फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   ऊंचे दामों में बिक रही बालू-Lalitpur

ऊंचे दामों में बिक रही बालू-Lalitpur

Fri, 07 Jul 2017 07:43 PM IST
Updated Fri, 07 Jul 2017 07:43 PM IST
विज्ञापन
ऊंचे दामों में बिक रही बालू-Lalitpur
एक डंपर बालू की कीमत 40 हजार
विज्ञापन

सब हेड: तीस सितंबर तक खनन बंद होने से बनी स्थिति
क्रासर:
अब मध्यप्रदेश से आ रही गाड़ियां भरकर, तीन गुने से अधिक बढ़े दाम
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
बाजार में बालू की कीमत 12 हजार से बढ़कर 40 हजार रुपये प्रति डंपर हो गई है। दरअसल शासन ने तीस सितंबर तक घाटों पर बालू का खनन बंद कर दिया गया है। इस समय मध्यप्रदेश के घाटों से बालू लाई जा रही है, जो लोगों को तीन गुने से भी अधिक दामों में मिल रही है। बालू के दाम बढ़ने से निर्माण कार्यों की लागत पर भी इसका असर पड़ रहा है।
योगी सरकार बनने के बाद मार्च में बालू के अवैध खनन पर रोक लगा दी गई थी। बालू की कमी से सभी सरकारी और गैर सरकारी निर्माण कार्य बंद होे गए थे। इस दौरान मध्य प्रदेश से बालू आ रहा था, उसकी कीमत अधिक होने के कारण लोगों के बजट से बाहर थी। नए टेंडर होने के बाद जून में घाटों से बालू का खनन शुरू हुआ तो लोगों ने राहत की सांस ली। 300 फीट बालू भरा डंपर 12 हजार रुपये का मिल रहा था। ट्रैक्टर ट्राली 1800 से 2000 रुपये की पड़ रही थी, लेकिन शासन ने बारिश के चलते 01 जुलाई से 30 सितंबर तक बालू का खनन कार्य बंद कराने के निर्देश दे दिए हैं। इससे बालू का आना फिर बंद हो गया है।
विज्ञापन

कुछ खनन ठेकेदार मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ के विजयपुर और परेछा घाट से बालू ला रहे हैं, जिसकी वे मुंहमांगी कीमत वसूल रहे हैं। कानपुर चुंगी पर तीन सौ फुट बालू से भरे डंपर की कीमत 40 हजार रुपये मांगी जा रही है। अगर डंपर में 400 फुट तक माल है तो उसके 45 हजार रुपये तक लिए जा रहे हैं। डंपर मालिकों का कहना है कि वे जीएसटी देकर बालू झांसी तक ला रहे हैं। भाड़ा भी ज्यादा लग रहा है। इससे बालू महंगे दामों में बेच रहे हैं। हालांकि, उनकी इस मनमानी पर महानगर में निर्माण कार्य बंद होना शुरू हो गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


30 हजार से अधिक परिवार प्रभावित
महानगर में निर्माण कार्य बंद होने से तीस हजार से अधिक परिवार प्रभावित हो रहे हैं। इसमें निर्माण कार्य से जुड़े राजमिस्त्री, बेलदार, शटरिंग मजदूर, बालू और ईंट ढोने वाले मजदूर, पुटीन और पेंटिंग करने वाले कारीगर, छोटे सीमेंट कारोबारी, बिल्डिंग मैटेरियल एक जगह से दूसरी जगह ले जाने वाले ट्रैक्टर चालकों के परिवार शामिल हैं।

फोटो
उधारी भी नहीं चुका सके
मैंने पहले तीन महीने काम बंद रहने पर उधार लेकर परिवार चलाया था। उधार चुका भी नहीं पाया था कि अब फिर बालू न आने से काम मिलना बंद हो गया है। समझ नहीं आ रहा है कि अब तीन बच्चों के साथ परिवार कैसे चलाऊंगा।
मनोज रायकवार, राजमिस्त्री।

फोटो
पहली बार झेल रहे ऐसा संकट
मेरी मजदूरी से ही परिवार चल रहा है। मेरे चार बच्चे हैं। घर चलाना पहले ही मुश्किल होता था। बालू की कमी से ठेकेदार ने काम बंद कर दिया है। ऐसे संकट का सामना पहली बार करना पड़ रहा है।
कमलेश प्रजापति, राजमिस्त्री।

फोटो
नहीं मिल रहा भाड़ा
मुझे ट्रैक्टर ट्राली बालू, ईट और अन्य बिल्डिंग मैटेरियल एक जगह से दूसरे जगह डालने में अच्छा भाड़ा मिल जाता था। बालू न आने से कोई अन्य बिल्डिंग मैटेरियल का माल भी नहीं मंगा रहा है। इससे मैं तो परेशान हूं ही, मेरे मजदूरों के समक्ष भी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

लखन प्रजापति, ट्रैक्टर चालक

फोटो
इतनी महंगी बालू कैसे खरीदे?
इतनी महंगी बालू खरीदकर तो उल्टा गांठ के पैसे लग जाएंगे। मालिक भी महंगी बालू लगवाने के लिए तैयार नहीं हैं। इस कारण मैंने अपने सभी निर्माण कार्य रोक दिए हैं। प्रशासन को इस मनमानी पर रोक लगाना चाहिए।
पवन तिवारी, बिल्डिंग ठेकेदार।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed