{"_id":"5e221ab38ebc3e8d3f51fa4b","slug":"4999-more-rupee-release-e-stamp-jhansi-news-jhs1578016131","type":"story","status":"publish","title_hn":"4,999 रुपये से अधिक के जारी होंगे ई-स्टांप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
4,999 रुपये से अधिक के जारी होंगे ई-स्टांप
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। जिले में जल्द ही ई-स्टांपिंग की व्यवस्था लागू होने जा रही है। इसके तहत आने वाले दिनों में लोगों को 4,999 रुपये से अधिक की धनराशि के ई-स्टांप ही जारी किए जाएंगे।
जिले में प्रतिवर्ष डेढ़ अरब रुपये से अधिक के स्टांपों की बिक्री होती है। वेंडरों व कोषागारों के जरिये ये स्टांप लिए जाते हैं। स्टांपों की छपाई व ढुलाई पर मोटी रकम खर्च होती है। इससे निजात पाने के लिए अब पूरे प्रदेश में ई-स्टांपिंग व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके लागू होने से फर्जी स्टांप की भी गुंजाइश नहीं रहेगी।
ई स्टांप की बिक्री के लिए पुराने स्टांप वेंडरों को ई-स्टांप की बिक्री का लाइसेंस दिया जाएगा, जिसके जरिये वे प्राधिकृत संग्रह केंद्र खोल सकेंगे। ई स्टांप का पंजीकरण कराने के लिए स्टांप विक्रेताओं को स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के नाम आवेदन करना होगा। इसमें केवाईसी अभिलेख के साथ जरूरी प्रपत्र जमा करने होंगे। इसके बाद आवेदक को संग्रह केंद्र खोलने की अनुमति दे दी जाएगी।
विज्ञापन
स्टांप विक्रेताओं को जुटाने होंगे संसाधन
संग्रह केंद्र खोलने के लिए स्टांप विक्रेताओं को कंप्यूटर /लैपटॉप, इंटरनेट कनेक्शन व प्रिंटर खरीदना होगा। स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन द्वारा विशेष कागज उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा प्रिंटर भी खास होगा। ई स्टांप का संचालन सेंट्रल बैंक के माध्यम से किया जाएगा। इसमें स्टांप विक्रेता अपनी क्षमता के अनुसार पांच से दस लाख तक की क्रेडिट ले सकते हैं। इसी के हिसाब से वे एसीसी के माध्यम से ई स्टांप की बिक्री कर सकेंगे। निर्धारित रुपये खर्च होने पर बैंक से दोबारा रुपये जमा कराने होंगे। यह पूरी प्रक्रिया मोबाइल रिचार्ज की तरह होगी।
ई-स्टांप व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इससे कागज की बहुत बचत होगी। इसके संचालन के लिए स्टांप विक्रेताओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। जो स्टांप विक्रेता इच्छुक होंगे, उन्हें लाइसेंस जारी कर दिए जाएंगे। - एके पासवान, सहायक महानिरीक्षक निबंधन
विज्ञापन
जिले में प्रतिवर्ष डेढ़ अरब रुपये से अधिक के स्टांपों की बिक्री होती है। वेंडरों व कोषागारों के जरिये ये स्टांप लिए जाते हैं। स्टांपों की छपाई व ढुलाई पर मोटी रकम खर्च होती है। इससे निजात पाने के लिए अब पूरे प्रदेश में ई-स्टांपिंग व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके लागू होने से फर्जी स्टांप की भी गुंजाइश नहीं रहेगी।
विज्ञापन
ई स्टांप की बिक्री के लिए पुराने स्टांप वेंडरों को ई-स्टांप की बिक्री का लाइसेंस दिया जाएगा, जिसके जरिये वे प्राधिकृत संग्रह केंद्र खोल सकेंगे। ई स्टांप का पंजीकरण कराने के लिए स्टांप विक्रेताओं को स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के नाम आवेदन करना होगा। इसमें केवाईसी अभिलेख के साथ जरूरी प्रपत्र जमा करने होंगे। इसके बाद आवेदक को संग्रह केंद्र खोलने की अनुमति दे दी जाएगी।
विज्ञापन
स्टांप विक्रेताओं को जुटाने होंगे संसाधन
संग्रह केंद्र खोलने के लिए स्टांप विक्रेताओं को कंप्यूटर /लैपटॉप, इंटरनेट कनेक्शन व प्रिंटर खरीदना होगा। स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन द्वारा विशेष कागज उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा प्रिंटर भी खास होगा। ई स्टांप का संचालन सेंट्रल बैंक के माध्यम से किया जाएगा। इसमें स्टांप विक्रेता अपनी क्षमता के अनुसार पांच से दस लाख तक की क्रेडिट ले सकते हैं। इसी के हिसाब से वे एसीसी के माध्यम से ई स्टांप की बिक्री कर सकेंगे। निर्धारित रुपये खर्च होने पर बैंक से दोबारा रुपये जमा कराने होंगे। यह पूरी प्रक्रिया मोबाइल रिचार्ज की तरह होगी।
ई-स्टांप व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इससे कागज की बहुत बचत होगी। इसके संचालन के लिए स्टांप विक्रेताओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। जो स्टांप विक्रेता इच्छुक होंगे, उन्हें लाइसेंस जारी कर दिए जाएंगे। - एके पासवान, सहायक महानिरीक्षक निबंधन