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बरसात से भरे खेत, किसान पानी की निकासी करें-Cordination

Fri, 27 Jul 2018 08:24 PM IST
Updated Fri, 27 Jul 2018 08:24 PM IST
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बरसात से भरे खेत, किसान पानी की निकासी करें-Cordination
देहात के लिए
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खरीफ फसलों में पानी न भरने दें
- झमाझम और लगातार बरसात से भर गए हैं खेत
- उड़द व मूंग की फसलों को हो सकता नुकसान
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। झमाझम बरसात से किसानों के चेहरे खिल गए हैं। लेकिन, खेतों में पानी भर जाने से खरीफ की फसलों का उत्पादन कमजोर होने के आसार नजर आने लगे हैं, ऐसे में अब खेतों में भरे पानी को निकालने के लिए कृषि विभाग ने किसानों को जागरूक करने का निर्णय लिया है।
जिले में खरीफ की फसलों में उड़द, मूंग और तिल का मुख्य उत्पादन होता है। इन फसलों की प्रकृति ऐसी है कि पानी कम मिले तो सूख जाती हैं और पानी की अधिकता हो जाए तो भी सड़कर सूख जाती हैं और फसल उत्पादन कमजोर हो जाता है। एक सप्ताह से हो रही लगातार बरसात से खेतों में पानी भर गया है, जिससे खरीफ की फसलों को नुकसान होने की आशंका पैदा हो गई है। किसानों न अच्छी बरसात होने की उम्मीद में तिल, मूंग और उड़द की भरपूर बुवाई की है। पानी बरसने से फसलें अच्छी लहलहाने लगी थीं, लेकिन लगातार हो रही बरसात से खेतों में पानी भर जाने से अब उनके खराब होने की आशंका जताई जाने लगी है। इसलिए कृषि विभाग ने निर्णय लिया है कि किसानों को जागरूक किया जाए, ताकि फसलें खराब न हों।
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जिला कृषि अधिकारी दुर्गेश कुमार सिंह ने बताया कि जिन खेतों में पानी भर गया है, किसान उन खेतों से पानी निकालने का इंतजाम कर दें। पानी इस तरह से निकाला जाए कि खेत की उपजाऊ मिट्टी न बह जाए। साथ ही पानी की निकासी भी इस तरह से हो कि खेत पूरा खाली न हो, बल्कि खेत में नमी बनी रहे।
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चौड़ी और संकरी पत्ती के खरपतवार बढ़े
झांसी। उड़द, मूंग, सोयाबीन, मूंगफली और तिल की फसलें लहलहा रही हैं। लेकिन, बरसात के साथ इन फसलों में चौड़ी पत्ती और संकरी पत्ती के खरपतवार बढ़ गए हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होगा। कृषि विभाग ने किसानों को खरपतवार नाशक रसायन का प्रयोग करने की सलाह दी है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी धर्मेंद्र कुमार अवस्थी ने बताया कि खरीफ फसलों की बुवाई के 20 से 25 दिन बाद खरपतवारों का असर दिखाई देता है, इसलिए इन्हें नष्ट करने का सबसे अच्छा समय यही होता है। इसके लिए किसान कीटनाशक रसायन ‘इमिजाथापर’ 10 प्रतिशत एमएल का अपने खेतों में छिड़काव करें। यह रसायन जिले की सभी कृषि रक्षा इकाइयों पर उपलब्ध है। कीमत 744 रुपये प्रति लीटर है और कृषि विभाग में पंजीकृत किसानों को अनुदान मिलेगा। एक लीटर रसायन पर तीन सौ रुपये छूट मिलेगी। उन्होंने कहा कि जो किसान आधार कार्ड, बैंक पास बुक की फोटो कापी लेकर आएंगे, उन्हें डीबीटी के माध्यम से अनुदान दिया जाएगा। एक लीटर ‘इमिजाथापर’ को छह सौ लीटर पानी में घोलकर ‘फ्लैट फेन नेजुल’ से छिड़काव कर खरपतवार को नष्ट किया जा सकता है।एक हेक्टेयर के लिए एक लीटर दवा पर्याप्त है। यदि किसानों को कोई दिक्कत आ रही है तो कृषि रक्षा अधिकारी के मोबाइल नंबर 8429032129 पर संपर्क किया जा सकता है।
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