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सिविक एमीनिटीज- पैसों के इंतजार में अटकी योजनाएं-City

Sat, 02 Sep 2017 10:20 PM IST
Updated Sat, 02 Sep 2017 10:20 PM IST
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सिविक एमीनिटीज- पैसों के इंतजार में अटकी योजनाएं-City
सिविक एमीनिटीज
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फोटो
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बजट के इंतजार में अटकी कई योजनाएं
सब हेड --- - अधूरा पड़ा बुंदेलखंड का एकमात्र इलेक्ट्रिक शव दाहगृह
- गढ़मऊ झील को भी है पैसे का इंतजार
- कान्हा उपवन भी मांग रहा पैसे
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
पैसे के अभाव में विकास की योजनाओं की गति ठप पड़ी है। ऐसी एक नहीं चार योजनाएं हैं, जिनसे शहर के विकास में तेजी आएगी। लेकिन, शासन से बजट नहीं मिलने के कारण जो योजनाएं एक साल पहले शुरू होनी थीं, वह अब तक पूरी नहीं हो सकी हैं। इसमें बुंदेलखंड का एकमात्र उन्नाव गेट स्थित इलेक्ट्रिक शव दाहगृह भी शामिल है।
इलेक्ट्रिक शव दाहगृह
सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के मुताबिक पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए खुले में शवों का न जलाया जाए। बस्ती के अंदर बने श्मशान घाटों को बंद किया जाए। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्नाव गेट स्थित श्मशान घाट पर इलेक्ट्रिक शव दाहगृह बनाने का निर्णय लिया गया। डेढ़ करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा गया, जहां से स्वीकृति मिल गई और 70 लाख रुपये जारी कर दिए गए। इस पैसे से शव दाहगृह बनकर तैयार हो गया, लेकिन एक साल हो गया और बाकी पैसा नहीं आया। इस कारण वहां पर जनरेटर व आपरेटिंग मशीनें नहीं आ सकी हैं। अब नगर निगम चिट्ठियां लिख रहा है, पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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कान्हा उपवन योजना
कान्हा उपवन योजना का भी यही हाल है। शहर की सड़कों पर जानवर छुट्टा न घूमें, इसके लिए कान्हा उपवन योजना शुरू की गई थी। इसमें नगर निगम को गोशाला बनानी थी और उसमें छुट्टा जानवरों को पकड़कर बंद करना था। इसके बाद जानवर के मालिक को सूचना देकर उससे जुर्माना वसूलना था, ताकि लोगों में जानवरों को खुले में छोड़ने की प्रवृत्ति पर रोक लगे। इसके लिए राजगढ़ में जमीन चिह्नित कर ली गई और 1.60 करोड़ रुपये के एस्टीमेट का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया गया, लेकिन अब तक इसे स्वीकृति नहीं मिली है।
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अरबन हाट
झांसी विकास प्राधिकरण ने क्राफ्ट मेला ग्राउंड पर 3.82 करोड़ रुपये की लागत से अरबन हाट का निर्माण शुरू किया था। तीन साल पहले केंद्र सरकार के हथकरघा मंत्रालय द्वारा अनुमति मिलने के बाद काम शुरू हो गया। इसमें हस्तशिल्पियों के लिए 55 दुकानें, छोटे शिल्पियों के लिए 32 छोटे प्लेटफार्म, चार प्रदर्शनी हॉल, खाने- पीने की सामग्री बेचने के लिए दो फूड कोर्ट तथा हस्तशिल्प कला के नमूनों का संग्रह करने के लिए संग्रहालय बनाना था। अरबन हाट निर्माण का लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा हो गया, लेकिन केंद्र सरकार से दो करोड़ रुपये नहीं मिलने के कारण काम बंद पड़ा है। जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह तीस अगस्त को शिल्प ग्राम में पौधरोपण करने गए थे, पैसे की कमी से उन्हें अवगत कराया गया था। उन्होंने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया था। अब देखना है कि कब पैसा जारी होता है और कब अरबन हाट का निर्माण पूरा होता है।
गढ़मऊ झील
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गढ़मऊ गांव में स्थित प्राकृतिक झील के सुंदरीकरण के लिए केंद्र सरकार से 1.17 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए। इस पैसे से झील के किनारे पर बैठने के लिए बेंच, फुटपाथ, झूले और मोटरवोट शुरू करने की योजना थी, ताकि यहां पर ज्यादा से ज्यादा पर्यटक आएं। लेकिन, बाद में केंद्र सरकार ने आधा पैसा राज्य को देने की शर्त लगा दी और राज्य सरकार ने पैसा जारी नहीं किया, जिससे गढ़मऊ झील का सुंदरीकरण अधर में लटक गया है। अब न तो पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कोई कर रहा है और न ही गढ़मऊ झील का विकास हो रहा है।



कोट --
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शासन को लिखी गई चिट्ठी
इलेक्ट्रिक शव दाहगृह के लिए पैसा जारी हो जाए, इसलिए तीन चिट्ठियां शासन में लिखी जा चुकी हैं। उम्मीद है कि अब पैसा आ जाएगा। कान्हा उपवन के लिए भी शासन से पैसा मांगा गया है। पैसा जारी होते ही काम शुरू हो जाएगा।
- एके शर्मा
अधिशासी अभियंता
नगर निगम
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