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40 डिग्री तापमान में रोजा रखकर लड़ रहे कोरोना से जंग
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पुलिया नम्बर नो में रोजा इफ्तार करते सोहेल मंसूरी का परिवार।
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झांसी। 15 घंटे का लंबा रोजा, 40 डिग्री तापमान और ऊपर से गर्म हवा परेशान कर रही है। इसके बाद भी महानगर में कई रोजेदार ऐसे हैं जो इस सब की परवाह किए बिना कोरोना की जंग में कंधे से कंधा मिलाकर लड़ रहे हैं। रोजा रखकर अपनी ड्यूटी इबादत समझकर कर रहे हैं। जब भी उनको मौका मिलता है वह नमाज अदा कर लेते हैं।
लॉकडाउन के बीच रमजान का महीना भी चल रहा है। पुलिस विभाग में कार्यरत कोरोना फाइटर्स रोजे के कड़े नियमों का पालन करते हुए भी कोविड-19 के खिलाफ जारी जंग में देश को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। 24 घंटे की ड्यूटी व भीषण गर्मी के बीच इस मौसम में दिनभर बीच सड़क पर कड़ी धूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन सभी मोर्चों पर डटे कोरोना वॉरियर्स पूरी मुस्तैदी से अपना फर्ज निभा रहे हैं। सभी का कहना है कि राष्ट्र किसी भी धर्म से बड़ा होता है। रोजा हमारा व्यक्तिगत मामला है, लेकिन कर्तव्य सर्वोपरि है।
- इंसान को अपना फर्ज याद हो तो धूप व गर्मी से कोई फर्क नहीं पड़ता। रोजा रखते हुए भी ड्यूटी करने मेें हमें कोई हर्ज नहीं है। इस संकट की घड़ी में नौकरी कर हमें फक्र हो रहा है। सुरक्षा के प्रति भी लोगोें को लगातार जागरूक कर रहा हूं। मतीन खान, निरीक्षक
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- रोजा और नौकरी दोनों ही फर्ज हैं। ऐसे में दोनों मुझसे जुदा नहीं हो सकते हैं। इसलिए दोनों को ही ईमानदारी से अदा कर रहा हूं। मेरी हॉटस्पॉट इलाके में ड्यूटी लगती है। लोगों को घर पर रहने के लिए प्रेरित करता हूं।
- मोहम्मद जमाल, एसआई
महामारी में लोग पुलिस की बात को समझें। हम जनता की सेवा के लिए ही धूप में चौराहाें पर ड्यूटी दे रहे हैं, ताकि जनता सुरक्षित रहे। बेवजह घूमने वाले लोगों को कोरोना की जानकारी देकर दिन भर घर भेजते रहते हैं। ड्यूूटी इसी तरह जारी रहेगी।
सद्दाम हुसैन, कांस्टेबल
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लॉकडाउन के बीच रमजान का महीना भी चल रहा है। पुलिस विभाग में कार्यरत कोरोना फाइटर्स रोजे के कड़े नियमों का पालन करते हुए भी कोविड-19 के खिलाफ जारी जंग में देश को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। 24 घंटे की ड्यूटी व भीषण गर्मी के बीच इस मौसम में दिनभर बीच सड़क पर कड़ी धूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन सभी मोर्चों पर डटे कोरोना वॉरियर्स पूरी मुस्तैदी से अपना फर्ज निभा रहे हैं। सभी का कहना है कि राष्ट्र किसी भी धर्म से बड़ा होता है। रोजा हमारा व्यक्तिगत मामला है, लेकिन कर्तव्य सर्वोपरि है।
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- इंसान को अपना फर्ज याद हो तो धूप व गर्मी से कोई फर्क नहीं पड़ता। रोजा रखते हुए भी ड्यूटी करने मेें हमें कोई हर्ज नहीं है। इस संकट की घड़ी में नौकरी कर हमें फक्र हो रहा है। सुरक्षा के प्रति भी लोगोें को लगातार जागरूक कर रहा हूं। मतीन खान, निरीक्षक
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- रोजा और नौकरी दोनों ही फर्ज हैं। ऐसे में दोनों मुझसे जुदा नहीं हो सकते हैं। इसलिए दोनों को ही ईमानदारी से अदा कर रहा हूं। मेरी हॉटस्पॉट इलाके में ड्यूटी लगती है। लोगों को घर पर रहने के लिए प्रेरित करता हूं।
- मोहम्मद जमाल, एसआई
महामारी में लोग पुलिस की बात को समझें। हम जनता की सेवा के लिए ही धूप में चौराहाें पर ड्यूटी दे रहे हैं, ताकि जनता सुरक्षित रहे। बेवजह घूमने वाले लोगों को कोरोना की जानकारी देकर दिन भर घर भेजते रहते हैं। ड्यूूटी इसी तरह जारी रहेगी।
सद्दाम हुसैन, कांस्टेबल