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Jhansi News: देश के 35 कुलपति बनाएंगे किसानों की दूनी आय का मास्टरप्लान

Sat, 08 Apr 2023 11:38 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 08 Apr 2023 11:38 PM IST
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35 vice chancellors of the country will make a masterplan to double the income of farmers
झांसी। कभी ओलावृष्टि तो कभी अतिवृष्टि। कभी कम बरसात भी फसलों की रंगत छीन लेती है। ऐसे में किसानों की आय दूनी करने की सभी योजनाओं पर पानी फिर जाता है। स्थिति यह है कि किसान लागत तक नहीं निकाल पाते। इन हालातों में खेती को किस तरह से समृद्ध किया जाए इस पर विचार हो रहा है। 8 अप्रैल को झांसी के कृषि विश्वविद्यालय में कुलपतियों के 11 वें मंथन शिविर में किसानों की आय दोगुनी और मौसम के बदलाव से निपटने का प्लान तैयार किया गया है। इसे केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा।
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रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित दो दिवसीय शिविर के अलग-अलग सत्रों में मृदा एवं जल प्रबंधन, जलवायु अनुकूल लचीली कृषि पद्धतियों के प्रयोग, कृषि में नवाचार आदि विषयों पर मंथन हुआ। इस दौरान डा. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. पीएस पांडेय ने कृषि में ड्रोन, रोबाेटिक्स, रिमोट सेंसिंग आदि तकनीकों के इस्तेमाल पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में आने वाले कल की चुनौतियों का समाधान इन तकनीकों के माध्यम से आसानी से किया जा सकता है। इस दौरान महाराष्ट्र के महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ राहुरी के कुलपति डा. इंद्रमणि मिश्रा, सरदार बल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय मेरठ के कुलपति डा. केके सिंह, जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. पीएम चौहान, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय इंफाल के अधिष्ठाता डा. आईएन सिंह ने भी अपने विचार रखे।
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कृषि विश्वविद्यालय झांसी के निदेशक डा. अनिल कुमार ने कृषि क्षेत्र में नैनो बायोटेेक्नोलॉजी के उपयोग पर चर्चा की। शिविर में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय इंफाल के कुलपति डा. अनुपम मिश्रा, हैदराबाद के केंद्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डा. वीके सिंह, कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड के सदस्य डा. बीएस द्विवेदी आदि ने भी अपने विचार साझा किए। कृषि विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष डा. रामेश्वर सिंह ने दो दिवसीय शिविर का व्याख्यान प्रस्तुत किया। कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. अशोक कुमार सिंह ने सभी कुलपतियों को स्मृति चिह्न भेंट किया। कुलाधिपति डा. पंजाब सिंह ने शिविर के प्रमुख निष्कर्षों पर अपना वक्तव्य दिया।
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इस मौके पर कुलसचिव डा. मुकेश श्रीवास्तव समेत डा. एसएस सिंह, डा. एसके चतुर्वेदी, डा. वीपी सिंह, डा. वीके बेहरा, डा. अमरेश चंद्रा, डा. तनुज मिश्रा आदि मौजूद रहे। डा. एसएस कुशवाहा ने संचालन किया। आभार कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक शोध डा. एआर शर्मा व विश्वविद्यालय संघ के सचिव डा. दिनेश कुमार ने जताया।



पांच साल में मोटे अनाज का हब बन जाएगा बुंदेलखंड: डा. डेका

झांसी। असम कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. विद्युत सी डेका ने अमर उजाला से हुई बातचीत में कहा कि आने वाले पांच सालों में बुंदेलखंड मोटे अनाज के उत्पादन का देश का बड़ा हब बन जाएगा। यहां की मिट्टी और वातावरण मोटे अनाज के उत्पादन के एकदम अनुकूल है। इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स के जरिये इसका प्रचार-प्रसार शुरू हुआ है। वर्तमान में मोटे अनाज की प्रोसेसिंग की मशीनरी का अभाव है। लेकिन, यह उत्पादन बढ़ने के साथ दूर हो जाएगा। विशेषज्ञ मोटे अनाज की उन्नत किस्में तैयार करने का काम कर रहे हैं।




कीटों को भी नुकसान पहुंचा रहा जलवायु परिवर्तन: प्रो. परविंदर
झांसी। वीर चंद्र सिंह गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. परविंदर कौशल ने कहा कि तापमान में एक डिग्री का बदलाव भी फसलों को प्रभावित करता है। इसके अलावा वातावरण में आए बदलाव से कृषि मित्र कीटों को भी नुकसान पहुंचता है। हालांकि, जलवायु परिवर्तन को रोका नहीं जा सकता, लेकिन कृषि की पद्धतियों में बदलाव कर इस चुनौती का समाधान किया जा सकता है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि कोविड के बाद लोग सेहत के प्रति जागरूक हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में मोटे अनाज की स्वत: मांग बढ़ेगी, क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक है।
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