{"_id":"63179db3238c3a5e0d27ab51","slug":"40-percent-paisent-jhansi-news-jhs228237913","type":"story","status":"publish","title_hn":"वायरल निमोनिया में कोरोना जैसे लक्षण, 40 फीसदी तक पहुंच जा रही ऑक्सीजन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वायरल निमोनिया में कोरोना जैसे लक्षण, 40 फीसदी तक पहुंच जा रही ऑक्सीजन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। लगातार बदल रहे मौसम से घर-घर में वायरल की दस्तक हो चुकी है। वायरल निमोनिया भी लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। खास बात यह है कि इस बीमारी में कोरोना वायरस जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। लंबे समय तक बुखार, खांसी बनी रहने पर कई मरीजों की ऑक्सीजन कम हो जाने पर सांस फूलने लगती है। 40 से लेकर 80 प्रतिशत ऑक्सीजन के साथ मरीज अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं।
इन दिनों वायरल के मरीजों से सरकारी से लेकर प्राइवेट अस्पतालों तक की ओपीडी भरी पड़ी हैं। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. पीके जैन ने बताया कि फिजीशियन ओपीडी में 30 फीसदी मरीज तो बुखार और खांसी के ही पहुंच रहे हैं। इनमें एक से दो प्रतिशत मरीज वायरल निमोनिया की भी चपेट में आ जा रहे हैं। जब वायरल संक्रमण फेफड़ों तक पहुंच जाता है तो वायरल निमोनिया हो जाता है। इसलिए मरीज वायरल को हल्के में न लें। सांस फूल रही है तो डॉक्टर को दिखाएं। एक्सरे कराने के बाद फेफड़ों की स्थिति पता चल जाती है। वहीं, क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट डॉ. श्वेतांक शर्मा ने बताया कि उनके पास 40 फीसदी तक ऑक्सीजन वाले मरीज भर्ती हुए हैं। कई मरीज कोरोना की जांच कराकर आते हैं तो इनकी रिपोर्ट निगेटिव रहती है। बताया कि इस बीमारी में मरीज की रिकवरी कोरोना के मुकाबले तेजी से होती है, बशर्ते उसे समय पर सही इलाज मिल जाए। अधिकतर मरीजों को हाई फ्लो ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा जाता है। जरूरत पड़ने पर वेंटिलेटर पर भर्ती करते हैं। कम मात्रा की स्टेरॉयड और एंटीबायोटिक दवाएं चलाई जाती हैं। इस महीने 25 से 30 मरीज वायरल निमोनिया के अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं।
को-मॉर्बिड डिजीज वालों को खतरा ज्यादा
मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. जकी सिद्दीकी ने बताया कि को-मॉर्बिड डिजीज जैसे डायबिटीज, बीपी, सीओपीडी के अलावा मोटापा आदि का शिकार रोगियों को वायरल निमोनिया होने पर गंभीर होने का खतरा ज्यादा रहता है। अधिकतर मरीज जिन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखना पड़ा, वो पहले से ही को-मॉर्बिड बीमारी की चपेट में थे। इस बीमारी में पांच से दस प्रतिशत मरीजों की मौत होने की आशंका रहती है। मेडिकल कॉलेज में 50 से लेकर 80 फीसदी ऑक्सीजन के साथ वायरल निमोनिया के शिकार मरीज हो रहे हैं। इसमें युवा भी शामिल हैं।
विज्ञापन
ये समस्या तो डॉक्टर को दिखाएं
- चार दिन बाद भी बुखार न उतरे
- लगातार खांसी बन रहे
- सीने में दर्द होने लगे
- सांस फूलनी शुरू हो जाए
ये हैं मामले
केस-1
25 साल के युवक की ऑक्सीजन पहुंच गई 70
वायरल निमोनिया का शिकार 25 वर्षीय युवक को कई दिनों से 103 डिग्री बुखार बना हुआ था। भूख न लगने से खाना बंद कर दिया था। खांसी भी लगातार आ रही थी। सांस लेने में दिक्कत हुई तो डॉक्टर को दिखाया, तब जांच में ऑक्सीजन लेवल 70 प्रतिशत मिला। इलाज के बाद ठीक हो गया। उसे भी वायरल निमोनिया निकला।
