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10 साल में बंद हो गईं 184 औद्योगिक इकाइयां
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झांसी। क्षेत्र का पिछड़ापन दूर करने के लिए यहां औद्योगिक विकास के दावे और वादे तो खूब किए जाते हैं, लेकिन ये कभी धरातल पर नहीं उतर पाए। इसका अंदाजा बिजौली औद्योगिक क्षेत्र और ग्रोथ सेंटर को देखकर लगाया जा सकता है, जहां स्थापना के दशकों बाद भी सन्नाटा पसरा रहता है। हालात ये हैं कि औद्योगिक इकाइयां बढ़ना तो दूर की बात, पिछले दस साल के भीतर 184 इकाइयां बंद हो चुकी हैं।
चार दशक पहले ललितपुर मार्ग पर बिजौली में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना की गई थी। इसके बाद ग्रोथ सेंटर स्थापित किया गया था। सड़क और रेल मार्ग से देश के किसी भी हिस्से से बेहतर कनेक्टिविटी की वजह से यहां तेजी से औद्योगिक विकास की उम्मीद जताई जा रही थी। शुरुआत में परिणाम आशा के अनुरूप रहे। तेजी से औद्योगिक इकाइयों की स्थापना हुई, जिससे दोनों ही औद्योगिक क्षेत्र गुलजार हो उठे। एक समय बिजौली औद्योगिक क्षेत्र में 254 इकाइयां संचालित थीं, लेकिन, पिछले 10 सालों के भीतर 133 इकाइयां बंद हो चुकी हैं। वर्तमान में 121 इकाइयां ही संचालित हैं। कमोबेश यही स्थिति ग्रोथ सेंटर की भी है। 400 एकड़ में विकसित किए ग्रोथ सेेंटर के फेज वन के 90 भूखंडों में से 75 आवंटित किए गए। इनमें से 25 इकाइयां बंद हो गईं, जबकि 43 संचालित हैं। फेज टू में 208 भूखंड स्थापित किए गए, जिनमें से 128 का ही आवंटन हुआ। इस समय फेज टू की 26 इकाइयां बंद पड़ी हुई हैं।
साढ़े पांच हजार हाथों से छिना काम
झांसी। बिजौली में प्लास्टिक, सरिया, कॉपी - किताब, हवाई चप्पल, ब्रिक्स आदि के साथ-साथ कई ऐसी इकाइयां संचालित थीं, जो बीएचईएल और रेलवे को छोटे उपकरणों की आपूर्ति करती थीं। इनमें से कुछ इकाइयां चल रही हैं, जबकि ज्यादातर अपना काम समेट चुकी हैं। औसतन प्रत्येक इकाई में लगभग तीस कर्मचारी कार्यरत थे। ऐसे में 184 इकाइयों के बंद होने से सीधे तौर पर साढ़े पांच हजार लोग बेरोजगार हुए हैं। इसके अलावा जब यहां कर्मचारियों की संख्या अधिक थी, तो आसपास का पूरा इलाका भी गुलजार हो उठा था। कोई किराये के कमरे चलाता था, तो भोजन उपलब्ध कराता था। ठेले - खोमचों की भरमार रहती थी। लेकिन, कर्मचारी न होने की वजह इन छोटे कारोबारियों का रोजगार भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।
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स्थानीय इकाइयों को नहीं मिल रहे ऑर्डर
झांसी। उद्यमियों के अनुसार बिजौली में स्थापित की गईं ज्यादातर इकाइयां बीएचईएल व रेलवे पर निर्भर थीं। ये इकाइयां इन दोनों महकमों के छोटे उपकरण तैयार करती थीं। अच्छे ऑर्डर मिलते थे और कारखाने चलते रहते थे। लेकिन, पिछले कुछ सालों के दरम्यान दोनों ही महकमों से ऑर्डर न के बराबर ही मिल रहे हैं। ऐसे में इकाइयां एक के बाद एक बंद होती चली जा रही हैं।
मूलभूत सुविधाओं का भी है अभाव
