{"_id":"59b40bb74f1c1be37f8b5760","slug":"21504971703-jhansi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"व्यापारियों के लिए मुसीबत बने सिक्के, नहीं ले रहे बैंक-City","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
व्यापारियों के लिए मुसीबत बने सिक्के, नहीं ले रहे बैंक-City
Updated Sat, 09 Sep 2017 09:11 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो
----
व्यापारियों के लिए मुसीबत बने सिक्के, नहीं ले रहे बैंक
ब्लाक हो रही पूंजी, नहीं निकल रहा समस्या का हल
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
बैंकों में सिक्के जमा न होने से दुकानदार और बड़े व्यापारी बाजार में ही उनको एक-दूसरे को थमाकर बोझ कम करने में लगे हैं। कई व्यापारियों के पास तो लाखों के सिक्के एकत्रित हो गए हैं। इससे उनकी पूंजी फंस गई हैं। जबकि, रिजर्व बैंक ने सिक्के जमा करने के लिए अलग काउंटर खोलने की गाइड लाइन जारी की थी, मगर उस पर कोई भी बैंक अमल नहीं कर रहा है। सभी स्टाफ की कमी बताकर अलग काउंटर खोलने से बच रहे हैं।
इन दिनों व्यापारियों के लिए एक, दो, पांच और दस के सिक्के परेशानी का कारण बने हुए हैं। दरअसल, थोक व्यापारी अपने से छोटे दुकानदारों को माल देते हैं। दुकानदार बड़े नोटों के साथ सिक्के भी भुगतान में देते हैं। महानगर समेत जनपद में करीब पंजीकृत 11 हजार और अपंजीकृत करीब 40 हजार छोटे दुकानदार हैं, जो बड़े और मझोले व्यापारियों के पास माल की खरीद का पैसा भेजते हैं। व्यापारियों को प्रांत अंदर और बाहर से माल मंगाने के लिए पेमेंट बैंक से ही भेजना पड़ता है। व्यापारियों का आरोप है कि बैंक कर्मचारी सिक्के लेने में आनाकानी करते हैं। इससे उनके पास सिक्कों की भरमार होती जा रही हैं। हालांकि, वे बाजार में ही सिक्कों को खपाने की पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन हर कोई सिक्के लेने को तैयार नहीं होता हैं। मजबूरी में व्यापारी अपने कर्मचारियों को वेतन भी सिक्कों में दे रहे हैं, ताकि कुछ तो राहत बनी रहे।
‘बैंक में सिक्के जमा करने के लिए कोई मनाही नहीं है। बशर्ते एक सीमा में जमा करें न कि बोरी भरकर ले आएं। जमा करने की जगह उनका बाजार में उपयोग करें, क्योंकि सिक्के सभी की जरूरत हैं। रिजर्व बैंक ने अलग काउंटर खोलने के निर्देश तब दिए थे जब बाजार में सिक्के नहीं थे।’
विज्ञापन
आरआर प्रसाद, बैंक मैनेजर, भारतीय स्टेट बैंक मुख्य शाखा।
फोटो
तकादे में मिलते हैं सिक्के
मेरे कर्मचारी तकादे (उधारी के रुपये लेने) के लिए महानगर के अलावा जनपद के सभी कस्बों में जाते हैं। दुकानदार उनको सिक्के थमा देते हैं। बैंक में सिक्के लिए नहीं जा रहे हैं। इससे लाखों के सिक्के इकट्ठा हो गए हैं। सिक्कों से पूंजी फंस रही हैं। बैंक में तो दस गड्डी से ज्यादा नोट जमा करने तक में प्रत्येक गड्डी पर दस रुपये कैश हैंडलिंग चार्ज लिया जाता है। सिक्के जमा करने के लिए बैंक में अलग काउंटर खुलना चाहिए।
अरुण गुप्ता, फुटवियर कारोबारी।
फोटो
मना करने पर पड़ रहा बिक्री पर असर
मेरे व्यापार में हर दूसरे दिन बैंक में कैश बैंक में जमा करना पड़ता है। बैंक रेजगारी (सिक्के) ले नहीं रहे हैं, इससे पैसा ब्लाक हो रहा है। अगर वे ग्राहक से सिक्के लेना बंद कर दें तो इसका सीधा असर कारोबार पर पड़ेगा। दूसरा, दस के सिक्कों में असली- नकली की भी भ्रांति भी फैली हुई हैं। इससे लोग दस के सिक्के लेने से भी बचते हैं।
