत्नी रेखा का रक्तदान कराया। रेखा ने बताया कि वह अपना बच्चा खो चुकी है और वह इस दर्द को भांपते हुए वह आगे आईं। वहीं, और दो यूनिट की और आवश्यकता पड़ने पर गुरसराय आरबीएसके टीम की फार्मासिस्ट द्रोपदी ने 100 एमएल की दो यूनिट दान देकर नवजात को नया जीवन बनाया।
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झांसी। सीतापुर से आए मुकेश के दो माह के बच्चे रमन की पीठ पर एक उभार का चिकित्सकों ने ऑपरेशन किया तो मरीज को खून की आवश्यकता पड़ी। खून की व्यवस्था न होने पर मेडिकल कॉलेज के स्वास्थ्य कर्मचारी ने परिवार की विपरीत स्थिति में मदद की।
मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक के लैब असिस्टेंट घनश्याम वर्मा ने बताया कि मुकेश के बच्चे को पीठ पर उभार था, जिसे मेडिकल भाषा में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट कहते हैं। यदि इसका इलाज समय रहते न हो तो ऐसी स्थिति में बच्चे की मौत भी हो सकती थी। पेशे से मजदूर मुकेश ने पहले अपने बच्चे को सीतापुर के ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर दिखाया और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) टीम के संपर्क में आए और मरीज को मेडिकल कॉलेज रिफर कर दिया। ऑपरेशन के दौरान बच्चे को खून की जरूरत पड़ी। विपरीत स्थित में लैब असिस्टेंट ने मुकेश की हालत देख मदद अपनी पत्नी रेखा का रक्तदान कराया। रेखा ने बताया कि वह अपना बच्चा खो चुकी है और वह इस दर्द को भांपते हुए वह आगे आईं। वहीं, और दो यूनिट की और आवश्यकता पड़ने पर गुरसराय आरबीएसके टीम की फार्मासिस्ट द्रोपदी ने 100 एमएल की दो यूनिट दान देकर नवजात को नया जीवन बनाया।
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