झांसी। औद्योगिक क्षेत्र और ग्रोथ सेंटर में मूलभूत सुविधाओं तक का टोटा है। शाम से ही यहां अंधेरा अपने पैर जमा लेता है। स्ट्रीट लाइट तक नहीं जलतीं। इसके अलावा पानी तक का यहां भारी अभाव है। कई औद्योगिक इकाइयों में तो पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। उद्यमियों की ओर से कई बार इस मुद्दे को उठाया जा चुका है। लेकिन, उद्यमियों को अभी भी समाधान का इंतजार है।
क्षेत्र की ज्यादातर औद्योगिक इकाइयां बीएचईएल व रेलवे पर निर्भर थीं। लेकिन, अब दोनों ही महकमों से स्थानीय इकाइयों को ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों के बंद होने का एक बड़ा कारण ये है।
- राजेश शर्मा, अध्यक्ष - चैंबर ऑफ स्मॉल एंड माइक्रो इंडस्ट्रीज
सरकार की ओर से तो प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं, लेकिन लोग उद्योग लगाने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। क्षेत्र में औद्योगिक माहौल न होने की वजह से ये स्थिति बनी हुई है। लोग तब ही आगे आएंगे, जब उन्हें माहौल मिलेगा।
- धीरज खुल्लर, अध्यक्ष - बुंदेलखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
क्षेत्र में पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं तक का अभाव है। ऐसे में उद्यम कैसे पनप सकते हैं। इसके अलावा स्थानीय बड़े उद्यम छोटी स्थानीय इकाइयों को तरजीह नहीं देते। इसका का भी प्रतिकूल असर है।
- सुरिंदर सिंह अरोरा, उपाध्यक्ष - चैंबर ऑफ स्मॉल एंड माइक्रो इंडस्ट्रीज
स्थानीय उत्पादों को ग्लोबल बनाने के लिए माहौल भी देना होगा। ये तो तय होना ही चाहिए कि बड़े उद्यम स्थानीय छोटे उद्यमियों से एक निर्धारित मात्रा में अनिवार्य रूप से माल लें। तब ही औद्योगिक माहौल बनेगा।
- साकेत गुप्ता, सचिव - चैंबर ऑफ स्मॉल एंड माइक्रो इंडस्ट्रीज
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चार दशक पहले ललितपुर मार्ग पर बिजौली में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना की गई थी। इसके बाद ग्रोथ सेंटर स्थापित किया गया था। सड़क और रेल मार्ग से देश के किसी भी हिस्से से बेहतर कनेक्टिविटी की वजह से यहां तेजी से औद्योगिक विकास की उम्मीद जताई जा रही थी। शुरुआत में परिणाम आशा के अनुरूप रहे। तेजी से औद्योगिक इकाइयों की स्थापना हुई, जिससे दोनों ही औद्योगिक क्षेत्र गुलजार हो उठे। एक समय बिजौली औद्योगिक क्षेत्र में 254 इकाइयां संचालित थीं, लेकिन, पिछले 10 सालों के भीतर 133 इकाइयां बंद हो चुकी हैं। वर्तमान में 121 इकाइयां ही संचालित हैं। कमोबेश यही स्थिति ग्रोथ सेंटर की भी है। 400 एकड़ में विकसित किए ग्रोथ सेेंटर के फेज वन के 90 भूखंडों में से 75 आवंटित किए गए। इनमें से 25 इकाइयां बंद हो गईं, जबकि 43 संचालित हैं। फेज टू में 208 भूखंड स्थापित किए गए, जिनमें से 128 का ही आवंटन हुआ। इस समय फेज टू की 26 इकाइयां बंद पड़ी हुई हैं।
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साढ़े पांच हजार हाथों से छिना काम