संजय सराफ, चीनी कारोबारी।
विज्ञापन
----
व्यापारियों के लिए मुसीबत बने सिक्के, नहीं ले रहे बैंक
ब्लाक हो रही पूंजी, नहीं निकल रहा समस्या का हल
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
बैंकों में सिक्के जमा न होने से दुकानदार और बड़े व्यापारी बाजार में ही उनको एक-दूसरे को थमाकर बोझ कम करने में लगे हैं। कई व्यापारियों के पास तो लाखों के सिक्के एकत्रित हो गए हैं। इससे उनकी पूंजी फंस गई हैं। जबकि, रिजर्व बैंक ने सिक्के जमा करने के लिए अलग काउंटर खोलने की गाइड लाइन जारी की थी, मगर उस पर कोई भी बैंक अमल नहीं कर रहा है। सभी स्टाफ की कमी बताकर अलग काउंटर खोलने से बच रहे हैं।
इन दिनों व्यापारियों के लिए एक, दो, पांच और दस के सिक्के परेशानी का कारण बने हुए हैं। दरअसल, थोक व्यापारी अपने से छोटे दुकानदारों को माल देते हैं। दुकानदार बड़े नोटों के साथ सिक्के भी भुगतान में देते हैं। महानगर समेत जनपद में करीब पंजीकृत 11 हजार और अपंजीकृत करीब 40 हजार छोटे दुकानदार हैं, जो बड़े और मझोले व्यापारियों के पास माल की खरीद का पैसा भेजते हैं। व्यापारियों को प्रांत अंदर और बाहर से माल मंगाने के लिए पेमेंट बैंक से ही भेजना पड़ता है। व्यापारियों का आरोप है कि बैंक कर्मचारी सिक्के लेने में आनाकानी करते हैं। इससे उनके पास सिक्कों की भरमार होती जा रही हैं। हालांकि, वे बाजार में ही सिक्कों को खपाने की पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन हर कोई सिक्के लेने को तैयार नहीं होता हैं। मजबूरी में व्यापारी अपने कर्मचारियों को वेतन भी सिक्कों में दे रहे हैं, ताकि कुछ तो राहत बनी रहे।
विज्ञापन
‘बैंक में सिक्के जमा करने के लिए कोई मनाही नहीं है। बशर्ते एक सीमा में जमा करें न कि बोरी भरकर ले आएं। जमा करने की जगह उनका बाजार में उपयोग करें, क्योंकि सिक्के सभी की जरूरत हैं। रिजर्व बैंक ने अलग काउंटर खोलने के निर्देश तब दिए थे जब बाजार में सिक्के नहीं थे।’
विज्ञापन
आरआर प्रसाद, बैंक मैनेजर, भारतीय स्टेट बैंक मुख्य शाखा।
फोटो
तकादे में मिलते हैं सिक्के
मेरे कर्मचारी तकादे (उधारी के रुपये लेने) के लिए महानगर के अलावा जनपद के सभी कस्बों में जाते हैं। दुकानदार उनको सिक्के थमा देते हैं। बैंक में सिक्के लिए नहीं जा रहे हैं। इससे लाखों के सिक्के इकट्ठा हो गए हैं। सिक्कों से पूंजी फंस रही हैं। बैंक में तो दस गड्डी से ज्यादा नोट जमा करने तक में प्रत्येक गड्डी पर दस रुपये कैश हैंडलिंग चार्ज लिया जाता है। सिक्के जमा करने के लिए बैंक में अलग काउंटर खुलना चाहिए।
अरुण गुप्ता, फुटवियर कारोबारी।
फोटो
मना करने पर पड़ रहा बिक्री पर असर
मेरे व्यापार में हर दूसरे दिन बैंक में कैश बैंक में जमा करना पड़ता है। बैंक रेजगारी (सिक्के) ले नहीं रहे हैं, इससे पैसा ब्लाक हो रहा है। अगर वे ग्राहक से सिक्के लेना बंद कर दें तो इसका सीधा असर कारोबार पर पड़ेगा। दूसरा, दस के सिक्कों में असली- नकली की भी भ्रांति भी फैली हुई हैं। इससे लोग दस के सिक्के लेने से भी बचते हैं।
संजय सराफ, चीनी कारोबारी।