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बुंदेलखंड में खेती के लिए लागू हो सकती इस् त्राइल तकनीकी -Dehat
Updated Thu, 12 Jul 2018 09:08 PM IST
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इस्राइल के विशेषज्ञों ने तलाशीं जल संरक्षण की संभावना
झांसी, ललितपुर का दौरा, खेती में लागू हो सकती है वहां की तकनीक
बुंदेलखंड में सिंचाई, जल संवर्धन, कृषि विकास की उम्मीदें भी खंगालीं
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। इस्त्राइल में सालाना औसतन 350 मिलीमीटर बारिश होती है, जबकि बुंदेलखंड में 800 मिलीमीटर। इसके बावजूद यहां फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। ऐसे में बुंदेलखंड में इस्त्राइल तकनीकी लागू करके फसलों को जरूरत के हिसाब से पानी देने, सिंचाई, जल संरक्षण, जल संवर्धन व कृषि विकास की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इसके बाद प्रदेश सरकार को रिपोर्ट दी जाएगी। सरकार पायलट प्रोजेक्ट लागू करेगी। बृहस्पतिवार को झांसी आए इस्त्राइल दल के प्रतिनिधि येजेचकल लिफ्जहिट्ज ने डब्लूआरजी कार्यशाला के बाद पत्रकार वार्ता में यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि इस्त्राइल में जल को राष्ट्रीय धरोहर माना जाता है और संरक्षण कानून द्वारा किया जाता है। इस्त्राइल में गर्मी में बारिश नहीं होती है। लगातार जल कम होता जा रहा है, जबकि कृषि उत्पादन 50 सालों में 12 गुना बढ़ा है। जल संरक्षण करने के साथ-साथ प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए। यही सिद्धांत बुंदेलखंड के लिए भी कारगर होगा। लिफ्जहिट्ज कहा कि इस्त्राइल में भी मौसम की कठिन परिस्थितियों और जल की गंभीर कमी का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद वहां कृषि में सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। यह सफलता खेती में सृजनात्मकता व उद्यमिता की भावना और कृषि व कृषि तकनीक उद्योगों के बीच तालमेल के कारण मिली है। बुंदेलखंड में भी इसी भावना से काम किया जाए तो लाभ होगा। उन्होंने कहा कि डब्लूआरजी कार्यशाला एक सफल व उपयोगी कार्यशाला होगी। मंडलायुक्त कुमुदलता श्रीवास्तव ने कहा कि इस्त्राइल और भारत विशेष रूप से बुंदेलखंड की भौगोलिक स्थिति व जलवायु समान है। ऐसे में इस्त्राइल की तकनीकी भारत के लिए बेहतर कारगर साबित होगी। केंद्र व प्रदेश सरकार बुंदेलखंड के किसानों के लिए व उनके विकास के लिए कटिबद्ध है। झांसी में बबीना विकास खंड को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लिया गया है। इससे पूर्व कार्यशाला में सीडीओ निखिल फुंडे ने कहा कि इस्त्राइल की अर्थव्यवस्था कृषि से ही मजबूत है। इस्त्राइल में एक-एक बूंद का संरक्षण और पानी के उपयोग का बेहतर प्रबंधन है। नाबार्ड से अजय सोनी जल संरक्षण व जल संवर्धन के लिए संचालित योजनाएं व फंडिंग के बारे में बताया। इस दौरान इस्त्राइल प्रतिनिधिमंडल से अदीना एस्टेला डार, तमर मिचेल जिव, अवि हरप्रेज, वरिष्ठ सलाहकार अनिल सिन्हा, डीएम शिवसहाय अवस्थी, वन संरक्षक एके सिंह, डीएफओ डॉ. एमके शुक्ला, डीडी कृषि राम प्रताप समेत सिंचाई, विद्युत, लघु सिंचाई विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। इसके बाद इस्त्राइल से आए प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को झांसी के पहूज और ललितपुर के माताटीला बांध का दौरा किया।
ड्रिप इरीगेशन से होगा फायदा
भारतीय दूतावास के अधिकारी विनोद मेहता ने बताया कि कम पानी में भी इस्त्राइल में अच्छी फसल का कारण ड्रिप इरीगेशन (खेतों में पाइप बिछारक छेद करके सिंचाई करना) विधि अपनाना है। इससे एक तरफ पानी की बर्बादी नहीं होती है, दूसरी तरफ पैदावार अच्छी होती है। यही तकनीकी बुंदेलखंड में प्रयोग करके किसान को फायदा हो सकता है।
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सेंटर ऑफ एक्सीलेंस लागू हो सकता
बुधवार को इस्त्राइल के दल बांदा में था। दल के सदस्यों ने बताया कि बांदा के कृषि विश्वविद्यालय में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस लागू करने पर विचार चल रहा है। इसके जरिए बुंदेलखंड के लिए कौन सी फसलें उपयुक्त रहेगी, इस पर विचार-विमर्श व शोध किया जा सकेगा।
