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एमसीआई, यूपी के मानकों में फेर, मान्यता पर तलवार-City

Fri, 29 Sep 2017 09:11 PM IST
Updated Fri, 29 Sep 2017 09:11 PM IST
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एमसीआई, यूपी के मानकों में फेर, मान्यता पर तलवार-City
एमसीआई, यूपी के मानकों में फेर, मान्यता पर तलवार
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- मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षक की प्रोन्नति को अलग-अलग हैं नियम
- प्रदेश सरकार अनुभव और एमसीआई शोधपत्र प्रकाशन को मानती है आधार
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षकों की पदोन्नति के लिए सरकार और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के मानकों में फेर (अंतर) है। एमसीआई ने शोध पत्र प्रकाशन, जबकि सरकार अनुभव को पदोन्नति का मानक तय कर रखा है। ऐसे में निरीक्षण में शोधपत्र नहीं होने पर चिकित्सा शिक्षकों के पदों की गणना एमसीआई नहीं करती है। इससे सीटों की मान्यता पर तलवार लटक जाती है।
प्रदेश में 12 राजकीय मेडिकल कॉलेज हैं। यहां सह आचार्य और आचार्य (प्रोफेसर) पद पर नियुक्ति व्यक्तिगत प्रोन्नति के रूप में होती है। सह आचार्य पद के लिए सहायक आचार्य के रूप में चार साल और आचार्य पद के लिए सह आचार्य के तौर पर तीन साल का अनुभव ही मानक है। वहीं, वर्ष 2015 से एमसीआई सह आचार्य के लिए दो और आचार्य के चार शोध पत्रों का प्रकाशन न्यूनतम शैक्षिक योग्यता के रूप में अनिवार्य कर चुका है। सामान्यता एक चिकित्सा शिक्षक एक साल में तीन से चार शोध पत्र प्रकाशित करता है और मेडिकल कॉलेज से प्रेषित शोध पत्रों की संख्या से ही कॉलेज की राष्ट्रीय रैंकिंग तय होती है। सबसे ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित होने पर दिल्ली के एम्स प्रथम स्थान पर है। बिना शोध पत्र प्रोन्नति पर एमसीआई की टीम निरीक्षण के दौरान ऐसे शिक्षकों की गणना नहीं करती है। इन्हें खाली पद माना जाता है। ऐसे सह आचार्य, आचार्य वेतन लेने के बावजूद एमबीबीएस, एमडी, एमएस की सीट की मान्यता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।
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2005 नियमावली से हो रही पदोन्नति
प्रदेश में चिकित्सा शिक्षकों की नियुक्ति चिकित्सा सेवा नियमावली 2005 के अनुसार होती है। उस समय शोध पत्र अनिवार्य नहीं था लेकिन जल्द ही इस नियमावली में एमसीआई के मानकों के अनुरूप संशोधन प्रस्तावित है। ऐसे में न्यूनतम योग्यता को दरकिनार कर पदोन्नति से सरकार पर वित्तीय भार तो बढ़ाता है। शायद यही वजह है कि देश में सर्वाधिक मेडिकल पोस्ट ग्रेजुएट की गैर मान्यता प्राप्त सीट प्रदेश में हैं। सूत्रों के अनुसार अधिकतर मान्यता प्राप्त सीटों की मान्यता का भी नवीनीकरण नहीं कराया जा रहा है। जबकि, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और एमसीआई ने हर पांच साल में नवीनीकरण कराना अनिवार्य किया है।
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कई कोर्सों की सीट गैर मान्यता प्राप्त
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में सर्जरी की दो, मेडिसिन की चार और पीडियाट्रिक्स की पांच पोस्ट ग्रेजुएट सीट गैर मान्यता प्राप्त हैं। हालांकि, पीडियाट्रिक्स में चिकित्सा शिक्षकों के पद भरे न होने के कारण एमसीआई ने निरीक्षण नहीं किया है। मगर एमसीआई ने मेडिसिन में एक प्रोफेसर और सर्जरी में दो एसोसिएट प्रोफेसरों की निरीक्षण में गणना नहीं की थी। इसकी वजह मानकों के अनुसार नियुक्ति अथवा प्रोन्नति नहीं होना है। कुछ दिन पहले ही एमसीआई ने मेडिकल कॉलेजों से गैर मान्यता प्राप्त सीटों पर प्रवेश रोकने और मान्यता की कार्रवाई शुरू करने को कहा है। अब जब तक नियुक्तियां एमसीआई के अनुसार नहीं होती, तब तक मान्यता मिलना संभव नहीं है।


पूरे हैं मानक
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में मौजूदा समय में सभी चिकित्सा शिक्षकों के पद एमसीआई मानकों के अनुसार भरे हैं। पहले जरूर कुछ डॉक्टरों की नियुक्ति मानक अनुसार नहीं थी, बाद में शोध पत्र पूर्ण कराए गए। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।
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