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हेलमेट न लगाने से सड़क दुर्घटना में गवां चुके 23 लोग जान
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झांसी। सड़क दुर्घटना के दौरान हेल्मेट न लगाने से 23 लोग पिछले डेढ़ साल के भीतर अपनी जान गवां चुके। इन सभी की मौत दुर्घटना के दौरान सिर पर लगी घातक चोट के चलते हुई। इनके सिर पर अगर गंभीर जख्म नहीं होते तब इनकी जान बच सकती थी।
शुक्रवार से सड़क सुरक्षा सप्ताह आरंभ हो गया लेकिन, यह महज रस्मी नजर आता है। हेल्मेट न लगाने वालों को चालान का अल्टीमेटम दिया जाता है लेकिन, हकीकत में इसका कोई असर नहीं दिखता। पुलिस अफसरों का भी मानना है कि अधिकतम पांच फीसद दोपहिया वाहन सवार ही हेल्मेट का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, पुलिस विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले वर्ष 2020 से अब तक कुल 163 मार्ग दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 71 लोगों की मौत हो गई। इनमें से 23 लोगों की सिर पर गंभीर चोट लगने से मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक इनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात कॉमन है कि मार्ग दुर्घटना के दौरान सड़क की सीधी चोट अथवा वहां फैली गिट्टी आदि से सिर पर घातक चोट लगी। इससे अत्याधिक खून बह जाने एवं घायल के कोमा में चले जाने से इनकी मौत हो गई। मरने वालों में अधिकांश 25-42 साल के बीच के युवा हैं। सबसे अधिक युवा ही हेल्मेट लगाने से परहेज करते हैं। इसी तरह ओवर स्पीड एवं नशे की हालत में बाइक चलाने से भी सबसे अधिक दुर्घटनाएं होती हैं लेकिन, पुलिस का इन पर कोई अंकुश नहीं है। हेल्मेट न पहनने वालों के नियमित चालान भी नहीं होते। सिर्फ सड़क सुरक्षा सप्ताह के समय ही ऐसे अभियान चलाए जाते हैं। हालांकि सीओ सिटी राजेश सिंह का कहना है कि हेल्मेट न लगाने वालों के चालान की कार्रवाई नियमित होती है। रोजाना सौ-डेढ़ सौ चालान होते हैं। उनका कहना है कि सख्ती बढ़ाई जाएगी।
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शुक्रवार से सड़क सुरक्षा सप्ताह आरंभ हो गया लेकिन, यह महज रस्मी नजर आता है। हेल्मेट न लगाने वालों को चालान का अल्टीमेटम दिया जाता है लेकिन, हकीकत में इसका कोई असर नहीं दिखता। पुलिस अफसरों का भी मानना है कि अधिकतम पांच फीसद दोपहिया वाहन सवार ही हेल्मेट का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, पुलिस विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले वर्ष 2020 से अब तक कुल 163 मार्ग दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 71 लोगों की मौत हो गई। इनमें से 23 लोगों की सिर पर गंभीर चोट लगने से मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक इनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात कॉमन है कि मार्ग दुर्घटना के दौरान सड़क की सीधी चोट अथवा वहां फैली गिट्टी आदि से सिर पर घातक चोट लगी। इससे अत्याधिक खून बह जाने एवं घायल के कोमा में चले जाने से इनकी मौत हो गई। मरने वालों में अधिकांश 25-42 साल के बीच के युवा हैं। सबसे अधिक युवा ही हेल्मेट लगाने से परहेज करते हैं। इसी तरह ओवर स्पीड एवं नशे की हालत में बाइक चलाने से भी सबसे अधिक दुर्घटनाएं होती हैं लेकिन, पुलिस का इन पर कोई अंकुश नहीं है। हेल्मेट न पहनने वालों के नियमित चालान भी नहीं होते। सिर्फ सड़क सुरक्षा सप्ताह के समय ही ऐसे अभियान चलाए जाते हैं। हालांकि सीओ सिटी राजेश सिंह का कहना है कि हेल्मेट न लगाने वालों के चालान की कार्रवाई नियमित होती है। रोजाना सौ-डेढ़ सौ चालान होते हैं। उनका कहना है कि सख्ती बढ़ाई जाएगी।
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