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इस्राइल के विशेषज्ञों ने तलाशीं जल संरक्षण की संभावना
झांसी, ललितपुर का दौरा, खेती में लागू हो सकती है वहां की तकनीक
बुंदेलखंड में सिंचाई, जल संवर्धन, कृषि विकास की उम्मीदें भी खंगालीं
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। इस्त्राइल में सालाना औसतन 350 मिलीमीटर बारिश होती है, जबकि बुंदेलखंड में 800 मिलीमीटर। इसके बावजूद यहां फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। ऐसे में बुंदेलखंड में इस्त्राइल तकनीकी लागू करके फसलों को जरूरत के हिसाब से पानी देने, सिंचाई, जल संरक्षण, जल संवर्धन व कृषि विकास की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इसके बाद प्रदेश सरकार को रिपोर्ट दी जाएगी। सरकार पायलट प्रोजेक्ट लागू करेगी। बृहस्पतिवार को झांसी आए इस्त्राइल दल के प्रतिनिधि येजेचकल लिफ्जहिट्ज ने डब्लूआरजी कार्यशाला के बाद पत्रकार वार्ता में यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि इस्त्राइल में जल को राष्ट्रीय धरोहर माना जाता है और संरक्षण कानून द्वारा किया जाता है। इस्त्राइल में गर्मी में बारिश नहीं होती है। लगातार जल कम होता जा रहा है, जबकि कृषि उत्पादन 50 सालों में 12 गुना बढ़ा है। जल संरक्षण करने के साथ-साथ प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए। यही सिद्धांत बुंदेलखंड के लिए भी कारगर होगा। लिफ्जहिट्ज कहा कि इस्त्राइल में भी मौसम की कठिन परिस्थितियों और जल की गंभीर कमी का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद वहां कृषि में सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। यह सफलता खेती में सृजनात्मकता व उद्यमिता की भावना और कृषि व कृषि तकनीक उद्योगों के बीच तालमेल के कारण मिली है। बुंदेलखंड में भी इसी भावना से काम किया जाए तो लाभ होगा। उन्होंने कहा कि डब्लूआरजी कार्यशाला एक सफल व उपयोगी कार्यशाला होगी। मंडलायुक्त कुमुदलता श्रीवास्तव ने कहा कि इस्त्राइल और भारत विशेष रूप से बुंदेलखंड की भौगोलिक स्थिति व जलवायु समान है। ऐसे में इस्त्राइल की तकनीकी भारत के लिए बेहतर कारगर साबित होगी। केंद्र व प्रदेश सरकार बुंदेलखंड के किसानों के लिए व उनके विकास के लिए कटिबद्ध है। झांसी में बबीना विकास खंड को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लिया गया है। इससे पूर्व कार्यशाला में सीडीओ निखिल फुंडे ने कहा कि इस्त्राइल की अर्थव्यवस्था कृषि से ही मजबूत है। इस्त्राइल में एक-एक बूंद का संरक्षण और पानी के उपयोग का बेहतर प्रबंधन है। नाबार्ड से अजय सोनी जल संरक्षण व जल संवर्धन के लिए संचालित योजनाएं व फंडिंग के बारे में बताया। इस दौरान इस्त्राइल प्रतिनिधिमंडल से अदीना एस्टेला डार, तमर मिचेल जिव, अवि हरप्रेज, वरिष्ठ सलाहकार अनिल सिन्हा, डीएम शिवसहाय अवस्थी, वन संरक्षक एके सिंह, डीएफओ डॉ. एमके शुक्ला, डीडी कृषि राम प्रताप समेत सिंचाई, विद्युत, लघु सिंचाई विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। इसके बाद इस्त्राइल से आए प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को झांसी के पहूज और ललितपुर के माताटीला बांध का दौरा किया।
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ड्रिप इरीगेशन से होगा फायदा
भारतीय दूतावास के अधिकारी विनोद मेहता ने बताया कि कम पानी में भी इस्त्राइल में अच्छी फसल का कारण ड्रिप इरीगेशन (खेतों में पाइप बिछारक छेद करके सिंचाई करना) विधि अपनाना है। इससे एक तरफ पानी की बर्बादी नहीं होती है, दूसरी तरफ पैदावार अच्छी होती है। यही तकनीकी बुंदेलखंड में प्रयोग करके किसान को फायदा हो सकता है।
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सेंटर ऑफ एक्सीलेंस लागू हो सकता
बुधवार को इस्त्राइल के दल बांदा में था। दल के सदस्यों ने बताया कि बांदा के कृषि विश्वविद्यालय में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस लागू करने पर विचार चल रहा है। इसके जरिए बुंदेलखंड के लिए कौन सी फसलें उपयुक्त रहेगी, इस पर विचार-विमर्श व शोध किया जा सकेगा।