झांसी। बिजौली में प्लास्टिक, सरिया, कॉपी - किताब, हवाई चप्पल, ब्रिक्स आदि के साथ-साथ कई ऐसी इकाइयां संचालित थीं, जो बीएचईएल और रेलवे को छोटे उपकरणों की आपूर्ति करती थीं। इनमें से कुछ इकाइयां चल रही हैं, जबकि ज्यादातर अपना काम समेट चुकी हैं। औसतन प्रत्येक इकाई में लगभग तीस कर्मचारी कार्यरत थे। ऐसे में 184 इकाइयों के बंद होने से सीधे तौर पर साढ़े पांच हजार लोग बेरोजगार हुए हैं। इसके अलावा जब यहां कर्मचारियों की संख्या अधिक थी, तो आसपास का पूरा इलाका भी गुलजार हो उठा था। कोई किराये के कमरे चलाता था, तो भोजन उपलब्ध कराता था। ठेले - खोमचों की भरमार रहती थी। लेकिन, कर्मचारी न होने की वजह इन छोटे कारोबारियों का रोजगार भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।
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स्थानीय इकाइयों को नहीं मिल रहे ऑर्डर
झांसी। उद्यमियों के अनुसार बिजौली में स्थापित की गईं ज्यादातर इकाइयां बीएचईएल व रेलवे पर निर्भर थीं। ये इकाइयां इन दोनों महकमों के छोटे उपकरण तैयार करती थीं। अच्छे ऑर्डर मिलते थे और कारखाने चलते रहते थे। लेकिन, पिछले कुछ सालों के दरम्यान दोनों ही महकमों से ऑर्डर न के बराबर ही मिल रहे हैं। ऐसे में इकाइयां एक के बाद एक बंद होती चली जा रही हैं।
मूलभूत सुविधाओं का भी है अभाव
झांसी। औद्योगिक क्षेत्र और ग्रोथ सेंटर में मूलभूत सुविधाओं तक का टोटा है। शाम से ही यहां अंधेरा अपने पैर जमा लेता है। स्ट्रीट लाइट तक नहीं जलतीं। इसके अलावा पानी तक का यहां भारी अभाव है। कई औद्योगिक इकाइयों में तो पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। उद्यमियों की ओर से कई बार इस मुद्दे को उठाया जा चुका है। लेकिन, उद्यमियों को अभी भी समाधान का इंतजार है।
क्षेत्र की ज्यादातर औद्योगिक इकाइयां बीएचईएल व रेलवे पर निर्भर थीं। लेकिन, अब दोनों ही महकमों से स्थानीय इकाइयों को ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों के बंद होने का एक बड़ा कारण ये है।
- राजेश शर्मा, अध्यक्ष - चैंबर ऑफ स्मॉल एंड माइक्रो इंडस्ट्रीज
सरकार की ओर से तो प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं, लेकिन लोग उद्योग लगाने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। क्षेत्र में औद्योगिक माहौल न होने की वजह से ये स्थिति बनी हुई है। लोग तब ही आगे आएंगे, जब उन्हें माहौल मिलेगा।
- धीरज खुल्लर, अध्यक्ष - बुंदेलखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
क्षेत्र में पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं तक का अभाव है। ऐसे में उद्यम कैसे पनप सकते हैं। इसके अलावा स्थानीय बड़े उद्यम छोटी स्थानीय इकाइयों को तरजीह नहीं देते। इसका का भी प्रतिकूल असर है।
- सुरिंदर सिंह अरोरा, उपाध्यक्ष - चैंबर ऑफ स्मॉल एंड माइक्रो इंडस्ट्रीज
स्थानीय उत्पादों को ग्लोबल बनाने के लिए माहौल भी देना होगा। ये तो तय होना ही चाहिए कि बड़े उद्यम स्थानीय छोटे उद्यमियों से एक निर्धारित मात्रा में अनिवार्य रूप से माल लें। तब ही औद्योगिक माहौल बनेगा।
- साकेत गुप्ता, सचिव - चैंबर ऑफ स्मॉल एंड माइक्रो इंडस्ट्रीज