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पैरोल पर रिहा हुए 58 कैदी लापता
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झांसी। कोरोनाकाल में पैरोल पर रिहा हुए अधिकांश कैदी अवधि खत्म होने के बावजूद कारागार नहीं लौटे। बुंदेलखंड इलाके में 74 कैदियों को पैरोल पर छोड़ा गया, लेकिन महज 17 कैदी ही वापस लौटे। झांसी कारागार की बात करें, तो यहां 46 कैदी छोड़े गए लेकिन, महज पांच कैदियों ने ही आमद दर्ज कराई है। इसी तरह ललितपुर में महज 11 कैदी ही वापस लौटे। जेल प्रशासन के बाद अब पुलिस को इन्हें खोजने में पसीना बहाना पड़ रहा।
कोविड महामारी के दौरान संक्रमण से बचाव की खातिर अधिकतम सात वर्ष के सजायाफ्ता कैदियों को पैरोल पर छोड़ा गया था। बुंदेलखंड में झांसी, ललितपुर जेल से कुल 74 कैदी पैरोल पर छोडे़ गए। इनमें झांसी से 46 एवं ललितपुर से 28 कैदियों को छोड़ा गया। पुलिस अफसरों के मुताबिक इनकी पैरोल अवधि 17 नवंबर को खत्म हो गई। नियमत: कैदियों को अब वापस लौट आना चाहिए था, लेकिन अधिकांश कैदी वापस ही नहीं लौट रहे। इनको वापस बुलाने के लिए पहले जेल प्रशासन ने अपने स्तर से कोशिश की। अधिकांश कैदी कारागार में दर्ज कराए गए संपर्क नंबरों पर मिले ही नहीं। थक-हारकर जेल अफसरों ने पुलिस से तलाशने की गुहार लगाई। जब पुलिस ने तलाश शुरू कराई तब उसके भी पसीने छूट गए। अधिकांश कैदी अपने दिए पते पर नहीं मिल रहे। पुलिस अफसरों का कहना है कैदियों की रिश्तेदारियों में भी तलाश की जा रही। लेकिन वहां भी सुराग नहीं मिल रहा। दरअसल, कोविड प्रकोप के चलते ऐसे कैदियों को मार्च में एक आदेश के आधार पर छोड़ा गया था। शुरूआत में आठ सप्ताह की पैरोल तय हुई। इसे धीरे-धीरे करके बढ़ाया जाता रहा। नवंबर माह में सरकार ने पैरोल नहीं बढ़ाया। उसके बाद इन कैदियों की खोज-खबर शुरू हुई।
जिन कैदियों को पैरोल पर छोड़ा गया था, उनको वापसी की कार्रवाई शुरू कराई गई है। लेकिन, अभी पांच कैदी ही वापस आए हैं। बाकी कैदियों की वापसी के लिए कार्रवाई शुरू कराई गई है। राजीव शुक्ला, जेल अधीक्षक।
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कोविड महामारी के दौरान संक्रमण से बचाव की खातिर अधिकतम सात वर्ष के सजायाफ्ता कैदियों को पैरोल पर छोड़ा गया था। बुंदेलखंड में झांसी, ललितपुर जेल से कुल 74 कैदी पैरोल पर छोडे़ गए। इनमें झांसी से 46 एवं ललितपुर से 28 कैदियों को छोड़ा गया। पुलिस अफसरों के मुताबिक इनकी पैरोल अवधि 17 नवंबर को खत्म हो गई। नियमत: कैदियों को अब वापस लौट आना चाहिए था, लेकिन अधिकांश कैदी वापस ही नहीं लौट रहे। इनको वापस बुलाने के लिए पहले जेल प्रशासन ने अपने स्तर से कोशिश की। अधिकांश कैदी कारागार में दर्ज कराए गए संपर्क नंबरों पर मिले ही नहीं। थक-हारकर जेल अफसरों ने पुलिस से तलाशने की गुहार लगाई। जब पुलिस ने तलाश शुरू कराई तब उसके भी पसीने छूट गए। अधिकांश कैदी अपने दिए पते पर नहीं मिल रहे। पुलिस अफसरों का कहना है कैदियों की रिश्तेदारियों में भी तलाश की जा रही। लेकिन वहां भी सुराग नहीं मिल रहा। दरअसल, कोविड प्रकोप के चलते ऐसे कैदियों को मार्च में एक आदेश के आधार पर छोड़ा गया था। शुरूआत में आठ सप्ताह की पैरोल तय हुई। इसे धीरे-धीरे करके बढ़ाया जाता रहा। नवंबर माह में सरकार ने पैरोल नहीं बढ़ाया। उसके बाद इन कैदियों की खोज-खबर शुरू हुई।
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जिन कैदियों को पैरोल पर छोड़ा गया था, उनको वापसी की कार्रवाई शुरू कराई गई है। लेकिन, अभी पांच कैदी ही वापस आए हैं। बाकी कैदियों की वापसी के लिए कार्रवाई शुरू कराई गई है। राजीव शुक्ला, जेल अधीक्षक।
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