{"_id":"62449a14b524f10a1e448dc3","slug":"30-prisoners-studying-day-and-night-in-jhansi-jail-barracks-jhansi-news-jhs217692196","type":"story","status":"publish","title_hn":"झांसी जेल की बैरकों में दिन रात पढ़ाई कर परीक्षा दे रहे 30 बंदी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
झांसी जेल की बैरकों में दिन रात पढ़ाई कर परीक्षा दे रहे 30 बंदी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। परीक्षाओं के इस सीजन में जिला कारागार के अंदर भी इम्तिहान की तैयारियां चल रही हैं। कोई स्नातक की तैयारी कर रहा है तो कोई बारहवीं की। दो बंदियों ने तो फूड न्यूट्रीशियन का कोर्स करने के लिए दाखिला लिया है। जेल प्रशासन का कहना है कि 30 बंदी अलग अलग कोर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। दो बंदी तो ऐसे हैं जिन्होंने सलाओं के पीछे रहते रहते ही स्नातक तक की पढ़ाई कर रही है। जब यह जेल आए थे तब आठवीं पास थे।
शिक्षा से ही जीवन में बदलाव लाया जा सकता है। इसके लिए जेल में बंदियों को पढ़ाई लिखाई के लिए प्रेरित किया जाता है। इसका असर भी अब देखने को मिलने लगा है। जेल प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक 9 बंदी कक्षा पांच की पढ़ाई कर रहे जबकि 9 बंदी कक्षा आठ तक पहुंच चुके हैं। इनकी परीक्षा डीसी तालपुरा विद्यालय के माध्यम से कराई जा रही है। इग्नू के माध्यम से स्नातक स्तर पर 10 बंदी पढ़ाई कर रहे हैं। इनकी भी परीक्षाएं शुरू होनी है। एक बंदी एमए की पढ़ाई कर रहा है जबकि दो छात्रों ने हाल में ही फूड न्यूट्रीशियन कोर्स में दाखिला लिया।
आजीवन कारावास काट रहे दो युवक कर रहे स्नातक की पढ़ाई
आजीवन कारावास से दंडित दो युवक भी अपनी पढ़ाई पूरी करने में जुटे हैं। जेल प्रशासन के मुताबिक पप्पू पुत्र सरू यहां आने से पहले सिर्फ हाईस्कूल पास था। उसने यहीं से बारहवीं पास की। उसके बाद उसने इग्नू से स्नातक की पढ़ाई शुरू की। अब वह स्नातक द्वितीय वर्ष में पहुंच गया है। इसी तरह ओमकार पुत्र भूरे भी यहां आने से पहले हाईस्कूल पास था। उसके बाद उसने भी इंटर कर लिया और अब स्नातक द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा है।
विज्ञापन
अगर बंदी पढ़ाई आगे जारी रखना चाहता है तब इसमें उसकी मदद की जाती है। प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्रों की परीक्षाएं जेल में ही कराई गईं।
रंग बहादुर पटेल, वरिष्ठ जेल अधीक्षक
विज्ञापन
शिक्षा से ही जीवन में बदलाव लाया जा सकता है। इसके लिए जेल में बंदियों को पढ़ाई लिखाई के लिए प्रेरित किया जाता है। इसका असर भी अब देखने को मिलने लगा है। जेल प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक 9 बंदी कक्षा पांच की पढ़ाई कर रहे जबकि 9 बंदी कक्षा आठ तक पहुंच चुके हैं। इनकी परीक्षा डीसी तालपुरा विद्यालय के माध्यम से कराई जा रही है। इग्नू के माध्यम से स्नातक स्तर पर 10 बंदी पढ़ाई कर रहे हैं। इनकी भी परीक्षाएं शुरू होनी है। एक बंदी एमए की पढ़ाई कर रहा है जबकि दो छात्रों ने हाल में ही फूड न्यूट्रीशियन कोर्स में दाखिला लिया।
विज्ञापन
आजीवन कारावास काट रहे दो युवक कर रहे स्नातक की पढ़ाई
आजीवन कारावास से दंडित दो युवक भी अपनी पढ़ाई पूरी करने में जुटे हैं। जेल प्रशासन के मुताबिक पप्पू पुत्र सरू यहां आने से पहले सिर्फ हाईस्कूल पास था। उसने यहीं से बारहवीं पास की। उसके बाद उसने इग्नू से स्नातक की पढ़ाई शुरू की। अब वह स्नातक द्वितीय वर्ष में पहुंच गया है। इसी तरह ओमकार पुत्र भूरे भी यहां आने से पहले हाईस्कूल पास था। उसके बाद उसने भी इंटर कर लिया और अब स्नातक द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा है।
विज्ञापन
अगर बंदी पढ़ाई आगे जारी रखना चाहता है तब इसमें उसकी मदद की जाती है। प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्रों की परीक्षाएं जेल में ही कराई गईं।
रंग बहादुर पटेल, वरिष्ठ जेल अधीक्षक