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झांसी: बिहार में बीयू की फर्जी डिग्री पर नौकरी पा चुके 38 अमीन भी हो चुके बर्खास्त
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्री लगाकर बिहार में नौकरी पाने वाले 38 अमीन भी बर्खास्त हो चुके हैं। अब वहां पर 2401 शिक्षकों की फर्जी डिग्री के तार भी विश्वविद्यालय से जुड़ सकते हैं। यहां पर फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने का बड़ा रैकेट कई दशकों से काम कर रहा है।
बीयू की डिग्री के आधार पर दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में लोग नौकरी कर रहे हैं। पिछले तीन सालों में जब से विश्वविद्यालय में ऑनलाइन सत्यापन शुरू हुआ है, तब से बीयू की फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी पाने वालों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। अब तक 400 लोगों के दस्तावेज फर्जी मिल चुके हैं। वहीं, बिहार में फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी पाने वाले 2401 शिक्षकों के खिलाफ गिरफ्तारी के आदेश हो गए हैं। इस प्रकरण के तार भी विश्वविद्यालय से जुड़ सकते हैं। क्योंकि, करीब दो साल पहले बीयू की सिविल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा लगाकर बिहार में कई अमीन नौकरी पा गए थे। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधीन परिमाप निदेशालय ने बीयू से इनके दस्तावेजों का सत्यापन कराया था। बीयू की तरफ से जवाब भेजा गया कि विश्वविद्यालय में सिविल इंजीनियरिंग विभाग ही नहीं है। ऐसे में अमीनों के फर्जी प्रमाणपत्र लगाने की पुष्टी हो गई। दिसंबर 2021 में सभी 38 अमीनों को बर्खास्त कर दिया गया था।
विश्वविद्यालय में अब सभी सत्यापन ऑनलाइन होते हैं। पिछले तीन सालों में करीब 400 लोगों के फर्जी दस्तावेज मिल चुके हैं। - राजबहादुर, परीक्षा नियंत्रक, बीयू।
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बीयू की डिग्री के आधार पर दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में लोग नौकरी कर रहे हैं। पिछले तीन सालों में जब से विश्वविद्यालय में ऑनलाइन सत्यापन शुरू हुआ है, तब से बीयू की फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी पाने वालों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। अब तक 400 लोगों के दस्तावेज फर्जी मिल चुके हैं। वहीं, बिहार में फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी पाने वाले 2401 शिक्षकों के खिलाफ गिरफ्तारी के आदेश हो गए हैं। इस प्रकरण के तार भी विश्वविद्यालय से जुड़ सकते हैं। क्योंकि, करीब दो साल पहले बीयू की सिविल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा लगाकर बिहार में कई अमीन नौकरी पा गए थे। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधीन परिमाप निदेशालय ने बीयू से इनके दस्तावेजों का सत्यापन कराया था। बीयू की तरफ से जवाब भेजा गया कि विश्वविद्यालय में सिविल इंजीनियरिंग विभाग ही नहीं है। ऐसे में अमीनों के फर्जी प्रमाणपत्र लगाने की पुष्टी हो गई। दिसंबर 2021 में सभी 38 अमीनों को बर्खास्त कर दिया गया था।
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विश्वविद्यालय में अब सभी सत्यापन ऑनलाइन होते हैं। पिछले तीन सालों में करीब 400 लोगों के फर्जी दस्तावेज मिल चुके हैं। - राजबहादुर, परीक्षा नियंत्रक, बीयू।
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