केस-2
सांस फूलने लगी तब डॉक्टर को दिखाने पहुंचा
चिरगांव निवासी 42 वर्षीय युवक को छह-सात दिनों से बुखार बना हुआ था। मेडिकल स्टोर से दवाएं लेकर खाने के बाद भी सेहत में सुधार नहीं हुआ। सांस फूलने लगी तो डॉक्टर को दिखाने पहुंचा। जांच में ऑक्सीजन लेवल 40 प्रतिशत निकला। उसे तुरंत भर्ती कर ऑक्सीजन लगाई गई। जांच में वायरल निमोनिया बताया गया।
विज्ञापन
इन दिनों वायरल के मरीजों से सरकारी से लेकर प्राइवेट अस्पतालों तक की ओपीडी भरी पड़ी हैं। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. पीके जैन ने बताया कि फिजीशियन ओपीडी में 30 फीसदी मरीज तो बुखार और खांसी के ही पहुंच रहे हैं। इनमें एक से दो प्रतिशत मरीज वायरल निमोनिया की भी चपेट में आ जा रहे हैं। जब वायरल संक्रमण फेफड़ों तक पहुंच जाता है तो वायरल निमोनिया हो जाता है। इसलिए मरीज वायरल को हल्के में न लें। सांस फूल रही है तो डॉक्टर को दिखाएं। एक्सरे कराने के बाद फेफड़ों की स्थिति पता चल जाती है। वहीं, क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट डॉ. श्वेतांक शर्मा ने बताया कि उनके पास 40 फीसदी तक ऑक्सीजन वाले मरीज भर्ती हुए हैं। कई मरीज कोरोना की जांच कराकर आते हैं तो इनकी रिपोर्ट निगेटिव रहती है। बताया कि इस बीमारी में मरीज की रिकवरी कोरोना के मुकाबले तेजी से होती है, बशर्ते उसे समय पर सही इलाज मिल जाए। अधिकतर मरीजों को हाई फ्लो ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा जाता है। जरूरत पड़ने पर वेंटिलेटर पर भर्ती करते हैं। कम मात्रा की स्टेरॉयड और एंटीबायोटिक दवाएं चलाई जाती हैं। इस महीने 25 से 30 मरीज वायरल निमोनिया के अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं।
विज्ञापन
को-मॉर्बिड डिजीज वालों को खतरा ज्यादा
मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. जकी सिद्दीकी ने बताया कि को-मॉर्बिड डिजीज जैसे डायबिटीज, बीपी, सीओपीडी के अलावा मोटापा आदि का शिकार रोगियों को वायरल निमोनिया होने पर गंभीर होने का खतरा ज्यादा रहता है। अधिकतर मरीज जिन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखना पड़ा, वो पहले से ही को-मॉर्बिड बीमारी की चपेट में थे। इस बीमारी में पांच से दस प्रतिशत मरीजों की मौत होने की आशंका रहती है। मेडिकल कॉलेज में 50 से लेकर 80 फीसदी ऑक्सीजन के साथ वायरल निमोनिया के शिकार मरीज हो रहे हैं। इसमें युवा भी शामिल हैं।
विज्ञापन
ये समस्या तो डॉक्टर को दिखाएं
- चार दिन बाद भी बुखार न उतरे
- लगातार खांसी बन रहे
- सीने में दर्द होने लगे
- सांस फूलनी शुरू हो जाए
ये हैं मामले
केस-1
25 साल के युवक की ऑक्सीजन पहुंच गई 70
वायरल निमोनिया का शिकार 25 वर्षीय युवक को कई दिनों से 103 डिग्री बुखार बना हुआ था। भूख न लगने से खाना बंद कर दिया था। खांसी भी लगातार आ रही थी। सांस लेने में दिक्कत हुई तो डॉक्टर को दिखाया, तब जांच में ऑक्सीजन लेवल 70 प्रतिशत मिला। इलाज के बाद ठीक हो गया। उसे भी वायरल निमोनिया निकला।
केस-2
सांस फूलने लगी तब डॉक्टर को दिखाने पहुंचा
चिरगांव निवासी 42 वर्षीय युवक को छह-सात दिनों से बुखार बना हुआ था। मेडिकल स्टोर से दवाएं लेकर खाने के बाद भी सेहत में सुधार नहीं हुआ। सांस फूलने लगी तो डॉक्टर को दिखाने पहुंचा। जांच में ऑक्सीजन लेवल 40 प्रतिशत निकला। उसे तुरंत भर्ती कर ऑक्सीजन लगाई गई। जांच में वायरल निमोनिया बताया गया।